वरवर राव की हालत जेल में गंभीर, उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाए: बेटी पवना

वरवर राव

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, वरवर राव की पहचान एक जनवादी और वामपंथी कवि की है.

वामपंथी कवि और लेखक वरवर राव की हालत बिगड़ने के बाद परिवार वालों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की माँग की है.

बीते दो सालों से जेल में बंद 80 वर्षीय लेखक और कवि वरवर राव के परिवार ने माँग की है कि राव की हालत काफ़ी नाज़ुक है और उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए.

बीते 28 मई को वरवर राव की तबीयत ख़राब होने की वजह से उन्हें जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

इसके बाद राव के परिवार ने अदालत में उन्हें ज़मानत पर रिहा करने की अर्जी दी थी.

लेकिन नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने वरवर राव को भीमा कोरेगाँव केस में एक महत्वपूर्ण अभियुक्त क़रार देते हुए ज़मानत नहीं देने की अपील की थी.

इसके बाद कोर्ट ने राव को ज़मानत देने से इनकार कर दिया है.

कितनी ख़राब है वरवर राव की तबीयत?

बीते 40 दिनों में वरवर राव की अपने घरवालों से मात्र तीन बार बात हुई है. राव के भतीजे वी. वेणुगोपाल राव ने कहा है कि आख़िरी बार जब उनसे बात हुई तो वे काफ़ी बीमार लग रहे थे.

वरवर राव की बेटी पवना ने 12 जुलाई को ज़ूम पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "बीते दो कॉल्स में वह बात करने में दिक्क़त महसूस कर रहे थे. उनको जानने वाले जानते हैं कि वे कितने अच्छे वक़्ता हैं लेकिन वो बात करने में ख़ुद को असमर्थ पा रहे थे. इसके साथ ही उन्हें 'हलूसिनेशन' (भ्रम) हो रहा था. वे पुराने दौर की बातें कह रहे थे. मेरी माँ बस ये माँग कर रही हैं कि उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाए क्योंकि उनकी हालत बेहद ख़राब है. हम महाराष्ट्र सरकार से माँग कर रहे हैं कि कम से कम उन्हें इलाज उपलब्ध कराया जाए."

राव की ओर से जारी किए गए प्रेस नोट में उनकी बिगड़ती हालत को बयां किया गया है.

प्रेस नोट में परिवारवालों ने बताया है, "28 मई को जब उन्हें बेहोशी की हालत में तलोजा जेल से जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, इसके बाद से अब तक छह हफ़्तों में उनकी हालत बेहद ख़राब हो चुकी है. इसके तीन दिन बाद उनकी हालत में सुधार नहीं होने के बावजूद उन्हें जेल भेज दिया गया. उन्हें तत्काल इलाज की ज़रूरत है."

वरवर राव

इमेज स्रोत, Getty Images

बयान में परिवार ने कहा है, ''इस समय हमारे चिंतित होने की वजह बीते शनिवार को उनकी ओर से आया रूटीन फ़ोन कॉल है जिसे सुनकर हम परेशान हो गए हैं. इससे पहले की दो कॉल्स में भी हम परेशान हुए थे क्योंकि उनकी आवाज़ काफ़ी कमज़ोर और समझ में न आने वाली थी. वो बार-बार हिंदी में बोलने लगते थे. चार दशकों तक तेलुगू भाषा के लेखक रहे वरवरा राव बीते पांच दशकों से तेलुगू भाषा के बेहतरीन वक्ता रहे हैं. अपनी बेहतरीन याद्दाश्त के लिए चर्चित रहे वरवर राव का बोलते-बोलते भूल जाना काफ़ी अजीब और डराने वाला था."

परिवार ने कहा, "लेकिन जुलाई 11 को आए एक फ़ोन कॉल ने हमारी चिंताओं को काफ़ी बढ़ा दिया. वह अपनी सेहत से जुड़े सीधे सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे थे. जब उनसे उनकी सेहत के बारे में पूछा जा रहा था तब वे अपने पिता और माँ की अंत्येष्टि के बारे में बोल रहे थे.''

''ये वो घटनाएं तो आज से लगभग सात और चार दशक पहले हुई थीं. उनके साथियों ने उनसे फ़ोन लेकर हमें बताया कि वे अब चलने-फिरने, टॉइलेट जाने और ब्रश करने में भी असमर्थ हैं. उनके साथ जेल में बंद व्यक्ति ने ये भी कहा कि उन्हें हमेशा ये लगता है कि उनकी रिहाई होने वाली है और उनका परिवार जेल के बाहर इंतज़ार कर रहा है. उनके साथी क़ैदी ने कहा कि उन्हें तत्काल मेडिकल केयर के साथ-साथ न्यूरोलॉजिकल इलाज़ की भी ज़रूरत है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)