भारत-चीन सीमा विवाद में रूस क्यों ले रहा है दिलचस्पी? - प्रेस रिव्यू

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द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, रूस ने कहा है कि भारत और चीन के बीच विवाद के जल्द हल होने में रूस का हित है.
अख़बार ने रूस के राजनयिक सूत्रों के हवाले से लिखा है कि रूस ने पर्दे के पीछे से भारत और चीन के बीच तनाव कम करने की मुहिम शुरू की है.
रूस, चीन और भारत के बीच मंगलवार को एक वीडियो वार्ता भी होनी है जिसमें भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी शामिल होंगे.
रूस ने ये राजनयिक पहल 17 जून को शुरू की थी जब रूस के उप विदेश मंत्री इगोर मार्गुलोफ़ ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा करते हुए भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ़ एक्चु्ल कंट्रोल पर भारत के रूस में राजदूत डी. बाला वेंकटेश वर्मा से भी बात की थी.
रूस के विदेश मंत्रालय ने भारत के राजदूत के साथ हुई बैठक के बारे में अधिक जानकारियां तो नहीं दी हैं लेकिन द हिंदू ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत और चीन के बीच तनाव कम होने से वैश्विक स्तर पर रूस की दिलचस्पी है.
राजनयिक ने अख़बार से कहा, "चीन और भारत के बीच अच्छे रिश्ते यूरोशिया और ऐसे वर्ल्ड ऑर्डर के उत्थान के केंद्र में हैं जिसमें किसी एक महाशक्ति का प्रभुत्व न हो."
रास्ता भटक गए थे भारत के 10 सैनिक

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द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, चीन की हिरासत में आने वाले भारतीय सैनिक हिंसक झड़प के बाद अपने अड्डे की ओर लौटते समय रास्ता भटक गए थे. सैन्य अधिकारी ने अख़बार को बताया है कि ये सैनिक पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 के पास हुई झड़प के बाद ये सैनिक लापता हो गए थे.
इन सैनिकों ने मंगलवार को वापस लौटने की कोशिशें कीं लेकिन उन्हें रास्ता नहीं मिला. मंगलवार देर शाम को भारतीय सेना को ये पता चला कि दस सैनिक लापता हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक़, चीन ने इन सैनिकों को गुरुवार शाम को भारत को सौंप दिया था. शुक्रवार को अपने बयान में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि चीन की हिरासत में कोई भारतीय सैनिक नहीं है.
वहीं द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के सैनिकों को चीन ने तीन दिन चली बातचीत के बाद छोड़ा है. लेह स्थित 3 इंफेंट्री डिवीज़न के कमांडर अभिजीत बापत और चीन के समकक्ष अधिकारी के बीच तीन दिन चली वार्ता के बाद भारतीय सैनिकों की रिहाई हुई है. अख़बार के मुताबिक़, पकड़े गए सैनिकों में दो मेजर और दो कैप्टन भी शामिल थे.
अख़बार का कहना है कि उसे भारत के सैनिकों के अग़वा होने के बारे में पहले से ही जानकारी थी लेकिन बातचीत के दौरान अख़बार ने इस बारे में ख़बर न प्रकाशित करने का फ़ैसला लिया.
बिना कॉपी जांचे ही 12वीं के बच्चों को पास कर सकता है सीबीएसई

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द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, सीबीएसई एक विशेष मार्किंग स्कीम के तहत बारहवीं के बच्चों को पास कर सकती है, साथ ही सीबीएसई छात्रों को उनका प्रदर्शन सुधारने के लिए बाद में परीक्षा देने का विकल्प दे सकती है.
इसका मतलब ये है कि सीबीएसई हो सकता है जुलाई में परीक्षा ही न कराए और छात्रों के आंकलन का कोई और तरीक़ा निकाल ले. परीक्षा परीणामों से अंसतुष्ट रहने वाले छात्र बाद में पेन और पेपर वाली परीक्षा दे सकते हैं.
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