भारत-चीन सीमा पर झड़प: पंजाब रेजिमेंट के अंकुश ठाकुर के पिता ने कहा, व्यर्थ नहीं जाएगा बलिदान

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- Author, अश्विनी शर्मा
- पदनाम, हिमाचल प्रदेश से, बीबीसी हिंदी के लिए
अंकुश ठाकुर फ़ौजियों के क़िस्से कहानियों के बीच बड़े हुए. अपने दादा और पिता के बाद वो तीसरी पीढ़ी के फ़ौजी थे. सियाचिन ग्लेशियर में अपनी पोस्टिंग ख़त्म करने के बाद वो हमीरपुर अपने घर छुट्टी पर आने वाले थे.
21 वर्षीय अंकुश क़रीब डेढ़ साल पहले ही फ़ौज में भर्ती हुए थे. वो कुछ ही दिन पहले लद्दाख पहुँचे थे. वहाँ से अंकुश ने अपने पिता को फ़ोन पर बताया कि वो जल्द ही छुट्टी लेकर घर आने वाले हैं.
और अब गुरुवार को उनका शव, भारत के राष्ट्रीय ध्वज में लिपट कर, उनके घर पहुँचेगा.
अंकुश सोमवार की रात गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प में मारे गए 20 सैनिकों में से एक हैं. अंकुश के पिता अनिल ठाकुर ख़ुद सेना में रह चुके हैं.
उन्होंने कहा, "उसकी तक़दीर में इतनी मुश्किल जगह पर लड़कर देश की हिफ़ाज़त करते हुए, शहादत देना लिखा था. लेकिन मेरा लाल देश प्रेम में, बहुत छोटी उम्र में शहीद हो गया."
अनिल ठाकुर हाल ही में सेना से रिटायर हुए हैं. परिवार सियाचिन से अंकुश के लौटने के बाद, पिता की रिटायरमेंट और बेटे की पहली पोस्टिंग का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा था.
गाँव में ग़म

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हमीरपुर ज़िले का कड़होता गाँव अंकुश की ख़बर मिलने के बाद ग़मगीन है. इस ज़िले के सैकड़ों जवान भारतीय सेना से लेकर अर्ध सैनिक बलों में हर साल भर्ती होते हैं.
अपने बेटे के बारे में अनिल ठाकुर को सेना मुख्यालय से बुधवार को फ़ोन आया था. टीवी चैनल पहले से ही एक अफ़सर और दो जवानों की मौत की ख़बर दिखा रहे थे, लेकिन जैसी ही गाँव में अंकुश के बारे में ख़बर पहुँची, उनके घर पर भीड़ जमा होना शुरू हो गई.
गाँव में पंचायत के एक सदस्य को भी सेना ने फ़ोन पर अंकुश के बारे में सूचित किया था.
पंजाब रेजिमेंट में भर्ती

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अंकुश ठाकुर साल 2018 में पंजाब रेजिमेंट में भर्ती हुए थे. वो हमीरपुर ज़िले की भोरंज तहसील के गाँव कड़होता के रहने वाले थे.
भर्ती होने के बाद वो सिर्फ़ एक बार, 10 महीने पहले, छुट्टी बिताने आए थे.
गलवान भेजे जाने से पहले अंकुश दुनिया की सबसे ख़तरनाक सैन्य पोस्ट, सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात थे. वहाँ से वो छुट्टी पर घर लौटने वाले थे.
चाचा सुनील ठाकुर बताते हैं कि अंकुश में फ़ौज में जाने का जज़्बा ऐसा था कि वो कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़कर भर्ती हो गए थे.
हमीरपुर के ज़िलाधीश हरिकेश मीणा ने बताया कि अंकुश का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा.
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अंकुश को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "अंकुश का जाना बहुत ही दर्दनाक है, हमारे सैनिकों ने सीमा पर दिलेरी से लड़ाई लड़ी."
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