‘उस रात के बाद मैं पुलिस को बुलाने से डरता हूं’: एक काले अमरीकी की आपबीती

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- Author, स्टैफ़नी हेगार्टी
- पदनाम, पॉपुलेशन रिपोर्टर
जेम्स स्मिथ का पुलिस से बहुत ज़्यादा पाला नहीं पड़ा था. लेकिन, उन्होंने एक दिन अपने पड़ोसी का घर देर रात खुला देखकर पुलिस को बुलाया.
इसके थोड़ी देर बाद उन्होंने गोली चलने की आवाज़ सुनी और बाद में 28 साल की एक लड़की की लाश देखी. वो लड़की उनकी पड़ोसी की बेटी थी जिसे स्ट्रेचर पर ले जाया जा रहा था.
टेक्सास में फ़ोर्ट वर्थ शहर में रहने वाले जेम्स स्मिथ ग़ुस्सा हैं, दुखी हैं और वो थक चुके हैं. पुलिस के हाथ होने वाली हर काले व्यक्ति की मौत उन्हें अक्टूबर में हुई अटाटियाना जेफ़र्सन की हत्या की याद दिलाती है, जो उनकी पड़ोसी की बेटी थीं.
वो बताते हैं, “मुझे इस अपराध बोध के साथ जीना होगा. ये बात हमेशा मुझे परेशान करती रहेगी.” उन्होंने ही उस रात को पुलिस को बुलाया था.
12 अक्टूबर को रात करीब 2:30 बजे थे. जेम्स को उनके भांजे और भांजी ने जगाया. उन्होंने बताया कि पड़ोसी का दरवाज़ा खुला हुआ है और लाइट जल रही है.
उस घर की मालकिन योलांडा कार को दिल की बीमारी थी और हाल ही में उनकी हालत गंभीर भी हुई थी. इसलिए जेम्स उन्हें लेकर चिंतित हो गए. उन्होंने पुलिस को इसलिए फ़ोन किया ताकि वो आकर देखें कि घर में सब ठीक है या नहीं.
वो नहीं जानते थे कि योलांडा कार उस रात अस्पताल में थीं और उनकी बेटी और पोता देर रात तक वीडियो गेम खेल रहे थे. जब पुलिस पहुंची तो जेम्स घर के सामने खड़े थे.

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छह घंटे बाहर आया शव
एरॉन डीन नाम के पुलिसकर्मी ने सामने के दरवाज़े पर पहुंचने पर बंदूक निकाल ली और घर के किनारे से होते हुए पीछे के बगीचे में गए. कुछ सेकेंड बाद वहां पर गोली चलने की आवाज़ आई.
जेम्स कहते हैं, “जब वो गोली चली तो मैंने उस लड़की की आत्मा को कहते हुए सुना, इन लोगों को मत जाने दो. शायद यही कारण था कि मैं उस रात वहां तब तक खड़ा रहा जब तक वो उसे बाहर नहीं लाए.”
जल्दी ही और पुलिसकर्मी आ गए लेकिन उन्हें बताया नहीं गया कि वहां क्या हुआ था. वो करीब छह घंटे बाद अटाटियाना जेफ़र्सन का मृत शरीर लेकर बाहर निकले.
ये दोनों परिवार धीरे-धीरे एक-दूसरे को जान-पहचान रहे थे. योलांडा कार ने ये घर चार साल पहले लिया था और वो बहुत गर्व महसूस करती थीं. जेम्स और उनका घर सड़क के आर-पार था. जेम्स के बच्चे और पोते-पोतियां और अन्य पांच सदस्य भी उसी इलाक़े में रहते हैं.
जेम्स बताते हैं, “योलांडा कार एक मेहनती महिला थीं. उनकी ज़िंदगी में कुछ समस्याएं थीं लेकिन वो उनसे बाहर निकलीं और ये घर उनके लिए जीत की ट्रॉफ़ी की तरह था.”
अटाटियाना मां के बीमार होने के कारण घर पर रह रही थीं. वह अपनी मां और आठ साल के भतीजे का ध्यान रखते हुए मेडिकल स्कूल के लिए बचत कर रही थीं. वो डॉक्टर बनना चाहती थीं.
जेम्स कहते हैं कि उन्हें याद है कि कुछ दिन पहले एक कार दुर्घटना हुई तो अटाटियाना दौड़ी-दौड़ी मदद के लिए चली आईं. वह तब तक कार में बैठी रहीं जब तक मदद के लिए एम्बुलेंस नहीं आई. ये उनका स्वभाव था.

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कैमरे में क्या दिखा?
पुलिसकर्मी के शरीर पर लगे कैमरे से बाद में पता चला कि एरॉन डीन घर के पीछे से खिड़की की तरफ़ गए. यहां से अटाटियाना थोड़ी-बहुत दिख रही थीं.
एरॉन डीन चिल्लाए, “अपने हाथ उठाओ.” उन्होंने अपनी बात पूरी भी नहीं कि और खिड़की से गोली चला दी. उन्होंने अटाटियाना को बताया भी नहीं कि वो पुलिसकर्मी हैं.
एरॉन डीन ने नौकरी से निकाले जाने से पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया था. उन्हें तुरंत गिरफ़्तार कर लिया गया और दिसंबर में उन पर हत्या का अभियोग चलाया गया. इस मामले की सुनवाई में कोरोना वायरस के कारण देरी हो गई है.
फ़ोर्ट वर्थ के पुलिस चीफ़ एड क्रॉस ने कहा था कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि अटाटियाना जेफ़र्सन को अपनी जान क्यों गवानी पड़ी. वो प्रेस कॉफ़्रेंस में भावुक दिख रहे थे. उन्होंने कहा कि इस घटना से पुलिस और लोगों के बीच के संबंधों को नुकसान पहुंचा है.
पुलिस पर भरोसा नहीं
इस घटना ने जेम्स स्मिथ का पुलिस पर बचा थोड़ा-बहुत भरोसा भी ख़त्म कर दिया. वह कहते हैं, “हमारा पुलिस के साथ कोई संबंध नहीं है क्योंकि हम पुलिस पर भरोसा नहीं करते. हम उनसे दूर रहकर ही ठीक हैं.”
अब वो पुलिस को फ़ोन करने से बचते हैं. हाल ही में उनकी बहन ने पड़ोस में गोली चलने की आवाज़ सुनी और पुलिस को फ़ोन करने के लिए बोलने लगी लेकिन जेम्स ने इनकार कर दिया.
अमरीका में हर साल होने वाली हत्याओं में 1,000 पुलिसकर्मी गोली चलाने वालों में शामिल होते हैं. ये आंकड़े सरकार के स्तर पर तो नहीं आए हैं लेकिन कई संस्थाएं और शोधकर्ता इन्हें जुटाते हैं.
ऐसी ही एक संस्था ‘मैपिंग पुलिस वॉयलेंस’ के मुताबिक साल 2019 में पुलिस के हाथों मरने वालों में काले लोगों की संख्या 24 प्रतिशत थी जबकि वो जनसंख्या में 13 प्रतिशत हिस्सा ही रखते हैं.
इन अपराधों के लिए बहुत कम ही सज़ा हो पाती है. 2013 और 2019 के बीच ‘मैपिंग पुलिस वॉयलेंस’ ने 7500 ऐसे मामले दर्ज किए जिसमें पुलिसकर्मियों ने गोली मारकर हत्या की थी. लेकिन, स्टिनसन के डाटाबेस के मुताबिक़ सिर्फ़ 71 मामलों में ही हत्या का आरोप लगाया और 23 मामलों में हत्या के लिए सज़ा दी गई.
क्रिस्टोफ़र लोवी की पुलिस की गाड़ी के पीछे मौत हो गई थी. उन्हें दो पुलिस वालों ने पकड़ा था. शरीर पर लगे कैमरे से पता चला कि पुलिसवाले उन्हें घसीटकर कार में ले गए. क्रिस्टोफ़र ने बार-बार कहा कि वो बीमार हैं और सांस नहीं ले पा रहे हैं लेकिन उन्हें नहीं छोड़ा गया.
13 मिनट बाद ड्रग के ओवरडोज़ के कारण क्रिस्टोफ़र की मौत हो गई. कहा जाता है कि अगर पुलिस ने उनकी हालत देखकर एम्बुलेंस बुला ली होती तो उनकी जान बच सकती थी.
जनवरी 2019 में पांच पुलिसकर्मियों को निकाल दिया गया जिनमें से दो को एक साल बाद फिर से बहाल कर दिया गया.
'यहां कभी ख़ुश नहीं रह पाऊंगा'
अटाटियाना के अंतिम संस्कार के दो हफ़्ते बाद उनके पिता की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. उनके भाई को लगता है कि बेटी की मौत के दुख ने उनकी जान ले ली.
जेम्स स्मिथ और योलांडा कार अमरीका की दो सफल कहानियां मानी जानी चाहिए. एक पोस्टल वर्कर और एक नर्स जिन्होंने बहुत मेहनत की, पैसे बचाए, अपने बच्चों को शिक्षा दी और सुंदर घर ख़रीदे. मगर जेम्स स्मिथ नहीं जानते कि वो यहां पर ख़ुश रह भी पाएंगे या नहीं.
वो कहते हैं कि उनके घर से बार-बार अटाटियाना का घर दिखता है जो उन्हें उस रात की याद दिलाता है. पूरी ज़िंदगी उन्हें ये घर ऐसे ही दिखाई देगा.
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