'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' मामला: बेंगलुरु की छात्रा को मिली ज़मानत

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
इस साल फ़रवरी में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के विरोध में हुई रैली में 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' के नारे लगाने पर राजद्रोह की अभियुक्त बनाई गई 19 साल की एक छात्रा को बेंगलुरु की अदालत से अपने आप ज़मानत मिल गई है क्योंकि पुलिस तय 90 दिनों के अंदर आरोपपत्र दाख़िल नहीं कर पाई.
कॉलेज में पढ़ने वाली अमूल्या एन नरोन्हा नामक छात्रा ने विवादित नारा हैदराबाद सांसद असदउद्दीन ओवैसी की मौजूदगी में लगाया था जिससे सांसद ओवैसी समेत वहां मौजूद सभी लोग सन्न रह गए थे. लेकिन उन्होंने 'हिंदुस्तान ज़िंदाबाद' का नारा भी लगाया था जो पाकिस्तान के ज़िक्र में किसी का उसपर शायद ध्यान नहीं गया.
छात्रा के वकील प्रसन्ना आर ने बीबीसी हिंदी को बताया कि सारी औपचारिकताएं गुरुवार को ही पूरी हो गईं थीं और शुक्रवार को मजिस्ट्रेट ने रिहाई आदेश पर दस्तख़त कर दिए. इसके बाद शाम को 8.15 बजे अमूल्या जेल से बाहर निकलीं और अपनी मां से गले मिलीं.
कर्नाटक में फ़रवरी में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में हुई रैली में कई नौजवान शामिल हुए थे, लेकिन कन्नड़ और अंग्रेज़ी में धारा-प्रवाह बोलने की वजह से ये छात्रा आसानी से सबकी नज़र में आ गई थी.
20 फ़रवरी को फ्रीडम पार्क में हुई रैली में इस छात्रा ने अपने भाषणा की शुरुआत पहले 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' और फिर 'भारत ज़िंदाबाद' के नारे के साथ की थी. उसके बाद उन्होंने कई और देशों का भी नाम लिया था और उनके लिए भी ज़िंदाबाद का नारा लगया था.
इस बारे में उन्होंने 16 फ़रवरी को अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में भी लिखा था- ''हिंदुस्तान ज़िंदाबाद, पाकिस्तान ज़िंदाबाद, बांग्लादेश ज़िंदाबाद, श्रीलंका ज़िंदाबाद, नेपाल ज़िंदाबाद, चीन ज़िंदाबाद, भूटान ज़िंदाबाद.....जो भी देश हैं, सब देश ज़िंदाबाद......''
अपना तर्क देते हुए अमूल्या ने कहा था, "राष्ट्र का मतलब वहां रहने वाले लोग हैं. हर व्यक्ति को बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए. सबको अपने मौलिक अधिकार मिलने चाहिए. सरकारों को अपने लोगों का ख़्याल रखना चाहिए. जो भी अपने लोगों की सेवा करता है उन सबके लिए ज़िंदाबाद."
अमूल्या ने आगे कहा था, ''अगर मैं किसी राष्ट्र का नाम लेकर उसके लिए ज़िंदाबाद कहती हूं तो इतने भर से मैं उस राष्ट्र का हिस्सा नहीं बन जाती. क़ानूनन मैं भारतीय नागरिक हूं. अपने राष्ट्र का सम्मान करना और अपने देश के लोगों के लिए काम करना मेरा फ़र्ज़ है. मैं ये करती रहूंगी. देखते हैं आरएसएस वाले क्या करते हैं.''

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लेकिन पाकिस्तान ज़िंदाबाद का नारा सुनते ही वहां मौजूद सभी लोग एक दम चौंक गए या कहा जाए कि सुन्न रह गए थे.
हैदराबाद सांसद असदउद्दीन ओवैसी उस समय नमाज़ पढ़ने जा रहे थे लेकिन जैसी ही उन्होंने ये नारा सुना वो भागकर माइक के पास आए और अमूल्या से कहा कि उन्हें इस तरह की बात नहीं करनाी चाहिए.
फ़ौरन ही अमूल्या को पुलिस स्टेशन ले जाया गया और पुलिस ने उन पर देश द्रोह का मुक़दमा दर्ज कर लिया.
कुछ लोगों ने अमूल्या के घर पर भी हमला किया था और उनके पिता को ये कहने पर मजबूर किया था कि वो अब अपनी बेटी को इस घर में नहीं रहने देंगे.
बीजेपी के एक नेता बीएल संतोष ने उस समय ट्वीट किया था, "सीएए विरोध प्रदर्शनों का पागलपन देखिए. एक वामपंथी कार्यकर्ता बेंगलुरु में पाकिस्तान ज़िंदाबाद का नारा लगाती है. हाशिए पर खड़े लोगों ने पूरी तरह से इस विरोध प्रदर्शन को अपने क़ब्ज़े में ले लिया है. अब ये कहने का समय आ गया है कि अब बहुत हुआ.''
छात्रा की रिहाई क़ायदे से 20 मई को होनी थी, जब 90 दिन की अवधि पूरी हुई थी. लेकिन कुछ क़ानूनी पेचीदगी और कुछ हद तक कोरोना लॉकडाउन की वजह से प्रक्रिया में थोड़ी देर हो गई.
सेशन कोर्ट ने ये कहते हुए उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी थी कि, ''अगर याचिकाकर्ता को ज़मानत दी जाती है तो हो सकता है कि वो फ़रार हो जाए या दोबारा इसी तरह के अपराध में लिप्त हो सकती हैं जो कि शांति के लिए ख़तरा हो सकता है.''
लॉकडाउन के कारण अमूल्या के वकील हाईकोर्ट पहुंचे लेकिन फिर उन्होंने हाईकोर्ट से अपनी अपील वापस ले ली और फिर निचली अदालत गए.
अमूल्या के वकील प्रसन्ना ने कहा, ''हमलोगों ने हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस लेली. इस बीच 90 दिन से ज़्यादा हो गए थे और हमारे पास सीआरपीसी के सेक्शन 167 (2) के तहत मजिस्ट्रेट कोर्ट जाने का विकल्प था. हमनें 26 मई को ऑनलाइन याचिका दायर की थी लेकिन ई-मेल काम नहीं कर रहा था. 29 मई को हमनें शारीरिक तौर पर मजिस्ट्रेट पहुंचे.''
प्रसन्ना ने कहा कि 90 दिनों के बाद किसी को हिरासत में रखना ग़ैर-क़ानूनी है और 2014 का सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश है कि जिस दिन 167 (2) के तहत याचिका दायर होती है उसकी उसी दिन सुनवाई होनी चाहिए और उसी दिन फ़ैसला सुनाया जाना चाहिए.
वकील प्रसन्ना के अनुसार, पुलिस ने तीन जून को चार्जशीट दायर की थी, उसके बाद सुनवाई हुई और अदालत ने ज़मानत का आदेश जारी कर दिया.


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