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भारत-चीन ने लद्दाख ही नहीं, दूसरे सेक्टर में भी बढ़ाई सेना - प्रेस रिव्यू
भारत और चीन ने लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर अपनी सेनाओं को सीमा के और करीब तैनात कर दिया है. मई में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई तनातनी के बाद एक ओर जहां दोनों देश इस मुद्दे को सुलझाने में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों की सेनाएं अपनी सामान्य तैनाती से आगे बढ़कर सीमा के और करीब पहुंच गई हैं.
इंडियन एक्सप्रेस में भारतीय सेना के सूत्रों के हवाले से छपी एक ख़बर के मुताबिक, लद्दाख क्षेत्र में भारत-चीन की सीमा पर पूरे क्षेत्र में सेनाओं की तैनाती में यह कदम उठाया गया है.
सेना के सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है, ''सैनिकों की यह तैनाती पूर्वी लद्दाख की तरह नहीं है. पश्चिमी (लद्दाख), मध्य (उत्तराखंड, हिमाचल) और पूर्वी (अरुणाचल, सिक्किम), इन तीनों सेक्टर में करीब 3488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा पर सैनिकों की तैनाती प्रमुख जगहों पर की गई है.''
मई में पूर्वी लद्दाख के पश्चिमी सेक्टर में दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आए थे, इसके बाद दोनों देशों ने मध्य और पूर्वी सेक्टर में भी सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है. यह तैनाती 6 जून को दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई बातचीत से काफी पहले की गई है.
सूत्रों के मुताबिक, दूसरे सेक्टर जहां सैनिकों की तैनाती हुई है वहां वो आमने सामने नहीं हैं क्योंकि ये तैनाती सीमा से पीछे है.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा, ''चीन ने मई से ही अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी, जिसके बाद भारत ने भी दूसरे सेक्टर्स में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाई है. हालांकि ये तैनाती एलएसी से दूर है और 6 जून को हुई बैठक से काफ़ी पहले ये काम हो चुका है.''
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने गहराई वाले इलाकों में करीब 10 हज़ार सैनिकों की तैनाती की है. हालांकि भारत का यह फैसला चीन की ओर से सैनिकों की संख्या बढ़ाए जाने के बाद लिया गया है.
यात्रा के लिए देना पड़ सकता है हेल्थ सर्टिफ़िकेट
कोरोना संक्रमण के बढ़ते आंकड़ों के बीच शुरू की गई घरेलू विमान सेवाओं के मामले में जहां राज्यों के बीच आपसी मतभेद जारी हैं वहीं ट्रैवेल कंपनयों ने अपना काम फिर से शुरू करने के लिहाज से प्रोटोकॉल तय करना शुरू कर दिया है.
भारत में कई टूरिज्म बोर्ड और ट्रैवेल फर्म कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए एहतियात बरतते हुए यात्रियों के मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य करने की योजना बना रहे हैं.
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक ख़बर के मुताबिक, कोरोना संक्रमण की वजह से दुनियाभर में यात्राओं पर रोक लगी है और यह स्पष्ट नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के लिए सभी देश कब राज़ी होते हैं. जबकि घरेलू उड़ानों में सिर्फ़ ज़रूरी और आपातकालीन स्थिति में ही लोग सफ़र कर रहे हैं.
गुरुवार को थॉमस कुक कंपनी ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रॉसीज़र (एसओपी) जारी किया है जिसमें स्टाफ़ और यात्रियों, दोनों के लिए निर्देश हैं.
इसके मुताबिक, यात्रा से पहले ग्राहकों को डॉक्टर से 'फिट टु ट्रैवेल' यानी फिटनेस सर्टिफिकेट लाना होगा और सफ़र के दौरान दूसरे लोगों से पर्याप्त दूरी बनाकर रहना होगा.
थाईलैंड की टूरिज़्म अथॉरिटी ने भी पर्यटन को दोबारा पटरी पर लाने के लिए कुछ ज़रूरी एहतियात बरतने का फैसला लिया है. थाईलैंड आने वाले पर्यटकों को मेडिकल सर्टिफिकेट देना होगा साथ ही एयरपोर्ट पर कोविड-19 की रैपिड टेस्टिंग से भी गुजरना होगा.
असम के डिटेंशन सेंटर से रिहा किया 'विदेशी'
असम के एक डिटेंशन सेंटर से सिद्दीक़ी अली नाम के 'घोषित विदेशी' को रिहा कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद असम के बराक वैली स्थित डिटेंशन सेंटर से सिद्दीक़ी को रिहा किया गया.
घोषित विदेशी वह शख़्स कहलाता है जो असम की 100 में से किसी भी एक फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल में अपने भारतीय नागरिक होने के दस्तावेज पेश नहीं कर पाता.
द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 69 साल के सिद्दीक़ी को 5 जून 2018 को बॉर्डर पुलिस ने दीमा हसाओ ज़िले में स्थित उनके घर से हिरासत में लिया था और सिलचर के डिटेंशन सेंटर में बंद कर दिया था. उन्हें काफी बाद में पता चला था कि उनके ज़िले कि एक फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल ने उन्हें विदेशी नागरिक घोषित कर दिया है. उन पर आरोप था कि बॉर्डर पुलिस ने उनके घर की दीवार पर जो नोटिस चिपकाया था उसका जवाब देने में वो नाकाम रहे. ये वो नोटिस था जिसे सिद्दीक़ी पढ़ नहीं पाए थे. दरअसल, उन्हें पढ़ना नहीं आता.
सिलचर सेंट्रल जेल से बाहर आने के बाद सिद्दीक़ी ने कहा, ''भरोसा नहीं हो रहा कि मैं आज़ाद हूं, ज़िंदा हूं. इतने दिनों में मैं हर रोज़ मरा हूं यह सोचते हुए कि आखिर मेरा गुनाह क्या है.''
13 अप्रैल के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 10 जून तक असम के सभी डिटेंशन सेंटर्स से उन लोगों को रिहा कर दिया गया है जिन्होंने दो साल हिरासत का वक़्त पूरा कर लिया है. इनकी संख्या 339 है. ये सभी ''घोषित विदेशी'' हैं.
विजय माल्या के मामले में भारत की ब्रिटेन से अपील
भारत ने गुरुवार को कहा है कि उसने ब्रिटेन से अपील की है कि वो विजय माल्या की शरण लेने की किसी भी अर्जी पर गौर न करे. फिलहाल ब्रिटेन में माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर केस चल रहा है.
हिंदुस्तान टाइम्स की एक ख़बर के मुताबिक, एक सप्ताह पहले ब्रिटेन ने एक गोपनीय कानूनी मामला माल्या के प्रत्यर्पण पर बाधा बना हुआ था लेकिन इससे जल्द निपट लिया जाएगा.
ब्रिटेन के इस बयान के बाद यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि शायद माल्या ने ब्रिटेन में शरण के लिए अर्जी दी है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ''ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में विजय माल्या की अर्जी खारिज होने के बाद हम लगातार ब्रिटेन के संपर्क में हैं और माल्या के जल्द प्रत्यर्पण की कोशिशें की जा रही हैं. साथ ही ब्रिटेन से यह अपील भी की गई है कि वो माल्या की शरण लेने की याचिका पर ध्यान न दे.''
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