ओआईसी में भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तान को मालदीव ने मज़बूती से रोका- प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, Sanjeev Verma/Hindustan Times via Getty Images
पाकिस्तान समेत इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) की ओर से भारत पर इस्लामोफ़ोबिया को लेकर सवाल उठाए गए थे. लेकिन मालदीव ने भारत का इस मामले में मज़बूती से बचाव किया है.
इकनॉमिक टाइम्स ने इस ख़बर को तीसरे पन्ने पर प्रमुखता से छापा है. इस रिपोर्ट के अनुसार मालदीव ने कहा है कि भारत पर इस्लामोफोबिया को प्रोत्साहित करने का आरोप लगाना ग़लत है.
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने हाल ही में ओआईसी की एक ऑनलाइन मीटिंग में दावा किया था कि भारत इस्लामोफोबिया को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है. लेकिन मालदीव ने पाकिस्तान के दावे को ख़ारिज कर दिया और कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां 20 करोड़ से ज़्यादा मुसलमान रहते हैं और ऐसे में इस्लामोफोबिया का आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से ग़लत है और इस तरह का आरोप दक्षिण एशिया में धार्मिक सद्भावना के लिए घातक हैं.
मालदीव ने कहा कि सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे दुष्प्रचार को एक अरब 30 करोड़ आबादी वाले भारत की मंशा के तौर पर नहीं पेश किया जा सकता. मालदीव ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में इस्लामिक देश सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अफ़ग़ानिस्तान और फ़लस्तीनियों से मज़बूत संबंध विकसित किए हैं. मालदीव ने कहा कि इन देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने देश के सर्वोच्च सम्मान से भी नवाज़ा है. मालदीव ने यह भी कहा कि पाकिस्तान समेत दक्षिण एशिया के सभी देशों को साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत है और पाकिस्तान को थोड़ा उदार रवैया अपनाना चाहिए.
ओआईसी के भीतर मालदीव उन देशों में शामिल है जो पिछले कुछ सालों से भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की लाइन का विरोध करता रहा है. 2018 में मालदीव में सत्ता परिवर्तन के बाद से भारत के संबंधों में मधुरता आई है. इससे पहले की सरकार चीन के ज़्यादा क़रीब थी. हिन्द महासागर में भारत एक अहम देश है. हाल ही में भारत ने केसरी पोत के ज़रिए मालदीव, मॉरिशस, मेडागास्कर और कोमोरोस में कोविड 19 को लेकर मेडिकल आपूर्ति भेजी थी.

इमेज स्रोत, ANTHONY WALLACE/AFP via Getty Images
चीन ने भारत की मदद मांगी
हॉन्ग कॉन्ग में एक सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लाने से पहले चीन ने भारत समेत कई प्रमुख देशों से बातचीत की है.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ हॉन्ग कॉन्ग में अलगाववादी तत्वों पर काबू पाने के लिए ये चीन ये क़ानून ला रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली संभावित आलोचना के मद्देनज़र भारत जैसे देशों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया है.
अख़बार ने समाचार एजेंसियों के हवाले से लिखा है कि चीन के मुताबिक़ हॉन्ग कॉन्ग चीन का घरेलू मुद्दा है और किसी भी देश को इसमें दखल नहीं देना चाहिए.
चीन ने शुक्रवार को हॉन्ग कॉन्ग में एक नया राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लागू किया है जिससे माना जा रहा है कि 'एक देश, दो व्यवस्था' वाली अवधारणा ख़त्म हो सकती है.
चीन की तरफ़ से भारत को गए भेजे गए कूटनीतिक संदेश में कहा गया है, "आपका देश हॉन्ग कॉन्ग और वहां के लोगों के साथ क़रीबी आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते रखता है. हॉन्ग कॉन्ग की समृद्धि और स्थिरता में आपके देश समेत पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का हित है. साथ ही हॉन्ग कॉन्ग में आपके देश के वैध हितों के संरक्षण के लिहाज से भी ये अहम है. उम्मीद है कि आपकी सरकार चीन को समझेगी और उसे समर्थन देगी."

इमेज स्रोत, Aditya/NurPhoto via Getty Images
आरोग्य सेतु ऐप से राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा?
साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञों और ख़ुफ़िया विभाग के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि आरोग्य सेतु ऐप के ज़रिए जो डेटा इकट्ठा किया जा रहा है, उसे देश विरोधी ताक़तों से ख़तरा हो सकता है और ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चुनौती है.
हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार के मुताबिक़ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा भारत की सुरक्षा क्षमताओं और डेटा सुरक्षा में मौजूद कमियों के कारण है.
हालांकि भारत सरकार इन चिंताओं को ख़ारिज करती है. अख़बार ने अधिकारियों के हवाले से कहा है कि डेटा सुरक्षा और हैंकिंग को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाये गए हैं.
कोविड-19 की महामारी पर रोकथाम के इरादे से लाए गए आरोग्य सेतु ऐप को लेकर परस्पर विरोधी विचार सामने आते रहे हैं.
एक पक्ष का कहना है कि ख़तरे की जो बात कही जा रही है, उसका दरअसल कोई वजूद ही नहीं है या फिर है भी तो बहुत मामूली है.
दूसरे पक्ष की राय में आरोग्य सेतु ऐप से जुटाई जा रही जानकारी सरकार के अनुमान से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण और जोखिम भरा है जिसकी अहमियत केवल प्राइवेसी के लिहाज से ही नहीं बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी है.

इमेज स्रोत, Sunil Ghosh/Hindustan Times via Getty Images
ग़रीबों को नक़द में मदद मिलेः विपक्ष
देश की विपक्षी पार्टियों ने मांग की है कि आयकर के दायरे से बाहर के सभी लोगों को 7500 रुपये सीधे उनके खाते में दिए जाएं.
कलकत्ता से छपने वाले अंग्रेज़ी अख़बार टेलीग्राफ़ के मुताबिक़ विपक्षी पार्टियां मनरेगा के तहत और ज़्यादा दिनों के काम और श्रम क़ानूनों को फिर से बहाल किए जाने की मांग कर रही हैं.
साझा विपक्ष की इस मांग में देश भर के 22 राजनीतिक दल शामिल हैं और उनका कहना है कि वे देश की आधी से भी ज़्यादा आबादी की नुमाइंदगी करती हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से बुलाए गए इस वीडियो कॉन्फ्रेंस में सभी राजनीतिक दलों ने केंद्र को कोरोना संकट से निपटने में पूरे सहयोग का भरोसा दिलाया है.
इस बैठक में ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन ने भी हिस्सा लिया. बसपा, सपा और आम आदमी पार्टी ने इस मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क पहनना क्यों ज़रूरी है?
- अंडे, चिकन खाने से फैलेगा कोरोना वायरस?
- कोरोना वायरस: बच्चों को कोविड-19 के बारे में कैसे बताएं?
- कोरोना वायरस: संक्रमण के बाद बचने की कितनी संभावना है
- कोरोना वायरस: क्या करेंसी नोट और सिक्कों से भी फैल सकता है?
- ‘फ़्लू’ जो कोरोना वायरस से भी ज़्यादा जानलेवा था
- कोरोना वायरस कैसे आपका धंधा-पानी मंदा कर रहा है?
- कोरोना वायरस: क्या मास्क आपको संक्रमण से बचा सकता है?
- क्या लहसुन खाने से ख़त्म हो जाता है कोरोना वायरस?
- कोरोना वायरस अभी की दुनिया को पूरी तरह से यूं बदल देगा
- कोरोना वायरस: बच्चों को कोविड-19 के बारे में कैसे बताएं?
- कोरोना वायरस: क्या गर्भ में ही मां से बच्चे को हो सकता है?
- कोरोना के बाद की दुनिया में राष्ट्रवाद, निगरानी और तानाशाही बढ़ेगी
- कोरोना काल में कैसे बनाए रखें अपनी रोमांटिक लाइफ़
- कोरोना वायरस: वो महिला जिन्होंने घरेलू मास्क घर-घर पहुंचाया



(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












