कोरोना संकट: मोदी सरकार ने एक तीर से अनेक शिकार करने की कोशिश की है- नज़रिया
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इमेज कैप्शन, बड़ी तादाद में प्रवासी मज़दूर अपने घरों की ओर लौट रहे हैं.....में
Author, आलोक जोशी
पदनाम, आर्थिक मामलों के जानकार
बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी की पहली क़िस्त आ गई है. हालाँकि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर की मानें तो 2014 के बाद से लगातार क़िस्तें आती ही जा रही हैं.
इसीलिए एक घंटे बीस मिनट तक चली प्रेस कांफ्रेंस का पहला आधा घंटा यही बताने में गया कि तब से अब तक क्या-क्या मिल चुका है, क्या दिया जा चुका है. फिर यह भी बताया गया कि अगले कई दिनों तक यही टीम आपके सामने आती रहेगी और बीस लाख करोड़ रुपए के महापैकेज के अलग-अलग अध्यायों के दर्शन करवाती रहेगी.
पहली क़िस्त से एक बात तो साफ़ है
सरकार का पूरा ज़ोर सबसे पहले दर्द दूर करने पर है. आप कह सकते हैं कि सबसे ज़्यादा परेशानी और दर्द तो ग़रीबों और प्रवासी मज़दूरों का है जिनका यहाँ नाम तक नहीं लिया गया.
लेकिन तब याद रखना चाहिए कि पौने दो लाख करोड़ रुपए का जो शुरुआती पैकेज प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना के नाम से आया था उसमें ऐसे ज़्यादातर लोगों के खाते में कुछ न कुछ रक़म पहुँचाने, उनको अनाज देने या फिर उनके घर गैस पहुँचाने तक की व्यवस्था की गई थी.
और क्या-क्या किया गया, किसे कितनी रक़म और कितनी मदद दे दी गई ये ब्यौरा और इसके आँकड़े तो आपको चारों तरफ़ से मिल ही रहे होंगे. इसलिए उसके ब्यौरे में नहीं जाऊँगा.
इसका मतलब यह क़त्तई नहीं है कि इससे सरकार के कर्तव्य की इतिश्री हो गई. लेकिन आज के एलान यानी निर्मला अनुराग आख्यान के पहले अध्याय को इस नज़र से देखा जाना चाहिए कि इसमें ऐसे लोगों की मदद करने की कोशिश की गई है जो ख़ुद तो मुसीबत में हैं ही लेकिन जिनके साथ उनपर निर्भर एक पूरी बिरादरी भी मुसीबत में है.
इसमें व्यापारी, छोटे कारोबारी, कुटीर उद्योग, एमएसएमई यानी बहुत छोटे, छोटे और मझोले उद्योग शामिल हैं. तरह-तरह के क़र्ज़ बाँटने वाली फ़ाइनेंस कंपनियाँ यानी एनबीएफ़सी शामिल हैं.
हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनियाँ हैं. बिजली वितरण कंपनियाँ हैं जिन्हें आप बिजली बोर्ड भी कह सकते हैं. बिल्डर हैं, कंस्ट्रक्शन के काम में लगी कंपनियाँ हैं, ठेकेदार हैं.
फ़ैक्ट्री चलानेवाले हैं. प्रोफ़ेशनल्स भी हैं. चैरिटेबल या धर्मादा ट्रस्ट भी हैं और प्रोप्राइटरशिप, पार्टनरशिप, एलएलपी यानी जो कंपनी नहीं बने वो सारे कारोबार भी हैं.
इन सबके साथ एक ही बात जुड़ी हुई है. इनमें से ज़्यादातर अपना कारोबार, अपनी रोज़ी रोटी चलाने के साथ ही कुछ और लोगों को रोज़गार भी देते हैं. कोई दो चार को तो कोई सैकड़ों या हज़ारों को.
साफ़ मतलब यह है कि इनको जो भी मदद मिलेगी उसका असर दूर तक होगा. यानी एक तीर से अनेक शिकार.
ख़ासकर एमएसएमई के मुद्दों को देखें तो सरकार ने हिम्मत दिखाई है.
कुछ ऐसे सुधार कर दिए हैं जो बरसों से न जाने क्यों अटके पड़े थे. मसलन अलग-अलग आकार के उद्योगों की परिभाषा.
कांग्रेस नेता और पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम ने भी इस फ़ैसले का स्वागत किया है.
परिभाषा बदलने से फ़ायदा क्या होगा?
फ़ायदा यह होगा कि किसी ख़ास छूट या लाभ के चक्कर में जो कंपनियाँ अपने कारोबार में नई पूँजी लगाने या टर्नओवर बढ़ाने से कतराती रहती थीं, या फिर वो काग़ज़ों पर आँकड़ा कम दिखाती थीं, अब उन्हें ऐसा करने की ज़रुरत नहीं रह जाएगी.
जब उनकी अपनी कैपिटल ज़्यादा होगी और वो टर्नओवर भी बढ़ाने के लिए आज़ाद होंगी तो उन्हें कारोबार बढ़ाने की ही नहीं बैंक से ज़्यादा क़र्ज़ उठाने की भी छूट मिल जाएगी. फ़ायदा आप ख़ुद समझ लें.
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आज का सबसे बड़ा एलान तो कुटीर, छोटे और मझोले उद्योगों के लिए बिना कुछ गिरवी रखे, बिना गारंटी के लोन दिए जाने का फ़ैसला है.
उसमें भी एक साल तक मूल पैसा चुकाना नहीं है.
ये ऐसे वक़्त में वास्तव में संजीवनी साबित हो सकती है.
ख़ासकर उन कारोबारियों के लिए जो मेहनत और लगन से वापस अपना बिज़नेस चमकाना चाहते हैं.
यही नहीं मुसीबत में फँसे व्यापारी अगर एनपीए डिक्लेयर हो चुके हों तब भी उन्हें क़र्ज़ दिलवाने के लिए जो ख़ास सबॉर्डिनेट ऋण स्कीम आई है वो भी ऐसे जज़्बे वाले लोगों के लिए बहुत बड़ा सहारा होगी.
एनबीएफ़सी और हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनियों को मदद देने के लिए कमज़ोर रेटिंग वाले बॉंड भी सरकार ख़रीदने का इंतज़ाम करेगी यह ख़बर भी बाज़ार को ख़ुश करेगी.
बिजली कंपनियों को बक़ाए की रक़म के हिसाब से क़र्ज़ देने का एलान है और साथ में ये शर्त कि इसका फ़ायदा बिजली के उपभोक्ता को मिलना चाहिए. क़र्ज़ मिल रहा है उतना जितना पैसा कहीं बाक़ी है और फ़ायदा पहुँचाना है उपभोक्ता को. यह गणित कैसे चलेगा सवाल बाक़ी है.
वीडियो कैप्शन, वो कारोबार जो लॉकडाउन में भी चमक रहे हैं
इनकम टैक्स और पीएफ़ में जो रियायतें गिनाई गई हैं उनपर कई सवाल हैं
लोगों का टीडीएस कम कटेगा, लेकिन आख़िर में टैक्स तो पूरा भरना पड़ेगा, फिर राहत क्या मिली. पीएफ़ में जो हिस्सा सरकार भर रही है उतने के लिए तो सबको सरकार का आभारी होना चाहिए. मगर जिन कर्मचारियों को यह राहत मिल रही है कि वो बारह परसेंट के बजाय दस परसेंट ही कटवाएं और मानें कि तनख़्वाह बढ़ गई है, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि वो अपनी बुढ़ापे की बचत पर ही हाथ साफ़ कर रहे हैं इसमें सरकार उन्हें कुछ दे नहीं रही है. ए
कदम यही बात इनकम टैक्स के रिफ़ंड पर भी लागू होती है. सरकार ने आदेश दे दिया कि पाँच लाख रुपए तक के रिफ़ंड तुरंत दे दिए जाएं. अच्छा है. मगर जिसका पैसा था उसी को दिया जा रहा है, इसमें तारीफ़ की बात क्या है?
कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट की तारीख़ें छह महीने बढ़ाने से बिल्डरों को राहत ज़रूर मिलेगी.
मगर उन ख़रीदारों का क्या जो अपने घर का इंतज़ार कर रहे हैं?
वो यही सोचकर संतुष्ट हो सकते हैं कि मंदी की मार से बेहाल बिल्डर दीवालिया हो इससे अच्छा है कि कुछ दिन इंतज़ार और कर लिया जाए.
और राज्यों को केंद्र की तरफ़ से जो सलाह दी जाएगी अभी इसपर भी सवाल है कि कौन सा राज्य उसपर कितना अमल करेगा.
फ़ोर्स मेज्योर यानी ईश्वर प्रदत्त आपदा या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में कौन किसका कितना हक़ दबा सकता है, ये भी एक नई क़ानूनी बहस खड़ी करने की पूरी क्षमता रखता है.
और अभी ये सवाल तो धीरे-धीरे खुलेगा कि आज जो एलान हुए हैं. राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता और पिछली सदी की रीति नीति से चलनेवाले अनगिनत होशियार लोग उनमें से अपना अपना माल बनाने के कितने रास्ते कितनी जल्दी खोलने में कामयाब होते हैं.
या फिर न खाऊँगा न खाने दूँगा का नारा बुलंद रहेगा. और आज के ये एलान कितने प्रभावी या कामयाब होते हैं ये पूरी तरह समझने के लिए हमें इस महापैकेज के अगले अध्यायों का भी बारीकी से पारायण तो करना ही पड़ेगा.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.