पीएम नरेंद्र मोदी ग़रीब, मज़दूर, किसान और श्रमिकों पर क्या बोले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना लॉकडाउन के दौरान राष्ट्र के नाम अपने पांचवें संबोधन में बीस लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज और लॉकडाउन को आगे बढ़ाने की घोषणा की.

हालांकि उन्होंने आर्थिक पैकेज का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन-4 बिलकुल अलग रंग-रूप में होगा और इसकी जानकारी देशवासियों को 18 मई से पहले दे दी जाएगी.

34 मिनट के अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 'गौरवशाली अतीत' और भविष्य में 'आत्मनिर्भर' भारत के संकल्प का ज़िक्र किया.

इसके अलावा ग़रीबों, श्रमिकों, पलायन करते मज़दूरों जैसे मुद्दों पर उन्होंने क्या कहा आइए जानते हैं-

ग़रीब

प्रधानमंत्री मोदी ने क़रीब ढाई हज़ार शब्द के अपने इस भाषण में तीन जगह ग़रीबों का ज़िक्र किया.

प्रधानमंत्री मोदी ने बीते छह सालों में हुए सुधारों की तारीफ़ करते हुए कहा कि 'बीते छह वर्षों में जो रिफॉर्म्स हुए उनके कारण आज संकट के इस समय भारत की व्यवस्थाएं अधिक समर्थ, अधिक सक्षम नज़र आई हैं. वरना कौन सोच सकता था कि भारत सरकार जो पैसे भेजेगी वो पूरा का पूरा ग़रीब की जेब में, किसान की जेब में पहुंच पाएगा, लेकिन ये हुआ. वो भी तब हुआ तमाम सरकारी दफ़्तर बंद थे, ट्रांसपोर्ट के साधन बंद थे.'

प्रधानमंत्री मोदी ने ग़रीबों की संघर्षशक्ति का ज़िक्र करते हुए कहा, 'ये संकट इतना बड़ा है कि बड़ी से बड़ी व्यवस्थाएं हिल गई हैं, लेकिन इन ही परिस्थितियों में हमने, देश ने, हमारे ग़रीब भाई बहनों की संघर्ष शक्ति, उनकी संयम शक्ति का भी दर्शन किया है.'

इसके अलावा उन्होंने कहा कि आर्थिक पैकेज में ग़रीबों का ध्यान रखा जाएगा. उन्होंने कहा, 'ग़रीब हो, श्रमिक हों, प्रवासी मज़दूर हों, पशुपालक हों, हमारे मछुआरे साथी हों, संगठित क्षेत्र से हों या असंगठित क्षेत्र से, हर तबके के लिए आर्थिक पैकेज में कुछ महत्वपूर्ण फ़ैसलों का ऐलान किया जाएगा.'

मज़दूर

प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे भाषण में मज़दूर शब्द का ज़िक्र सिर्फ़ एक ही बार किया जब उन्होंने आर्थिक पैकेज की घोषणा की.

किसान

मोदी ने चार बार किसानों का ज़िक्र किया.

आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा, 'ये आर्थिक पैकेज, देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में, देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है.'

इसके अलावा सुधारों की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा, 'अब रिफ़ॉर्म्स के उस दायरे को व्यापक करना है, नई ऊंचाई देनी है. ये रिफ़ॉर्म्स खेती से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन में होंगे, ताकि किसान भी सशक्त हो और भविष्य में कोरोना जैसे किसी संकट के समय किसान पर कम से कम असर हो.'

इसके अलावा उन्होंने किसानों का कहीं ज़िक्र नहीं किया.

अर्थव्यवस्था

पूरे भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था शब्द का सिर्फ़ एक बार इस्तेमाल किया. मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आत्मनिर्भर भारत की इमारत पांच स्तंभों पर खड़ी होगी.

इसके पांचवे स्तंभ का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'पांचवा पिलर- डिमांड- हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताक़त है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की ज़रूरत है, देश में डिमांड बढ़ाने के लिए, डिमांड को पूरा करने के लिए हमारी सप्लाई चेन के हर स्टेकहोल्डर का सशक्त होना ज़रूरी है. हमारी सप्लाई चेन, हमारी आपूर्ति की उस व्यवस्था को हम मज़बूत करेंगे, जिसमें मेरे देश की मिट्टी की महक हो, हमारे मज़दूरों के पसीने की ख़ुशबू हो.'

पलायन

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पूरे भाषण में पलायन शब्द का इस्तेमाल नहीं किया. हालांकि भाषण के अंत में उन्होंने भारतीयों को हो रही परेशानियों का ज़िक्र करते हुए कहा, 'ये संकट इतना बड़ा है कि बड़ी से बड़ी व्यवस्थाएं हिल गई हैं, लेकिन इन ही परिस्थितियों में हमने, देश ने, हमारे ग़रीब भाई बहनों की संघर्ष शक्ति, उनकी संयमशक्ति का भी दर्शन किया है.

ख़ासकर हमारे जो रेहड़ी वाले भाई बहन है, ठेला लगाने वाले हैं, पटरी पर सामान बेचने वाले हैं, जो हमारे श्रमिक साथी हैं, जो घरों में काम करने वाले भाई बहन हैं, उन्होंने इस दौरान बहुत कष्ट झेले हैं. तपस्या की है, त्याग किया है.'

उद्योग-धंधे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीस लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए कहा, 'ये आर्थिक पैकेज भारत के उद्योग जगत के लिए हैं जो भारत के आर्थिक सामर्थ्य को बुलंदी देने के लिए संकल्पित है. ये आर्थिक पैकेज हमारे कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, हमारे लघु-मंझोले उद्योग, हमारे एमएसएमई के लिए हैं, जो करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है, जो आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का मज़बूत आधार है.'

असंगठित क्षेत्र के श्रमिक

प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, 'संगठित क्षेत्र से हों या असंगठित क्षेत्र से, हर तबके के लिए आर्थिक पैकेज में कुछ महत्वपूर्ण फ़ैसलों का ऐलान किया जाएगा.'

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने भाषण में कुल तीन बार श्रमिक शब्द का इस्तेमाल किया जो आप अब तक इस लेख में पढ़ चुके हैं.

कोरोना वारियर्स

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार अपने भाषण में कोरोना वारियर्स का एक भी जगह नाम नहीं लिया. उन्होंने इस बार डॉक्टरों, नर्सों या कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में फ्रंटलाइन पर खड़े लोगों का ज़िक्र नहीं किया.

लॉकडाउन

प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे भाषण में तीन बार लॉकडाउन शब्द का इस्तेमाल किया. लॉकडाउन-4 की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा, 'लॉकडाउन का चौथा चरण, लॉकडाउन-4 पूरी तरह नए रंग रूप वाला होगा. नए नियमों वाला होगा. राज्यों से हमें जो सुझाव मिल रहे हैं उनके आधार पर लॉकडाउन-4 से जुड़ी जानकारी भी आपको 18 मई से पहले दी जाएगी.'

अस्पताल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे भाषण में एक भी बार अस्पताल शब्द का इस्तेमाल नहीं किया. स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में उन्होंने कोई बात नहीं की.

उन्होंने 'इलाज' शब्द का इस्तेमाल भी नहीं किया. हालांकि विदेशों को भेजी गई दवाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'ज़िंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही दुनिया में आज भारत की दवाइयां एक नई आशा लेकर पहुंचती हैं.'

कोरोना से लड़ने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं इसका ब्यौरा भी प्रधानमंत्री ने नहीं किया. प्रधानमंत्री के भाषण में सबसे ज़्यादा ज़ोर 'आत्मनिर्भर' भारत पर रहा.

उन्होंने 29 बार आत्मनिर्भर शब्द का इस्तेमाल किया और हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ज़ोर दिया.

उन्होंने अपने संबोधन में क्या क्या और कहा-

कोरोना संक्रमण से मुक़ाबला करते हुए दुनिया को अब चार महीने से ज़्यादा समय बीत गया है. इस दौरान तमाम देशों के 42 लाख से ज़्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं.

पौने तीन लाख से ज़्यादा लोगों की दुखद मृत्यु हुई है. भारत में भी अनेक परिवारों ने अपने स्वजन खोए हैं, मैं सभी के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं.

साथियो, एक वायरस ने दुनिया को तहत नहस कर दिया है. विश्व भर में, करोड़ों ज़िंदगियां संकट का सामना कर रही हैं. सारी दुनिया, ज़िंदगी बचाने में एक प्रकार से जंग में जुटी है.

हमने ऐसा संकट ना देखा है, ना ही सुना है. निश्चित तौर पर मानव जाति के लिए ये सब कुछ अकल्पनीय है. ये क्राइसिस अभूतपूर्व है. लेकिन थकना, हारना, टूटना, बिखरना मानव को मंज़ूर नहीं है.

सतर्क रहते हुए, ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए, अब हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी है. आज जब दुनिया संकट में है, तब हमें अपना संकल्प और मज़बूत करना होगा.

साथियो हम पिछली शताब्दी से ही लगातार सुनते आए हैं कि इक्कीसवीं सदी हिंदुस्तान की है. हमें कोरोना से पहले की दुनिया, वैश्विक व्यवस्थाओं को विस्तार से देखने समझने का मौका मिला है.

कोरोना संकट के बाद भी, दुनिया में जो स्थितियां बन रही हैं, उसे भी हम निरंतर देख रहे हैं. जब इन दोनों कालखंडों को भारत के नज़रिए से देखते हैं तो लगता है कि इक्कीसवीं सदी भारत की हो ये हमारा सपना ही नहीं, ये हम सबकी ज़िम्मेदारी भी है. लेकिन इसका मार्ग क्या हो? विश्व की आज की स्थिति हमें सिखाती है कि इसका मार्ग एक ही है. आत्मनिर्भर भारत. हमारे यहां, शास्त्रों में कहा गया है-पंथ- यानी यही रास्ता है, आत्मनिर्भर भारत.

साथियो, एक राष्ट्र के रूप में आज हम एक बहुत अहम मोड़ पर खड़े हैं. इतनी बड़ी आपदा, भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है. एक संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है.

मैं एक उदाहरण के साथ अपनी बात बताने का प्रयास करता हूं, जब कोरोना संकट शुरू हुआ, तब भारत में एक भी पीपीई किट नहीं बनती थी. एन-95 मास्क का भारत में नाम मात्र उत्पादन होता था, आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज़ दो लाख पीपीई और दो लाख एन 95 मास्क बनाए जा रहे हैं.

ये हम इसलिए कर पाए क्योंकि भारत ने आपदा को, अवसर में बदल दिया. आपदा को अवसर में बदलने की भारत की ये दृष्टि आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प के लिए उतनी ही प्रभावी सिद्ध होने वाली हैं.

आज विश्व में आत्म निर्भर शब्द के मायने पूरी तरह बदल गए हैं. ग्लोबल वर्ल्ड में आत्मनिर्भरता की परिभाषा बदल रही है. अर्थ केंद्रित वैश्वीकरण बनाम मानव केंद्रित वैश्वीकरण की चर्चा आज जोरों पर है. विश्व के सामने भारत का मूलभूत चिंतन आज आशा की किरण नज़र आता है.

भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार उस आत्मनिर्भरता की बात करते हैं जिसकी आत्मा वासुदेव कुटुम्बकम है. विश्व एक परिवार. भारत जब आत्मनिर्भरता की बात करता है, तब आत्मकेंद्रित व्यवस्था की वकालत नहीं करता है.

भारत की आत्मनिर्भरता में संसार के सुख, सहयोग और शांति की चिंता होती है. जो संस्कृति जय जगत में विश्वास रखती हो, जो जीव मात्र का कल्याण चाहती हो, जो पूरे विश्व को परिवार मानती हो, जो अपनी आस्था में मातृ भूमिः पुतौ अहम पृथ्वीः इसकी सोच रखती हो, जो पृथ्वी को मां मानती हो, वो संस्कृति, वो भारतभूमि जब आत्मनिर्भर बनती है तब उससे एक सुखी समृद्ध विश्व की संभावना भी सुनिश्चित होती है.

भारत की प्रगति में तो हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है. भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव विश्व कल्याण पर पड़ता ही है. जब भारत खुले में शौच से मुक्त होता है तो दुनिया की तस्वीर भी बदलती है. टीबी हो, कुपोषण हो, पोलियो हो, भारत के अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता ही है. इंटरनेशनल सोलर अलायंस ग्लोबल वार्मिंग के ख़िलाफ़, भारत की दुनिया को सौगात है.

इंटरनेशनल योगा दिवस की पहल मानव जीवन को तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए भारत का उपहार है. ज़िंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही दुनिया में आज भारत की दवाइयां एक नई आशा लेकर पहुंचती हैं. इन क़दमों से दुनियाभर में, भारत की भूरी-भूरी प्रसंशा होती है तो स्वभाविक है हर भारतीय गर्व करता है.

दुनिया को विश्वास होने लगा है कि भारत बहुत अच्छा कर सकता है. मानव जाति के कल्याण के लिए बहुत कुछ अच्छा दे सकता है. सवाल ये है कि आख़िर कैसे?

इस सवाल का भी उत्तर है एक सौ तीस करोड़ भारतीयों का आत्मनिर्भर भारत का संकल्प. साथियों, हमारा सदियों का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है.

भारत जब समृद्ध था, सोने की चिड़ियां कहा जाता था. संपन्न था, तब सदा विश्व के कल्याण की राह पर ही चला. वक़्त बदल गया. देश की ग़ुलामी की जंज़ीरों में जकड़ गया. हम विकास के लिए तरसते रहे. आज फिर भारत विकास की ओर सफलतापूर्वक क़दम बढ़ा रहा है, तब भी विश्व कल्याण की राह पर अटल है. याद करिए, इस शताब्दी की शुरुआत के समय, वाईटूके संकट आया था. भारत के टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स ने दुनिया को उस संकट से निकाला था.

आज हमारे पास साधन हैं, सामर्थ्य है. हमारे पास दुनिया की सबसे बेहतरीन टैलेंट है. हम बेस्ट प्रॉडक्ट्स बनाएंगे. अपनी क्वालिटी और बेहतर करेंगे. सप्लाई चेन को और आधुनिक बनाएंगे.

ये हम कर सकते हैं और हम ज़रूर करेंगे. साथियो, मैंने अपनी आंखों के सामने, कच्छ भूकंप के वो दिन देखे हैं, हर तरफ़ सिर्फ़ मलबा ही मलबा था, सबकुछ ध्वस्त हो गया था, ऐसा लगता था मानों कच्छ मौत की चादर ओढ़कर सो गया हो.

उस परिस्थिति में कोई सोच भी नहीं सकता था कि कभी हालात बदल पाएंगे. लेकिन देखते ही देखते कच्छ उठ खड़ा हुआ, कच्छ चल पड़ा, कच्छ बढ़ चला. यही हम भारतीयों की संकल्प शक्ति है, हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं. कोई राह मुश्किल नहीं. और आज तो चाह भी है, राह भी है.

ये है भारत को आत्मनिर्भर बनाना. भारत की संकल्पशक्ति ऐसी है कि भारत आत्मनिर्भर बन सकता है. साथियो, कोरोना संकट का सामना करते हुए, नए संकल्प के साथ, मैं आज एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं. आर्थिक पैकेज आत्मनिर्भर भारत अभियान की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा.

साथियो, हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं. जो रिज़र्व बैंक के फ़ैसले थे, और आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब करीब बीस लाख करोड़ रुपए का है. बीस लाख करोड़ रुपए का है, ये पैकेज भारत की जीडीपी का करीब करीब दस प्रतिशत है. इन सबके ज़रिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को बीस लाख करोड़ रुपए का संबल मिलेगा, सपोर्ट मिलेगा.

बीस लाख करोड़ रुपए का ये पैकेज, दो हज़ार बीस में, देश की विकास यात्रा को, ट्वेंटी लैक्स, ट्वेंटी ट्वेंटी में, आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक नई गति देगा. आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए इस पैकेज में लैंड, लेबर, लिक्विडिटी और लॉज़ सभी पर बल दिया गया है.

ये आर्थिक पैकेज, देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में, देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है. ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है जो ईमानदारी से टैक्स देता है और देश के विकास में अपना योगदान देता है. ये आर्थिक पैकेज भारत के उद्योग जगत के लिए हैं जो भारत के आर्थिक सामर्थ्य को बुलंदी देने के लिए संकल्पित है.

साथियो, आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए बोल्ड रिफॉर्म्स की प्रतिबद्धता के साथ अब देश का आगे बढ़ना अनिवार्य है. ये रिफॉर्म्स रेशनल टैक्स सिस्टम, सरल और स्पष्ट नियम क़ानून, उत्तम इंफ्रास्ट्रक्चर, समर्थ और सक्षम ह्यूमन रिसोर्सेज़ और मज़बूत फ़ाइनेंशिल सिस्टम के निर्माण के लिए होंगे.

ये रिफॉर्म्स बिज़नेस को प्रोत्साहित करेंगे, निवेश को आकर्षित करेंगे और मेक इन इंडिया के हमारे संकल्प को सशक्त करेंगे. साथियों, आत्मनिर्भरता, आत्मबल और आत्मविश्वास से ही संभव है.

आत्मनिर्भरता ग्लबोल सप्लाई चेन में कड़ी स्पर्धा के लिए भी देश को तैयार करती है और आज ये समय की मांग है कि भारत हर स्पर्धा में जीते. ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभाए.

इसे समझते हुए आर्थिक पैकेज में अनेक प्रावधान किए गए हैं. इससे हमारे सभी सेक्टरों की एफिसिएंशी बढ़ेगी और क्वालिटी भी सुनिश्चित होगी.

संकट के समय में लोकल ने ही हमारी डिमांड पूरी की है, हमें इस लोकल ने ही बचाया है. लोकल सिर्फ़ ज़रूरत नहीं बल्कि हम सबकी ज़िम्मेदारी है. समय ने हमें सिखाया है कि लोकल को हमें अपना जीवन मंत्र बनाना ही होगा.

आपको, आज जो ग्लोबल ब्रेंड्स लगते हैं वो भी कभी ऐसे ही बिलकुल लोकल थे. लेकिन जब वहां के लोगों ने उनका इस्तेमाल शुरू किया, उनका प्रचार शुरू किया, उनकी ब्रांडिंग की, उन पर गर्व किया तो वो प्रोडक्ट लोकल से ग्लोबल बन गए. वो प्रॉडक्ट्स लोकल से ग्लोबल बन गए. इसलिए आज से, हर भारतवासी को अपने लोकल के लिए वोकल बनना है. लोकल के लिए वोकल बनना है.

ना सिर्फ़ लोकल प्रोडक्ट्स ख़रीदने हैं बल्कि उनका गर्व से प्रचार भी करना है. मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा देश ऐसा कर सकता है. आपके प्रयासों ने तो, हर बार आपके प्रति मेरा श्रद्धा को और बढ़ाया है, मैं गर्व के साथ एक बात महसूस करता हूं, याद करता हूं, जब मैंने आपसे देश से खादी खरीदने का आग्रह किया था, ये भी कहा था कि देश के हैंडलूम वर्कस को सपोर्ट करें.

बहुत ही कम समय में खादी और हैंडलूम दोनों की ही डिमांड और बिक्री रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई. इतना ही नहीं, उसे आपने बड़ा ब्रांड भी बना दिया, बहुत छोटा सा प्रयास था, लेकिन परिणाम मिला, बहुत अच्छा परिणाम मिला.

साथियो, सभी एक्सपर्ट्स बताते हैं, साइंटिस्ट बताते हैं कि कोरोना लंबे समय तक हमारे जीवन का हिस्सा बना रहेगा लेकिन साथ ही, हम ऐसा भी नहीं होने दे सकते कि हमारी ज़िंदगी सिर्फ़ और सिर्फ़ कोरोना के इर्द गिर्द ही सिमटकर रह जाए.

हम मास्क पहनेंगे, दो गज दूरी का पालन करेंगे लेकिन अपने लक्ष्यों को दूर नहीं होने देंगे. मुझे पूरा भरोसा है कि नियमों का पालन करते हुए हम कोरोना से लड़ेंगे भी और आगे भी बढ़ेंगे.

साथियो, हमारा यहां कहा गया है कि जो हमारे वश में है, जो हमारे नियंत्रण में है वही ख़ुश है. आत्मनिर्भरता हमें सुख और संतोष देने के साथ-साथ सशक्त भी करती है. 21वीं सदी भारत की सदी बनाने का हमारा दायित्व आत्मनिर्भर भारत के प्रण से ही पूरा होगा. इस दायित्व को 130 करोड़ देशवासियों की प्राणशक्ति से ही ऊर्जा मिलेगी.

आत्मनिर्भर भारत का ये युग हम भारतवासी के लिए नूतन प्रण भी होगा, नूतन पर्व भी होगा. अब एक नई प्राणशक्ति, नई संकल्पशक्ति उसे लेकर के हमें आगे बढ़ना है. जब आचार-विचार कर्तव्य भाव से सराबोर हो, कर्मठता की पराकाष्ठा हो, कौशल्य की पूंजी हो तो आत्मनिर्भर भारत बनने से कौन रोक सकता है.

हम भारत को आत्मनिर्भर भारत बना सकते हैं, हमें भारत को आत्मनिर्भर बनाकर रहेंगे. इस संकल्प के साथ, इस विश्वास के साथ मैं आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं. आप अपने स्वास्थ्य का, अपने परिवार, अपने करीबियों का ज़रूर ध्यान रखिए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)