कोरोना वायरस के संक्रमण से भारत के न्यूज़ रूम में तबाही क्यों

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- Author, सौतिक विश्वास
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
15 दिन पहले की बात है. मुंबई से चल रहे एक न्यूज़ नेटवर्क के स्टूडियो में काम करने वाले एक कैमरा ऑपरेटर अपने कुछ सहकर्मियों के साथ कोराना वायरस की जांच के लिए एक टेस्ट सेंटर पहुंचे.
इसके कुछ ही दिनों बाद 35 साल के इस कैमरा ऑपरेटर को कोरोना वायरस ने अपनी जद में ले लिया. वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए. लेकिन उनके शरीर में कोरोना वायरस के लक्षणों का नामो-निशां नहीं था.
'जय महाराष्ट्र' न्यूज़ नेटवर्क के एडिटर प्रसाद काथे ने इस मामले पर आश्चर्य जताते हुए मुझसे कहा, "हम सबके लिए यह किसी सदमे की तरह था. वो (कैमरा ऑपरेटर) तो घर से निकला ही नहीं था."
अब तक, सात साल पुराने इस मराठी न्यूज नेटवर्क के 15 लोगों पर कोरोना वायरस हमला कर चुका है. सभी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इनमें से ज़्यादातर रिपोर्टर और कैमरापर्सन हैं. मुंबई में तेज़ी से फैलते कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से इस न्यूज़ नेटवर्क ने तीन सप्ताह पहले अपने पत्रकारों को फील्ड असाइनमेंट पर भेजना बंद कर दिया था. इनमें से ज़्यादातर लोग अब होम क्वॉरन्टीन पर हैं.
मुंबई में अंधेरी के भीड़भाड़ वाले इलाक़े के आठ मंजिला इमारत में इस न्यूज़ नेटवर्क का न्यूज़ रूम है. लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से 12 हज़ार वर्ग फीट के दो स्टूडियो वाले इस न्यूज़-रूम को बंद करना पड़ा है. वहां अब सिर्फ़ एक इलेक्ट्रिशियन और एक कंट्रोल रूम टेक्निशियन की ड्यूटी लगी हुई है.
पत्रकार, तकनीकी कर्मचारियों और ड्राइवरों को मिलाकर इस न्यूज़ नेटवर्क में 120 लोग काम करते हैं. इनमें से अधिकतर की कोरोना टेस्टिंग हो चुकी है. टेस्ट लैब पर बहुत अधिक दबाव की वजह से टेस्ट के रिजल्ट धीरे-धीरे आ रहे हैं. ऐसा लगता है कि संक्रमण के मामले और बढ़ सकते हैं.

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'वायरस के हमले ने न्यूज़ चैनल चलाना मुश्किल किया'
काथे ने कहा, "वायरस के हमले के वजह से न्यूज़ चैनल चलाना एक चैलेंज बन गया है. हमें इसे चलाए रखने के लिए अपने फॉर्मेट में बदलाव करना पड़ा है".
पिछले तीन सप्ताह से यह डायरेक्ट-टु-होम चैनल 28-28 मिनट के छह लाइव बुलेटिन चला रहा है जबकि पहले एक दिन में यह इस तरह के 18 बुलेटिन चलाता था. चैनल अब इसकी भरपाई रिकॉर्डेड न्यूज़ और करंट अफेयर्स प्रोग्राम दिखा कर करता है.
कोरोना वायरस के संक्रमण ने ऐसे न्यूज़ स्टेशन की तरह कई और न्यूज़ नेटवर्क और उनके पत्रकारों के कामकाज पर असर डाला है. लगभग 100 पत्रकार कोरोना वायरस से संक्रमित हैं. देश में अब तक 42 हज़ार लोग (आधिकारिक आंकड़ा) कोरोना वायरस के संक्रमण के शिकार हुए हैं. ऐसे में 100 पत्रकारों का संक्रमण का शिकार होना ध्यान खींचता है.
कोरोना वायरस संक्रमण ने मुंबई के पत्रकारों को अपने घरों से काम करने को मजबूर कर दिया है. इस महानगर में जगह कम है और पत्रकार अपने घरों के छोटे-छोटे कमरों से ख़बरें ब्रॉडकास्ट कर रहे हैं. कैमरे के सामने बैठे एंकर लगातार ख़बरें पढ़ रहे हैं. उनके पीछे उनके कमरे की दीवार पर नेटवर्क का नाम (ब्रैंडिंग) लिखा होता है. यहां पढ़ी हुई न्यूज़ होम ब्रॉड बैंड और 4जी मोबाइल हॉटस्पॉट के ज़रिए सीधे इसके प्रोडक्शन सेंटर तक पहुंचती है.

इस तरह से काम करने में दिक्क़तें भी कम नहीं आती हैं. कभी बीच बुलेटिन में ही एंकर के घर की बिजली चली जाती है तो कभी इंटरनेट का कनेक्शन कट जाता है.काथे कहते हैं, "ऐसे हालात में काम करना आसान नहीं है लेकिन हम इससे जूझते हुए काम चला रहे हैं. इतनी मुश्किलों के बावजूद हमारा एक भी बुलेटिन रुका नहीं है."
फील्ड रिपोर्टिंग की वजह से बढ़ा संक्रमण का ख़तरा
देश में कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से फ़िलहाल लॉकडाउन का तीसरा दौर चल रहा है. भारत में दुनिया का सबसे कड़ा लॉकडाउन है. लिहाज़ा लोगों का घरों से निकलना बंद है. दुकानें और फैक्ट्रियां बंद हैं. कारोबार ठप पड़ा है. हर तरह की गाड़ियों के चलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
लेकिन कई पत्रकार ख़ास कर किसी न्यूज़ नेटवर्क में काम करने वाले लोग लगातार फील्ड में जाकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं. लिहाज़ा वायरस से संक्रमित हो रहे हैं. चेन्नई में 35 पत्रकार कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए. कोलकाता के एक स्पोर्ट्स फ़ोटो जर्नलिस्ट की हाल में मौत हो गई. डॉक्टरों का मानना है कि उनकी मौत कोरोना वायरस संक्रमण से हुई होगी.

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लुधियाना (पंजाब) में जाने-माने मीडिया ग्रुप 'पंजाब केसरी' के 19 कर्मचारियों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की ख़बरें हैं. ख़तरे को देखते हुए इस महीने की शुरुआत में इसने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने को कह दिया था.
लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले मुंबई से आ रहे हैं. यह देश के सबसे बड़े हॉटस्पॉट के तौर पर उभरा है. यहां अब तक संक्रमण के 11 हज़ार मामले सामने आ चुके हैं और 340 लोगों की मौत हो चुकी है.
मुंबई में अब तक जिन 167 पत्रकारों का टेस्ट हुआ है, उनमें 53 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इनमें से 36 ठीक हो कर घर जा चुके हैं, जबकि बाकियों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. कई पत्रकार घरों और होटलों में क्वॉरन्टीन हैं. अभी और 170 पत्रकारों का टेस्ट होना है.
संक्रमित पत्रकारों में ज्यादातर टीवी रिपोर्टर और कैमरापर्सन हैं. लेकिन उनमें संक्रमण के लक्षण के संकेत नहीं दिखे थे. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) का कहना है कि भारत में जो लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो रहे हैं, उनमें से ज्यादातर में इसके लक्षण नहीं दिख रहे हैं या दिख भी रहे हैं तो मामूली.
आख़िर इतने पत्रकार क्यों हो रहे हैं संक्रमित?
पत्रकार अगर इतनी बड़ी तादाद में कोरोना वायरस से संक्रमित हो रहे हैं तो इसकी वजहें क्या हैं? मुंबई के टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट विनोद जगदाले ने मुझसे कहा "शुरू में कुछ टीवी चैनलों और न्यूज़ नेटवर्कों ने अपने पत्रकारों पर बाहर जा कर लॉकडाउन के विजुअल लाने का काफी दबाव डाला. इसके अलावा कुछ पत्रकार अति उत्साह में बाहर निकल पड़े लेकिन शायद उन्होंने पर्याप्त सावधानी नहीं बरती. वे हॉटस्पॉट में पहुंच कर विजुअल ले रहे थे और इंटरव्यू लेने में लगे थे"
उन्होंने कहा, "पत्रकार अपने असाइनमेंट पर टैक्सियों से जा रहे थे और वापस आकर छोटी सी जगह में अपने सहयोगियों के साथ काम भी कर रहे थे. जो लोग संक्रमित हुए हैं, उनमें पत्रकारों को असाइनमेंट के लिए अलग-अलग जगह ले जाने वाले तीन ड्राइवर भी शामिल हैं. अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि न्यूज़ नेटवर्कों ने अपने पत्रकारों को घर से ही काम करने को कह दिया है. "
जगदाले कहते हैं, "पत्रकारों में अब काफी डर है. ज्यादातर पत्रकार अब भी घर से नहीं निकल रहे हैं. उनके सीनियर और बॉस अब ज्यादा सतर्क हो गए हैं. बाहर जा कर स्टोरी करने के लिए कहने से पहले वे सौ बार सोच रहे हैं"

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"तुरंत एंबुलेंस मंगाओ नहीं तो मैं मर जाऊंगा."
कोलकाता के स्पोर्ट्स फोटोग्राफर रॉनी राय पिछले दिनों धड़ल्ले से अपने काम पर निकल रहे थे. छह साल पहले बीबीसी की न्यूज साइट के एक असाइनमेंट के लिए उन्होंने फोटोग्राफी की थी. कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के दौरान भी वह बाहर निकल कर खूब काम कर रहे थे.
मार्च में एक असाइनमेंट के दौरान वह गुजरात के राजकोट में क्रिकेट मैच कवर करने गए थे. वह काफी सावधानी भी बरत रहे थे. मास्क पहन कर काम कर रहे थे. काम के दौरान बार-बार धोते थे. लेकिन राजकोट से लौटने के कुछ सप्ताह बाद उन्हें लगातार बुखार रहने लगा. खांसी आने लगी और बदन में दर्द रहने लगा.
24 अप्रैल को सुबह उठते ही उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी. उन्होंने अपने एक साथी फोटोग्राफर को फोन कर कहा, "तुरंत एंबुलेंस मंगाओ नहीं तो मैं मर जाऊंगा."
एंबुलेंस को आने में तीन घंटे लग गए. उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया लेकन एक घंटे के भीतर ही उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और वह चल बसे. उनके परिवार के एक सदस्य ने कहा कि उनका टेस्ट करने का भी मौका नहीं मिला"
डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि शायद रॉनी कोविड-19 के शिकार हो गए. रॉनी के परिवार वालों को उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल होने की इजाजत नहीं मिली.

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कोरोना महामारी की रिपोर्टिंग में बड़ा जोखिम
कोविड-19 से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए पुख्ता दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. पत्रकारों से इन निर्देशों का पूरी तरह से पालन करने को कहा गया है.
कोरोना वायरस संक्रमण और इसके असर पर भारत के किसी भी पत्रकार से ज्यादा रिपोर्टिंग करने वाली बरखा दत्त कहती हैं कि वह अपने बेहद कड़े रूटीन के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए जारी किए गए हर निर्देश का सख्ती से पालन करती हैं.
कोरोना संक्रमण की रिपोर्टिंग के लिए बरखा दिल्ली से निकल कर छह राज्यों को नाप चुकी हैं. अब तक वह 4000 किलोमीटर (2,485 मील) से ज्यादा की दूरी कवर कर चुकी हैं. उनकी टीम में तीन लोग हैं. इस पूरे असाइनमेंट में अब तक उन्होंने अपना ड्राइवर नहीं बदला है.
बरखा ने मुझसे कहा, "विज्ञान के साथ बरती जाने वाली सावधानियां भी बदल चुकी हैं. हम लोग हर वक्त दस्ताने और मास्क पहने रहते हैं. हम यह पक्का कर लेते हैं कि हमारे माइक स्टिक से बंधे हों और जब हम किसी का इंटरव्यू करें तो एक खास दूरी बना कर बात करें. हम, लोगों के बेहद नजदीक जा कर इंटरव्यू करने से बचते हैं."
हर शूट के बाद क्रू-मेंबर अपने दस्ताने और मास्क को नष्ट कर देते हैं और हाथों को धोते हैं. साथ ही अपने उपकरणों को एंटीसेप्टिक लोशन और स्पेशल स्पंज से पोछ देते हैं.
हाल में जब वे रिपोर्टिंग के लिए कोरोना के हॉटस्पॉट इंदौर के एक अस्पताल के अंदर पहुंचे तो संक्रमण से बचाव करने वाली वर्दियां (प्रोटेक्टिव गियर) पहन लीं. इसके बाद वे सीधे दिल्ली में अपने घर आ गए ताकि संक्रमण से बच सकें.
बरखा ने कहा " हमारे लिए यह बड़ा मुश्किल था. एक ही दिन में एक तरफ से आठ घंटे का सफर कर इंदौर पहुंचो, फिर वहां पांच घंटे तक शूटिंग करो और फिर आठ घंटे का सफर कर वापस दिल्ली लौटो. "
बहरहाल, पत्रकारों के लिए इस तरह की वैश्विक महामारी के संक्रमण को कवर करना बेहद साहसिक काम हो गया है.
इसमें तमाम सावधानियां बरतनी होती हैं. इसके साथ ही यह काम बेहद कड़ी मशक्कत की मांग करता है.

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