कोरोना पर केंद्रीय टीम के दौरे पर पश्चिम बंगाल में गतिरोध

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- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए
कोरोना की वजह से जारी लॉकडाउन की हालत का जायजा लेने के लिए दो केंद्रीय टीमों के पश्चिम बंगाल दौरे पर केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने हैं.
सोमवार सुबह कोलकाता पहुंची एक टीम को मंगलवार को पूरे दिन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के गेस्ट हाउस से नहीं निकलने दिया गया. सुबह इस टीम ने एक बार बाहर निकलने का प्रयास किया था. लेकिन पुलिस ने उनको लौटा दिया. उसके बाद पुलिस अधिकारियों और आखिर में मुख्य सचिव के साथ बैठक के बाद टीम को शाम लगभग पांच बजे इस शर्त के साथ बाहर निकलने की अनुमति दी गई कि उसके साथ राज्य सरकार का एक अधिकारी भी होगा.
उसके बाद इस टीम ने महानगर के जादवपुर और आस-पास के इलाकों का दौरा किया. वैसे, राज्य सरकार ने सोमवार को ही साफ कर दिया था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में इन टीमों को कहीं जाने नहीं दिया जाएगा.
इस दौरे पर बढ़ते विवाद के बीच भाजपा ने केंद्र के फैसले का बचाव किया है तो कोरोना की जांच के मुद्दे पर सरकार को लगातार कठघरे में खड़ा करने वाली कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां इस मसले पर राज्य सरकार के साथ है. दूसरी ओर, राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य सरकार को केंद्र से टकराव की बजाय उसके साथ सहयोग करने का अनुरोध किया है.
केंद्रीय टीम के सदस्य सुबह दौरे के लिए निकले थे. लेकिन पुलिस के विरोध के बाद वे बीएसएफ के गेस्टहाउस में लौट गए. उन्होंने पुलिस के निर्देश के मुताबिक दौरा करने से इंकार कर दिया. बाद में कोलकाता पुलिस की उपायुक्त देवस्मिता दास और बालीगंज थाने के अधिकारियो ने वहां जाकर केंद्रीय टीम के सदस्यों से मुलाकात की. उसके बाद मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने भी बीएसएफ के पूर्वी कमान के गेस्टहाउस में जाकर इस टीम के सदस्यों के साथ बैठक की. उसके बाद ही टीम को बाहर निकलने की अनुमति मिली.
उत्तर बंगाल पहुंची दूसरी टीम को दो हिस्सों में बंट कर सिलीगुड़ी और दार्जिंलिंग का दौरा करना था. लेकिन मौसम खराब होने और चक्रवाती तूफान के साथ बारिश होने की वजह से यह टीम एसएसबी के गेस्टहाउस में ही फंसी रही. बाद में उसके सदस्यों ने भी आस-पास के इलाकों का दौरा किया.
असहयोग करने का आरोप
कोलकाता पहुंची टीम के प्रमुख ने मंगलवार सुबह राज्य सरकार पर असहयोग करने का आरोप लगाया है. रक्षा मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और केंद्रीय टीम के प्रमुख अपूर्व चंद्रा ने एक स्थानीय टीवी चैनल से बातचीत में दावा किया कि टीम के सदस्यों से कहा गया है कि वह लोग मंगलवार को कहीं बाहर नहीं जा सकते.
उन्होंने कहा, "हमलोग केंद्र सरकार के निर्देश पर यहां आए हैं. राज्य सरकार की ओर से हमें वाहन समेत दूसरी सुविधाएं मुहैया कराई जानी थीं. इस मुद्दे पर सोमवार को मुख्य सचिव के साथ बैठक भी हुई थी. लेकिन मंगलवार को हमें बताया गया कि कुछ दिक्कतों की वजह से हम लोग बाहर नहीं जा सकते." चंद्रा का कहना था कि चौबीस घंटे बाद भी हम सिर्फ नाइसेड औऱ राज्य सचिवालय ही जा सके हैं.
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सवाल किया है कि आखिर किसी आधार पर इन टीमों को बंगाल भेजा गया है? उन्होंने अपने एक ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस सवाल का जवाब जानना चाहा है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि बिना ठोस वजह जाने इस मुद्दे पर आगे बढ़ना संभव नहीं है. यह संघवाद की भावना के ख़िलाफ़ है.

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ममता ने सोमवार शाम को ही इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी भेजा है. इसमें उन्होंने लिखा है, "केंद्रीय गृह मंत्री ने मुझे फोन पर दोपहर एक बजे केंद्रीय टीमों के दौरे के बारे में बताया. लेकिन उससे लगभग तीन घंटे पहले सुबह 10.10 बजे ही एक कार्गो विमान से एक टीम कोलकाता पहुंच चुकी थी. गृह मंत्रालय की ओर से मुख्य सचिव को इस बारे में भेजा गया निर्देश भी महज आधे घंटे पहले पहुंचा." मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे दौरों के लिए तमाम व्यवस्था राज्य सरकार करती है. लेकिन इन टीमों के दौरे के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) औऱ सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की सहायता ली गई है.
मुख्य सचिव राजीव सिन्हा कहते हैं, "दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में हालात काबू में हैं. ऐसे में केंद्रीय टीम वहां जाकर क्या करेगी?" केंद्रीय टीम ने सोमवार शाम को राज्य सचिवालय जाकर सिन्हा से मुलाकात की थी. उससे पहले मुख्य सचिव ने कहा था कि केंद्र की ओर से राज्य सरकार के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में इन दोनों टीमों को कहीं जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
मुख्य सचिव राजीव सिन्हा सवाल करते हैं, "आखिर राज्य को अंधेरे में रख कर यह काम क्यों किया जा रहा है? राज्य सरकार के साथ इस बारे में पहले कोई विचार-विमर्श क्यों नहीं किया गया? सरकार को पता ही नहीं है कि यह टीमें क्यों आई हैं और इलाकों की पहचान किस आधार पर की गई है."
ध्यान रहे कि केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में ज़मीनी परिस्थिति के आकलन और लॉकडाउन के ठीक से पालन नहीं होने के आरोपों की जांच के लिए दो अंतर मंत्रालयी टीमों को राज्य के दौरे पर भेजने का फ़ैसला किया था. यह टीमें राज्य के सात हॉट स्पॉट जिलों का दौरा करेगी. इनमें से एक टीम कोलकाता के अलावा हावड़ा, उत्तर 24-परगना और पूर्व मेदिनीपुर का दौरा करेगी जबिक दूसरी टीम दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और जलपाईगुड़ी जिलों का दौरा करेगी. यहां से लौटने के बाद यह दोनों टीमें केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
टकराव कौन कर रहा है?
इसबीच, तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य औऱ राष्ट्रीय प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने केंद्र पर बेवजह राज्य के साथ टकराव का आरोप लगाया है. वह कहते हैं, "देश के तमाम राज्य जब कोरोना वायरस से लड़ रहे हैं तो नरेंद्र मोदी सरकार इस वायरस से लड़ने की बजाय कुछ राज्यों से लड़ रही है." उन्होंने कहा कि केंद्रीय टीम देश के जिन ज़िलों का दौरा करेगी उनमें 70 से 80 फ़ीसदी ऐसे राज्यों में हैं जहां गैर-भाजपा सरकारें हैं. आख़िर गुजरात औऱ उत्तर प्रदेश का कोई ज़िला इस सूची में क्यों नहीं है?

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तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी ने इस दौरे को राजनीतिक साजिश क़रार दिया है. वह कहते हैं, "यह सहयोग करने का समय है. लेकिन केंद्र के इस फ़ैसले के पीछे राजनीतिक साजिश की बू आती है." उधर, भाजपा ने केंद्र के इस फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा है कि केंद्रीय टीम ने मध्यप्रदेश जैसे भाजपा-शासित राज्यों का भी दौरा किया है. वहां तो किसी ने इस पर सवाल नहीं उठाया. प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, "इस मुद्दे पर उल्टे तृणमूल कांग्रेस ही राजनीति कर रही है."
दूसरी ओर, कोरोना के मुद्दे पर राज्य सरकार को लगातार कठघरे में खड़ा करने वाले राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को अपने एक ट्वीट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कोरोना के संकट से निपटने के लिए केंद्रीय टीमों के साथ सहयोग करने और केंद्र सरकार के साथ टकराव से बचने का अनुरोध किया.
तृणमूल कांग्रेस सरकार की धुर विरोधी रही और कोरोना के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने वाली कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों ने भी इस तरह बिना पूर्व सूचना के केंद्रीय टीम के बंगाल दौरे पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने इस फैसले को राजनीति से प्रेरित औऱ संघवाद के ढांचे के खिलाफ बताया है.
वाममोर्चा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती कहते हैं, "राज्य सरकार में कई खामियां रही हैं और राशन में घोटाला हुआ है. केंद्रीय टीम दौरे पर जरूर आ सकती है. लेकिन ट्वीट से इस फैसले के एलान का मतलब राजनीतिक विवाद को सुलगाना ही है."
कांग्रेस विधायक दल के नेता अब्दुल मन्नान कहते हैं, "लॉकडाउन के दौरान आम लोग जीवन की जद्दोजहद से जूझ रहे हैं. लेकिन कोरोना महामारी के इस दौर में आपसी तालमेल के जरिए आम लोगों की समस्याओं का समाधान करने की बजाय दोनों सरकारें अपने-अपने अधिकारों का प्रदर्शन कर रही हैं." वह कहते हैं कि जब कोरोना वायरस से निपटने के लिए रणनीति बनाने का समय था तो प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ रोड शो कर रहे थे औऱ मध्यप्रदेश सरकार गिराने में जुटे थे.

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