कोरोना: राशन की सप्लाई में आ रही दिक्कतों से परेशान दुकानदार

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    • Author, प्रवीण शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

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स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया है.

24 मार्च को देश को संबोधित करते हुए जब पीएम मोदी ने लॉकडाउन का ऐलान के साथ ही देशभर में किराना दुकानों पर लोगों की कतार लग गई.

लोग हड़बड़ी में आने वाले दिनों के लिए राशन-पानी का इंतजाम कर लेना चाहते थे. उस वक्त यह तय नहीं था कि लोगों को उनकी रोज़मर्रा की जरूरत की चीजें कैसे मिलेंगी. हालांकि, बाद के दिनों में इस स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला.

लेकिन, अब जब लॉकडाउन चलते तीन हफ़्ते से ज्यादा वक्त हो चुका है देश में किराना दुकानों में रोज़ाना के सामानों की किल्लत सामने आ रही है.

दुकानों में सामान धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. सामान की सप्लाई को लेकर मुश्किलें पेश आ रही हैं.

आवश्यक सामान बनाने वाली कंपनियों को कारखाने चलाने की छूट है, लेकिन ज्यादातर कंपनियां अपनी कैपेसिटी से काफी कम पर काम कर रही हैं.

आवश्यक सामानों में दूध, घी, आटा, चावल, दालें, नमक, तेल, शक्कर जैसी रोज़ाना इस्तेमाल की चीजें आती हैं.

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'क्याफ्ते-दस दिन के बाद स्टॉकमें आ सकती है कमी?'

एफ़एमसीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के दिल्ली में 1,000 सदस्य हैं.

वहीं फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के साथ पूरे देश में 4.5 लाख डिस्ट्रीब्यूटर्स जुड़े हुए हैं.

एफ़एमसीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट देवेंद्र अग्रवाल ने बताया कि सप्लाई को लेकर दुकानदारों को मुश्किलें पेश आ रही हैं.

अग्रवाल कहते हैं, "किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर के पास 7-15 दिन का स्टॉक होता है. हम इस माल को किराना दुकानों को भेज रहे हैं. लेकिन, कई दफ़ा पुलिस गाड़ियों को जाने नहीं देती."

वह कहते हैं कि मैन्युफैक्चरर्स के यहां पर पैकेजिंग के माल की किल्लत हो रही है. पैकेजिंग यूनिट्स बंद हैं और इस वजह से फैक्ट्रियों के लिए उत्पादों की पैकेजिंग करना मुश्किल हो रहा है.

अग्रवाल के मुताबिक, "सामान हफ़्ते भर चलेगा. लेकिन सरकार ने कदम नहीं उठाए तो उसके बाद मुश्किल आ सकती है."

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लॉकडाउन से डिमांड बढ़ी

उड़ीसा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और पंजाब की राज्य सरकारों ने अपने यहां लॉकडाउन को 30 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया है.

इस तरह की संभावना जताई जा रही है कि केंद्र सरकार भी पूरे देश में लॉकडाउन की अवधि को बढ़ा सकती है.

अग्रवाल कहते हैं कि लॉकडाउन बढ़ने की आशंका के चलते डिमांड में अचानक इजाफा हो गया है. वह कहते हैं, "पिछले कुछ दिनों में चीजें सामान्य हुई थीं. लोग ज्यादा खरीदारी नहीं कर रहे थे. लेकिन, शुक्रवार शाम से लोगों को यह लगा कि लॉकडाउन बढ़ सकता है, ऐसे में अचानक डिमांड एकदम बढ़ गई. डिमांड कम से कम दोगुनी हो गई है."

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ट्रांसपोर्टर भी मजबूर, नहीं मिल रहे ड्राइवर

आवश्यक सामानों के डिस्ट्रीब्यूटर्स और फिर खुदरा दुकानों तक पहुंचने की चेन का एक अहम हिस्सा ट्रांसपोर्टर्स होते हैं.

कोरोना के चलते लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए सामान की ढुलाई करना मुश्किल हो रहा है और यही वजह है कि कंपनियों से सामान दुकानों तक पहुंचने में दिक्कतें आ रही हैं.

दिल्ली की ट्रांसपोर्ट कंपनी गोयल रोड कैरियर्स के क्षितिज गोयल इस कारोबार को कर रही अपने परिवार की चौथी पीढ़ी हैं.

कंपनी के पास 370 ट्रक हैं, जबकि कंपनी करीब 650 गाड़ियां हायरिंग पर लेकर काम करती है. क्षितिज के यहां ड्राइवर, क्लीनर समेत करीब 600 लोग कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं.

वो बताते हैं, "हमें इस वक्त ड्राइवरों की कमी का सामना करना पड़ रहा है. ड्राइवर या तो अपने गांव चले गए हैं या फिलहाल काम पर नहीं आना चाहते."

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क्षितिज कहते हैं, "बड़ी संख्या में हमारी गाड़ियां रास्तों में ही फंस गई हैं. हमारा केवल 10 फ़ीसदी फ्लीट काम कर रहा है. ड्राइवरों की कमी के चलते हम आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई भी नहीं कर पा रहे हैं."

वह कहते हैं, "हम पर नॉन-असेंशियल सामान मंगाने वालों का भी बड़ा प्रेशर है. हमारे साथ एक दिक्कत यह है कि हम आवश्यक सामान की ढुलाई कर उसे गंतव्य तक पहुंचा भी दें तो दूसरी तरफ से हमें खाली गाड़ी लानी पड़ेगी और खाली गाड़ी को कई बार रास्ते में रोक दिया जाता है."

लॉकडाउन का असर उत्पादन पर

दिल्ली के अशोक विहार में कृष्णा सुपरमार्ट चलाने वाले रमन बताते हैं, "स्टॉक की बड़ी शॉर्टेज है. कंपनियों की प्रोडक्शन कम हो गई है. उनके वेयरहाउस में माल खत्म हो रहा है. अभी कोई हल नहीं निकल रहा है, गाड़ियां आने नहीं दी जा रही हैं. हमारे पास आटा, घी-तेल जैसी चीजें नहीं आ पा रही हैं."

रमन बताते हैं कि डिस्ट्रीब्यूटर्स उनसे कह रहे हैं कि हमारे पास आकर सामान ले जाओ. लेकिन सामान की ढुलाई करने वाली गाड़ियां उनके पास नहीं हैं और यही उनके सामने सबसे बड़ी मुश्किल है.

रमन कहते हैं, "लोग हड़बड़ी में खरीदारी कर रहे हैं और एक साथ दो-तीन महीने का राशन खरीद रहे हैं."

दिल्ली के बाड़ा हिंदू राव आजाद मार्केट के अल-मुबारक स्टोर के मोहम्मद साजिद का कहना है कि फिलहाल थोड़ी दिक्कत आ रही है. लेकिन, चीजें धीरे-धीरे सामान्य हो जाएंगी.

साजिद कहते हैं, "गाड़ियों का मूवमेंट होता है तो पुलिस उसे रोकती ही है. हमारे पास सामान भले ही धीरे-धीरे ही सही, लेकिन आ रहा है. सब ठीक चल रहा है."

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पैकेजिंग कंपनियां बंद होने का भी पड़ा असर

नोएडा की पैकेजिंग कंपनी एवन कंटेनर्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक प्रवीन गुप्ता 40 से ज्यादा कंपनियों के लिए पैकेजिंग का काम करते हैं. उनकी कंपनी डेयरी, मेडिकल जैसे सेक्टरों में पैकेजिंग सर्विसेज देती है.

गुप्ता का कहना है, "फिलहाल हमारा पूरा काम बंद है. हमें ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं. पैसे का सर्कुलेशन कम हो गया है. मौजूदा इनवेंटरी 15-20 दिन की है."

प्रवीन गुप्ता कहते हैं कि लॉकडाउन आगे बढ़ाया जाना तय लग रहा है, ऐसे में मुश्किलें भी ज़रुर होंगी.

गुप्ता के मुताबिक़, "फिलहाल सबका फोकस स्वास्थ्य पर है और यह सही भी है. लोगों को भी जो मुश्किलें आ रही हैं उन्हें झेलना होगा और विकल्पों के सहारे काम चलाना होगा. अभी जो मिल रहा है उसी से वक्त काटना चाहिए."

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नॉन-सेंशियल आइटमों के लिए भी प्रावधान हों

दिल्ली की फर्म नंद किशोर मोंगा फूड्स प्रा. लिमिटेड के मालिक कवित मोंगा 3,273 छोटी दुकानों के अलावा बड़े सुपरमार्केट्स और फाइव स्टार होटलों को भी सामान सप्लाई करते हैं. वह नॉन-असेंशियल सामानों के डिस्ट्रीब्यूटर हैं जिनमें सिगरेट, एनर्जी ड्रिंक और चाय शामिल हैं.

मोंगा बताते हैं कि 23 मार्च से दिल्ली में लॉकडाउन हो गया था लेकिन 21 मार्च से ही उनका कामकाज बंद पड़ा है.

वह कहते हैं, "चाय जैसी चीज़ को सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट में नहीं रखा है जबकि यह रोज़मर्रा के काम में आने वाली चीज है. अब सुनते हैं कि चाय को इस लिस्ट में डालने की बात चल रही है."

मोंगा कहते हैं, "नॉन-असेंशियल आइटमों के लिए भी सरकार को कुछ प्रावधान करना चाहिए. मैं अगर दफ्तर खोलूं तो एक दिन में मेरा पूरा माल चला जाएगा. इससे सरकार को रेवेन्यू लॉस भी हो रहा है."

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ऑनलाइन पास नहीं हो पा रहे जनरेट

सुनील पांडेय दक्षिणी दिल्ली के एक बड़े डिस्ट्रीब्यूटर हैं. वह लगभग 1,500 खुदरा दुकानदारों को सामान सप्लाई करते हैं.

लेकिन, अब उनके लिए सामान भिजवाना टेढ़ी खीर हो गया है. आम दिनों में वह हर रोज़ 8-10 गाड़ी माल दुकानों को भिजवाते थे. अब उनका काम कम हो गया है.

वह कहते हैं कि ऑनलाइन पास जनरेट होने में मुश्किल हो रही है. साथ ही एक राज्य से दूसरे राज्य में माल ले जाना भी आसान नहीं रहा है. वो कहते हैं, "अब मैं दुकानदारों से कह रहा हूं कि जिसे सामान चाहिए वह यहां आकर ले जाए. इसकी वजह यह है कि गाड़ियों को पास नहीं मिल पा रहे हैं."

पांडेय बताते हैं कि उनके पास 15-20 दिन का स्टॉक है. लेकिन, अगर आगे यह लॉकडाउन बढ़ता है तो बड़ी मुश्किल हो सकती है.

पांडेय एक नए ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं. वो कहते हैं, "चूंकि, कंपनियां पूरी कैपेसिटी पर काम नहीं कर पा रही हैं, ऐसे में उन्होंने अब स्कीमें और ऑफ़र देने भी बंद कर दिए हैं."

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