कोरोना वायरस से लड़ने को कितना तैयार है उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा

मास्क लगाए महिला

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    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए

लखनऊ स्थित डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कार्यरत नर्स शशि सिंह ने रविवार को एक वीडियो पोस्ट किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया.

वीडियो में नर्स शशि सिंह अस्पतालों की सुविधाओं की पोल खोलती दिख रही हैं, ख़ासकर नर्सों को दी जा रही सुविधाओं की.

शशि सिंह कहती हैं, "मैं इस समय ड्यूटी पर हूं. यह मेरा वॉर्ड है. हमारे यहां स्थिति यह है कि नर्सों के लिए कोई सुविधा नहीं है. एन-95 मास्क नहीं है. प्लेन मास्क मिलता है, ग्लव्स मिलते हैं, उसी से हम पेशेंट को हैंडल करते हैं. यह स्थिति पूरे उत्तर प्रदेश में है. नर्सों के पास सामान नहीं हैं लेकिन उनसे कहा जाता है कि स्वाइन फ़्लू और कोरोना के संदिग्ध मरीजों को हैंडल कीजिए."

क़रीब बारह मिनट के इस वीडियो में शशि सिंह प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था, ख़ासकर मरीज़ों की सेवा में लगी नर्सों को दी जाने वाली सुविधाओं पर कई सवाल खड़े करती हैं.

शशि सिंह इस बारे में विस्तृत बातचीत के लिए तो उपलब्ध नहीं हुईं लेकिन राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर विक्रम ने इस मामले में बीबीसी से बात की और उन्होंने कहा कि सुविधाओं की कमी पहले ज़रूर थी लेकिन अब ऐसा नहीं है.

डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल

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कोरोना संकट

इससे पहले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि कोरोना संकट से निपटने के लिए राज्य पूरी तरह से तैयार है और इन तैयारियों का विस्तार किया जा रहा है.

जय प्रताप सिंह ने बताया, "हम लोगों ने तो 27 जनवरी को जब अडवाइज़री जारी हुई थी तभी से तैयारी शुरू कर दी थी. पूरे प्रदेश के अस्पतालों में 820 आइसोलेशन बेड तैयार कर लिए गए थे. इसके अलावा 480 बेड मेडिकल कॉलेजों में हैं."

"आठ सौ डॉक्टरों और उनके असिस्टेंटों जैसे- फ़ार्मासिस्टों, टेक्नीशियनों इत्यादि की टीम को ट्रेनिंग देकर तैयार रखा गया है और ज़रूरत के हिसाब से उनकी तैनाती की जा रही है. सेना, रेलवे और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से भी हमने पंद्रह दिन पहले ही अनुरोध किया था कि आपकी भी ज़रूरत पड़ने पर हम सहायता ले सकते हैं इसलिए आप भी तैयार रहें."

स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह

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सिर्फ़ इमर्जेंसी सेवाएं चालू

स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने बताया कि अस्पतालों में ओपीडी बंद कर दिया है और केवल इमर्जेंसी सेवाएं ही चल रही हैं. अस्पतालों में सिर्फ़ गंभीर रूप से बीमार लोगों को ही भर्ती किया जाएगा. उनका कहना है कि हमारा पूरा फ़ोकस इस समय कोरोना पीड़ित लोगों पर ही है.

वहीं सोमवार देर शाम उत्तर प्रदेश सरकार ने फ़ैसला किया कि आगामी एक हफ़्ते के भीतर प्रदेश के 24 सरकारी और 27 निजी मेडिकल कॉलेजों में आइसोलेशन बेड्स की क्षमता को बढ़ाकर 11000 तक किया जाएगा.

इसके अलावा इन सभी मेडिकल कॉलेजों में कोविड-19 अस्पताल भी बनाए जा रहे हैं. लखनऊ में इस तरह के तीन कोविड-19 अस्पताल बनेंगे जो पूरी तरह से कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों के इलाज, उनके आइसोलेशन और उनकी देखभाल के लिए होंगे.

लखनऊ के एसजीपीजीआई में हाई रिस्क मरीजों के लिए विशेष कोविड अस्पताल बनाया जाएगा जिसमें दो सौ से ज़्यादा आइसोलेशन बेड के अलावा क़रीब सौ वेंटिलेटर भी उपलब्ध होंगे. अभी तक प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में महज़ तीन सौ वेंटिलेटर ही उपलब्ध हैं.

अभी लखनऊ में कोरोना मरीजों के लिए तीन अस्पतालों- किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, राम मनोहर लोहिया अस्पताल और एसजीपीजीआई में आइसोलेशन वॉर्ड बनाए गए हैं.

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी

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टेस्ट करने की व्यवस्था कैसी है

लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और कोरोना वॉर्ड के इंचार्ज डॉक्टर विक्रम कहते हैं कि कोरोना टेस्ट की सुविधाओं को भी बढ़ाने की ज़रूरत है जो कि अभी कुछ ही जगहों पर उपलब्ध है.

उनके मुताबिक, "सभी लोगों को अस्पताल के ही आइसोलेशन वॉर्ड में रखने की ज़रूरत नहीं होती. बल्कि जो संदिग्ध होते हैं उन्हें घर में ही दो हफ़्ते के आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है लेकिन यदि रोग के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें अस्पताल में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की देख-रेख में रखा जाता है. चूंकि यह बीमारी बिल्कुल नई है इसलिए इसकी तैयारी में भी वक़्त लगा. जहां तक अस्पतालों में आइसोलेशन बेड्स की बात है और सुरक्षात्मक उपकरणों की बात है, तो अब उसकी कमी नहीं है."

डॉक्टर विक्रम सिंह

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बड़ा ख़तरा है...

लेकिन एसजीपीजीआई अस्पताल के ही एक सीनियर डॉक्टर नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं कि अस्पताल तक बहुत कम लोग पहुंच पा रहे हैं.

उनके मुताबिक, "कुछ लोग तो जानबूझकर अस्पताल नहीं आ रहे हैं और कई ऐसे भी लोग हैं जिन्हें अस्पताल वालों ने ही तवज्जो नहीं दी. जबकि अस्पताल में डॉक्टरों और सहयोगियों की टीम को ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए. एक भी पॉज़िटिव केस यदि आइसोलेशन के बाहर है तो समझिए कि वो कितना बड़ा ख़तरा है. सच्चाई यह है कि इस बारे में तब कार्रवाई होनी शुरू हुई है जब पानी सिर से ऊपर जाने लगा."

उत्तर प्रदेश के ज़िला चिकित्सालयों की हालत बहुत अच्छी नहीं है. यहां तक कि 24 मेडिकल कॉलेजों में भी महज़ कुछ में ही अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं. ऐसे में कोरोना जैसी भयावह और अज्ञात बीमारी से लड़ने के लिए जिस तरह आधारभूत स्वास्थ्य संरचना की ज़रूरत होती है, उसका यहां नितांत अभाव है.

वीडियो कैप्शन, कोरोना वायरस ने ऐसे बदला दुनिया को

सकारात्मक ख़बर

लखनऊ में एक निजी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर राजीव मिश्र कहते हैं, "कोरोना जैसी बीमारी को फैलने से रोकने और उससे निपटने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ साफ़-सफ़ाई होती है. इस लिहाज़ से ज़्यादातर सरकारी अस्पतालों की स्थिति अच्छी नहीं है. कई ज़िला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में तब्दील कर दिया गया है लेकिन सच्चाई ये है कि वहां ज़िला अस्पताल जैसी सुविधाएं भी अभी नहीं हैं. ऐसे में, इस भयावह बीमारी से निपटने के लिए सरकार को कई ज़रूरी क़दम उठाने होंगे, वो भी जल्दी."

सरकार ने सोमवार देर रात इस संबंध में कई फ़ैसले ज़रूर लिए लिकन आइसोलेशन बेड्स की संख्या को अचानक कई गुना बढ़ा देना महज़ कुछ दिनों के भीतर कितना संभव हो पाएगा, ये देखने वाली बात होगी.

राज्य में संदिग्धों और मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और अब तक यह क़रीब तीन दर्जन तक पहुंच चुकी है.

जानकारों के मुताबिक, शहरों को लॉकडाउन करने का फ़ैसला इसे रोकने में काफ़ी कारगर हो सकता है लेकिन लॉकडाउन को कठोरता से लागू कराना भी एक चुनौती है. हालांकि, इस बीच एक सकारात्मक ख़बर ज़रूर आई है कि जो मरीज़ कोरोनो वायरस पॉज़िटिव पाए गए थे, उनमें से 11 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं.

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