भारत-बांग्लादेश सीमा पर फंसे 100 से ज़्यादा कश्मीरी छात्र

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भारत और बांग्लादेश सीमा में बेनापोल-पेट्रोपोल बॉर्डर चेकपोस्ट पर 100 से अधिक कश्मीरी छात्र फंस गए हैं. उन्हें नहीं मालूम कि उन्हें अब क्या करना है.
ये छात्र भारत आना चाहते हैं. बांग्लादेश के आप्रवासन प्राधिकरण ने उनके पासपोस्ट और वीज़ा चेक करके इन्हें भारत जाने की इजाज़त दे दी मगर भारत की पोर्ट अथॉरिटी ने उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया.
बेनापोल (बांग्लादेश) पोर्ट के प्रशासन ने बीबीसी को बताया कि इन छात्रों में आधे लड़के हैं और आधे लड़कियां. वे मेडिकल स्टूडेंट हैं और ढाका में पढ़ाई कर रहे हैं.
बांग्लादेश ने 16 मार्च को ही कोरोना वायरस के कारण अपने शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया था. भारत ने 13 मार्च को विदेशी नागरिकों के लिए अपनी सीमाएं बंद कर दी थीं. पश्चिम बंगाल सोमवार शाम से ही पूरी तरह लॉकडाउन है.
इस दौरान, भारत के पासपोर्ट धारकों को बांग्लादेश के साथ लगती विभिन्न बंदरगाहों से प्रवेश करने और बाहर जाने की इजाज़त थी.

भारतीय नागरिकों का आना-जाना
बेनापोल बंदरगाह के उप निदेशक मोहम्मद ममून कबीर ने बीबीसी को बताया, "इस दौरान भारतीय नागरिकों का आना-जाना लगा रहा."
पश्चिम बंगाल को सोमवार को आधिकारिक तौर पर लॉकडाउन किया गया था. ममून ने कहा कि भारत के विभिन्न राज्यों में लॉकडाउन के एलान के बाद कल तक बांग्लादेश से बाहर जाने वालों की संख्या काफ़ी ज़्यादा थी.
कल तक बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अपने देश लौटे मगर पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन शुरू होने के बाद हालात ख़राब हुए.
ममून ने कहा, "अब हम भारतीय उच्चायोग और विदेश मंत्रालय से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं."
ममून ने बताया कि जब कश्मीरी छात्रों को आने नहीं दिया गया तो उन्होंने मैनेजर को फ़ोन किया. उन्होंने बताया, "भारत के अधिकारियों ने बताया कि वे किसी को आने नहीं दे सकते. लॉकडाउन के दौरान कोई भी भारत में दाख़िल नहीं हो सकता."
कश्मीरी छात्रों ने बांग्लादेशी अधिकारियों को बताया कि उन्होंने दूतावास से संपर्क किया था और उन्हें लॉकडाउन के बारे में सोमवार को ही पता था.
बेनापोल पोर्ट के उपनिदेशक ममून ने कहा, "इन छात्रों के पास भारतीय पासपोर्ट और बांग्लादेश का वैध वीज़ा है. हमें नहीं मालम कि इन हालात में क्या करें."

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मोदी सरकार गी घोषणाएं
कोरोना वायरस के ख़तरे को कम करने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण पैदा हुए हालात से कंपनियों, कारोबारियों और करदाताओं को बचाने के लिए भारत सरकार ने कुछ आर्थिक राहत देने वाले क़दम उठाए हैं.
इनमें आयकर रिटर्न और जीएसटी फ़ाइल करने की तारीख़ बढ़ाने और एटीएम से पैसा निकालने पर लगने वाला चार्ज ख़त्म करना शामिल है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने की तारीख़ 30 जून तक बढ़ा दी है. इस अवधि के लिए देरी से की गई पेमेंट के लिए ब्याज़ दर 12 से घटाकर नौ प्रतिशत कर दी गई है. देरी से टीडीएस जमा करवाने पर 18 प्रतिशत की जगह अब नौ प्रतिशत ब्याज़ लगेगा.
इसके अलावा मार्च, अप्रैल और मई 2020 के लिए जीएसटी भरने की तारीख़ भी 30 जून तक बढ़ा दी गई है. जिन कंपनियों का टर्नओवर पांच करोड़ से कम है, उन्हें कोई ब्याज़, लेटफ़ीस या पेनल्टी नहीं देनी होगी. पांच करोड़ से अधिक टर्नओवर वाली कंपनियों को देरी करने पर शुरुआती 15 दिन में कोई दंड नहीं होगा.
इसके बाद भी पेनल्टी या लेटफ़ीस नहीं देनी होगी, उन्हें घटी हुई नौ फ़ीसदी की दर से ब्याज़ देना होगा. अंतिम तारीख़ में जीएसटी फ़ाइल करने के लिए सर्वर वगैरह पर लोड न पड़े, इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों को तारीख़ें बताई जाएंगी. सबका विश्वास योजना के तहत विवादों के निपटारे की तारीख़ 31 मार्च से बढ़ाकर 30 जून, 2020 की गई.
इसके तहत डेढ़ करोड़ से कम टर्नओवर वाली कंपनियों से ब्याज़ नहीं लिया जाएगा. वित्त मंत्री ने कहा, "हम नहीं चाहते कि लॉकडाउन के काऱण आयाताक और निर्यातक परेशान हों, इसलिए कस्टम क्लियरेंस दिन रात जारी रहेगा."
आधार को पैन से लिंक करने की आख़िरी तारीख़ भी बढ़ाकर 30 जून, 2020 की गई. अब बैंकों की ओर से एटीएम से पैसा निकालने पर लगने वाला चार्ज ख़त्म कर दिया गया है और ख़ातों में न्यूनतम बैलंस बनाए रखने की शर्त भी हटा दी गई है.

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कोरोना वायरस के चलते शाहीन बाग़ को खाली कराया गया
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण देश के तमाम राज्यों समेत राजधानी दिल्ली में भी लॉकडाउन है. इसके मद्देनज़र दिल्ली पुलिस ने शाहीन बाग़ के इलाक़े को पूरी तरह खाली करा लिया है. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है.
दिल्ली पुलिस के दक्षिण पूर्वी ज़िले के डीसीपी ने समाचार एजेंसी एएनआई से इसके बारे में बताया है.
उन्होंने बताया है, "शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों से लॉकडाउन के चलते जगह खाली करने की अपील की गई थी. लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए. इसके बाद उन पर कार्रवाई करनी पड़ी. प्रदर्शन स्थल को पूरी तरह खाली करा लिया गया है. हालांकि इस कार्रवाई में हमें कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लेना पड़ा है."
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हालांकि कितने लोगों को हिरासत में लेने की नौबत आई है, इसको लेकर फ़िलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है.

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शाहीन बाग़ इलाक़े में ही रहने वाले एक शख़्स ने नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि पूरे शाहीन बाग़ में ही सुरक्षा बल तैनात है. इसके अलावा प्रदर्शन स्थल पर भारी संख्या में सुरक्षा बल की तैनाती है.
इस शख़्स ने बताया कि पुलिस प्रदर्शन स्थल पर लगे टेंट हटा रही है और वहां लगे पोस्टर और बैनर भी हटाए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इससे पहले सोमवार की रात को भी पुलिस यहां आई थी.

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शाहीन बाग़ में बीते साल 15 दिसंबर से ही नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं. यह प्रदर्शन महिलाओं के नेतृत्व में हो रहा है.
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर रविवार को देशभर में जनता कर्फ़्यू लगाया गया था.

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उस दिन शाहीन बाग में पेट्रोल बम फेंके गए थे. हमले में कोई घायल नहीं हुआ था क्योंकि जनता कर्फ़्यू को देखते हुए प्रदर्शन कर रहे लोग सांकेतिक प्रदर्शन के तौर पर अपनी चप्पलों को प्रदर्शन स्थल पर छोड़कर गए थे और कुछ एक बुज़ुर्ग महिलाएं ही वहां मौजूद थीं.
इससे पहले कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए शाहीन बाग़ में प्रदर्शन कर रही महिलाओं से कहा गया था कि वो अपना प्रदर्शन समाप्त कर दें लेकिन उनका कहना था कि प्रदर्शन जारी रहेगा.
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हालांकि प्रदर्शन के आयोजकों ने यह ज़रूर कहा था कि संक्रमण का ध्यान रखते हुए कम संख्या में ही महिलाएं प्रदर्शन में शामिल होगी.
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