कन्हैया कुमार के ख़िलाफ़ केस चलाने की दिल्ली सरकार ने दी मंज़ूरी, कन्हैया ने कहा सत्यमेव जयते

वीडियो कैप्शन, कन्हैया के ख़िलाफ़ राजद्रोह का केस चलाने की मंजूरी
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दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के ख़िलाफ़ केस चलाने की मंज़ूरी दे दी है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार शुक्रवार को दिल्ली सरकार ने इसकी मंज़ूरी दी.

यह फ़ैसला आने के बाद कन्हैया कुमार ने दिल्ली सरकार को धन्यवाद देते हुए सत्यमेव जयते कहा है. कन्हैया ने ट्वीट किया है, "दिल्ली पुलिस और सरकारी वकीलों से आग्रह है कि इस केस को गंभीरता से लिया जाए, फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में स्पीडी ट्रायल हो और TV वाली आपकी अदालत की जगह क़ानून की अदालत में न्याय सुनिश्चित किया जाए. सत्यमेव जयते."

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कन्हैया कुमार ने यह भी कहा है कि इस मामले को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाए जाने की ज़रूरत है ताकि देश को पता चले कि कैसे इस क़ानून का दुरुपयोग राजनीतिक लाभ और बुनियादी मसलों को भटकाने के लिए किया जाता है.

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बता दें कि 9 फ़रवरी, 2016 को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाने का मामला सामने आया था. इस मामले में पुलिस ने कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद और अनिर्बान के अलावा सात अन्‍य लोगों को अभियुक्त बनाया था और उनपर राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज किया था.

पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दायर कर दी है लेकिन केस चलाने के लिए दिल्ली सरकार की इजाज़त ज़रूरी है. लेकिन दिल्ली सरकार ने अभी तक इसकी इजाज़त नहीं दी थी.

कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई थी जिसमें अदालत से अपील की गई थी कि वो दिल्ली सरकार को केस चलाने की मंज़ूरी देने के आदेश दे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को ख़ारिज कर दी थी.

लेकिन अब जबकि दिल्ली सरकार ने इसकी मंज़ूरी दे दी है तो कन्हैया, उमर ख़ालिद, अनिर्बान और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मुक़दमा चलने का रास्ता साफ़ हो गया है.

दिल्ली सरकार की ओर से ये मंज़ूरी बीते 19 फ़रवरी को दिल्ली पुलिस के भेजे अनुरोध के बाद दी गई है. दिल्ली सरकार के पास दिल्ली पुलिस की मंज़ूरी वाला आवेदन 14 जनवरी, 2019 से लंबित पड़ा हुआ था.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने ट्वीट किया है, लोगों के दबाव के कारण आख़िर दिल्ली सरकार को जेएनयू मामले में मुक़दमा चलाने की अनुमति देनी पड़ी.

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दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने केजरीवाल सरकार के इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

दिल्ली पुलिस ने जेएनयू में कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए जाने के मामले में तीन साल के इंतज़ार के बाद 14 जनवरी, 2019 को पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाख़िल किया था.

दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य पर भी भारत विरोधी नारे लगाने का मामला दर्ज किया था.

इसके अलावा चार्जशीट में आक़िब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रईस रसूल, बशीर भट और बशारत के नाम शामिल हैं.

चार्जशीट में क्या है?

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरू करने की अपील की है. हालांकि आरोप पत्र में कुल 36 लोगों के नाम हैं, लेकिन बाक़ी के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं होने की बात कही गई है. कोर्ट चाहे तो उन्हें समन भेज सकता है.

चार्जशीट

इमेज स्रोत, Twitter

आरोप पत्र के साथ कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फुटेज और अन्य दस्तावेज़ों को बतौर सबूत पेश किया गया था.

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में सीपीआई नेता डी राजा की बेटी अपराजिता और जेएनयू छात्रसंघ नेता शैहला रशीद का नाम भी शामिल है.

क्या था मामला?

साल 2016 में 9 फ़रवरी को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ अज्ञात युवकों ने संसद पर हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरू को मौत की सज़ा दिए जाने के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था.

इस विरोध प्रदर्शन में कुछ युवाओं ने कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए थे.

दिलचस्प यह है कि अरविंद केजरीवाल तीन मार्च, 2016 को ट्वीट करके कहा था, कन्हैया ने शानदार भाषण दिया है.

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इसके बाद कन्हैया कुमार और उमर ख़ालिद को राजद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

कन्हैया उस समय जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष थे.

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