आज़म ख़ान के बेटे और सपा विधायक अब्दुल्ला आज़म की विधानसभा सदस्यता रद्द

आज़म ख़ान के बेटे और विधायक अब्दुल्ला आज़म

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इमेज कैप्शन, सपा सांसद आज़म ख़ान के बेटे और विधायक अब्दुल्ला आज़म
    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिन्दी के लिए
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रामपुर के सांसद आज़म ख़ान, उनकी पत्नी और विधायक तंज़ीन फ़ातिमा और विधायक बेटे अब्दुल्ला आज़म के जेल जाने के ठीक एक दिन बाद अब्दुल्ला आज़म की विधानसभा सदस्यता भी रद्द कर दी गई.

गुरुवार को इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी गई. अब्दुल्ला आज़म पर विधानसभा चुनाव लड़ते समय अपनी उम्र अधिक बताने और ग़लत शपथपत्र देने का आरोप है.

विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के उस निर्णय के आधार पर अब्दुल्ला का निर्वाचन रद्द किया जाता है, जो नवाब काज़िम अली खां की ओर से दी गई एक याचिका के बाद आया था.

बयान में आगे कहा गया है, "मोहम्मद अब्दुल्ला आज़म ख़ान का निर्वाचन उच्च न्यायालय के निर्णय 16 दिसंबर 2019 से विधि शून्य माना जाएगा. इसलिए यूपी विधानसभा में मो. अब्दुल्ला आजम ख़ान का स्थान 16 दिसंबर 2019 से रिक्त हो गया है."

अब्दुल्ला के ख़िलाफ़ यह याचिका चुनाव में उनके प्रतिद्वंद्वी रहे बहुजन समाज पार्टी उम्मीदवार काज़िम अली ख़ान ने दायर की थी.

आज़म ख़ान के बेटे और विधायक अब्दुल्ला आज़म को जेल

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सीतापुर जेल शिफ़्ट किए गए तीनों

अब्दुल्ला आज़म रामपुर के सांसद आज़म ख़ान के बेटे हैं और रामपुर ज़िले की स्वार सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक थे. अब्दुल्ला की मां और आज़म की पत्नी तंज़ीन फ़ातिमा भी विधायक हैं और फ़िलहाल ये तीनों सीतापुर की जेल में बंद हैं.

रामपुर की एक अदालत ने इन तीनों को बुधवार को अब्दुल्ला आज़म को फ़र्ज़ी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में दो मार्च तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था. बुधवार को ही इन तीनों ने अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया था.

लेकिन, तीनों को गुरुवार सुबह ही रामपुर जेल से सीतापुर जेल में शिफ़्ट कर दिया गया. बताया जा रहा है कि ज़िला प्रशासन ने ऐसा क़ानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते किया था.

वीडियो कैप्शन, आज़म खान के बेटे अब्दुल्ला आज़म को हिरासत में क्यों लिया गया?

दरअसल, साल 2017 के विधानसभा चुनाव में नामांकन के वक़्त अब्दुल्ला आज़म की उम्र 25 साल नहीं थी. बावजूद इसके उन्होंने फ़र्ज़ी जन्म प्रमाण पत्र के ज़रिए चुनाव लड़ा और जीतकर विधानसभा पहुंचे.

अब्दुल्ला आज़म के निर्वाचन के ख़िलाफ़ बीएसपी नेता नवाब काज़िम अली ख़ान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अब्दुल्ला आज़म पर लगे आरोपों को सही पाया. हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अब्दुल्ला आज़म सुप्रीम कोर्ट भी गए, लेकिन उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिली.

बीएसपी नेता नवाब काज़िम अली ख़ान

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इमेज कैप्शन, बीएसपी नेता नवाब काज़िम अली ख़ान

आज़म ख़ान पर करीब 84 मामले

उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले साल कई मामलों में आज़म ख़ान और उनके परिवार के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराए थे. इनमें ज़्यादातर मामले भूमि अधिग्रहण, चोरी और रिश्वतखोरी से जुड़े हैं. कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद आज़म ख़ान कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे, तो मंगलवार को कोर्ट ने उनकी संपत्ति कुर्की करने के आदेश जारी कर दिए थे.

कोर्ट ने पुलिस को 17 मार्च से पहले ही पेश करने का आदेश दिया था, लेकिन आज़म ख़ान ने अगले ही दिन परिवार सहित कोर्ट में समर्पण कर दिया. आज़म ख़ान पर क़रीब 84 मामले दर्ज हैं.

आज़म ख़ान को जेल भेजे जाने के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा तेज़ हो गई. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में परोक्ष रूप से तंज़ कसते हुए कहा, "हम गंदगी को साफ़ कर रहे हैं, चाहे वह किसी भी रूप में हो."

वहीं गुरुवार सुबह समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव आज़म ख़ान से मिलने सीतापुर जेल गए. जेल में मिलने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "मोहम्मद आज़म ख़ान के साथ बीजेपी सरकार अन्याय कर रही है और बदले की भावना से काम कर रही है. उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है. प्रशासन का जो रवैया है, वह पूर्णतय: अनुचित है. बीजेपी सरकार संविधान को नहीं मानती है और विरोधियों के ख़िलाफ़ बदले की भावना से काम करती है."

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इमेज कैप्शन, सीतापुर ज़िला जेल के बाहर मीडिया से बातचीत करते सपा प्रमुख अखिलेश यादव

रिक्शे पर माइक रखकर संपत्ति कुर्की की घोषणा

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म ख़ान नौ बार विधायक, पांच बार मंत्री और एक बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं. फ़िलहाल वह रामपुर सीट से लोकसभा के सदस्य हैं. साल 2019 में आज़म खां के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा देने के बाद उनकी पत्नी डॉक्टर तंज़ीन फ़ातिमा चुनाव जीतकर विधायक बनीं. वहीं उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म साल 2017 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर स्वार विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे.

साल 2017 में राज्य में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनने के बाद आज़म ख़ान और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के ख़िलाफ़ कई मुक़दमे दर्ज किए गए. इनमें से कई मामलों में अदालत ने उनको हाज़िर होने का आदेश दिया था, लेकिन वो अब तक पेश नहीं हुए थे. उन्‍होंने उच्च न्यायालय में अग्रिम ज़मानत के लिए याचिका दायर की, लेकिन वहां से भी उनको राहत नहीं मिली. आख़िरकार बुधवार को आज़म ख़ान ने अपने परिवार के साथ अतिरिक्त ज़िला जज धीरेंद्र कुमार की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया.

आज़म ख़ान के अदालत में सरेंडर के दौरान कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. इस दौरान बड़ी संख्‍या में समाजवादी पार्टी के समर्थक भी वहां मौजूद थे. इन लोगों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस ने उनके रामपुर स्थित आवास पर दबिश दी थी और न मिलने पर उनके घर के बाहर कुर्की के नोटिस चिपका दिए गए थे. इसके अलावा रिक्शे पर माइक रखकर आज़म ख़ान की संपत्ति कुर्की की घोषणा भी रामपुर में कराई गई थी.

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