दिल्ली हिंसा: हाई कोर्ट की पुलिस को फटकार, पूछा 'भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं पर FIR क्यों नहीं?'

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दिल्ली में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान और हाल ही में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़े तेवर दिखाते हुए दिल्ली पुलिस को जमकर फटकार लगाई.
बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, बीजेपी सांसद परवेश वर्मा ने चुनाव प्रचार के दौरान कथित भड़काऊ भाषण दिए थे.
दिल्ली के लक्ष्मी नगर से विधायक अभय वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में जारी हिंसा के बीच भड़काऊ भाषण दिए. बीजेपी के एक और नेता कपिल मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने रविवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली इलाक़े में भड़काऊ भाषण दिया जिसके कारण वहां हिंसा शुरू हुई.
दिल्ली पुलिस या बीजेपी ने किसी भी नेता पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है.
सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाक़ों में हुए दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता की जाँच के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.
गिरफ़्तारी की मांग
याचिका में भड़काऊ भाषण देने वाले बीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी की मांग की गई थी.
बुधवार को इस मामले की सुनवाई जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह ने की.
मामले में हर्ष मंदर की तरफ़ से कॉलिन गॉनज़ाल्विस पेश हुए जबकि केंद्र सरकार की तरफ़ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर आचार्य
और दिल्ली सरकार की तरफ़ से वकील राहुल मेहरा पेश हुए.

अदालत में वीडियो दिखाया गया
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या उन्होंने नेताओं के भड़काऊ बयानों वाले वीडियोज़ देखे हैं? पुलिस के ढुल-मुल रवैये पर अदालत ने कहा, ''मुझे पूरा विश्वास है कि आपके कमिश्नर के दफ़्तर में कई टीवी सेट लगे होंगे.''
अदालत सिर्फ़ यहीं नहीं रुकी उसने अदालत के अंदर ही बीजेपी नेताओं के भड़काऊ भाषणों की विडियो क्लिप चलाने का आदेश दिया.
कोर्ट ने कपिल मिश्रा के भाषण के दौरान पूछा कि कपिल के बग़ल में एक पुलिस अधिकारी खड़े हैं वो कौन हैं?
तुषार मेहता ने कहा कि अदालत के आदेश के कारण पुलिस के मनोबल पर बुरा असर पड़ेगा. मेहता ने कहा, ''हम उचित समय पर एफ़आईआर दर्ज करेंगे.''
शहर जल रहा है
इस पर जस्टिस मुरलीधर ने कहा, ''उचित समय? शहर जल रहा है. जब आपके पास भड़काऊ भाषणों के कई क्लिप हैं, तो आप किसका इंतज़ार कर रहे हैं? आप एफ़आईआर क्यों नहीं दर्ज कर रहे हैं. जब एसजी ख़ुद कह रहे हैं कि ये वीडियो भड़काऊ हैं, तो आप एफ़आईआर दर्ज क्यों नहीं कर रहे हैं? पूरा देश इस सवाल को पूछ रहा है."
दिल्ली हाई कोर्ट ने अदालत में मौजूद दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर प्रवीण रंजन से कहा कि वो जाकर अपने कमिश्नर को बता दें कि अदालत बहुत नाराज़ है.
हाई कोर्ट ने कहा कि बीजेपी के तीन नेताओं अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा और कपिल मिश्रा पर एफ़आईआर दर्ज होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि केवल उन्हीं नेताओं के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि भड़काऊ भाषण देने वाले अन्य वीडियो के आधार पर भी एफ़आईआर दर्ज की जाए.
अदालत ने कहा कि पुलिस इस मामले में गुरुवार को बताए कि उसने इस मामले में क्या कार्रवाई की है.
अदालत ने कहा कि इन्हीं तरीक़ों से शांति बहाल की जा सकती है. अ
दालत ने कहा, ''हम नहीं चाहते कि दिल्ली की हिंसा 1984 के दंगे का रूप ले ले.''

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इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सात निर्देश दिए हैं-
1-जिन लोगों के रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों की जान गई है, उन्हें प्रशासन भरोसे में ले और पूरे सम्मान के साथ अंत्येष्टि कराए.
2-एक हेल्पलाइन और हेल्पडेस्क बनाया जाए. दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि जल्द ही ऐसा किया जाएगा.
3-ऐम्बुलेंस की पर्याप्त व्यव्स्था की जाए और इनके पहुंचने में कोई बाधा न आए.
4-अगर पर्याप्त आश्रयगृह नहीं हैं तो इसकी व्यवस्था की जाए.
5-इन आश्रयगृहों में बुनियादी चीज़ों की कमी नहीं होनी चाहिए. कंबल, दवाई, शौचालय और पानी की व्यवस्था मुस्तैद हो.
6-डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटीज 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू करें. इससे पीड़ितों को तत्काल मदद मिलेगी.
7-पीड़ितों को मदद करने के लिए पर्याप्त पेशेवरों को तैनात किया जाए.
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