You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
अरविंद केजरीवाल का शपथ ग्रहण, मोदी वाराणसी में- पाँच बड़ी ख़बरें
दिल्ली विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल रविवार को तीसरी बार रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. दिसंबर 2013 और फ़रवरी 2015 में भी केजरीवाल ने इसी मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.
अरविंद केजरीवाल ने शपथ ग्रहण समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी न्योता दिया है. इसके अलावा दिल्ली के सातों सांसदों, सभी निगम पार्षदों, बीजेपी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों को भी आमंत्रित किया गया है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे हुए हैं.
समारोह में मंत्री और विधायक परिवार के साथ शामिल होंगे. शनिवार को आप के दिल्ली संयोजक गोपाल राय ने रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों का जायजा लिया था. उन्होंने बताया कि समारोह में पिछली बार से ज़्यादा लोगों के आने की संभावना है.
केजरीवाल ने 2013 में कांग्रेस के समर्थन से 49 दिनों तक सत्ता में रहने के बाद इस्तीफ़ा दे दिया था. इसके बाद फ़रवरी 2015 में हुए चुनाव में 70 में 67 सीटें जीती थीं. इस बार पार्टी ने 62 सीटें हासिल की हैं. 2013 और 2015 में उपराज्यपाल नजीब जंग ने शपथ दिलाई थी, इस बार उपराज्यपाल अनिल बैजल शपथ दिलाएंगे.
इमरान ख़ान ने आटे-चीनी पर मानी ग़लती
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने शनिवार को कहा कि मुल्क में आटे और चीनी का संकट उनकी सरकार की लापरवाही के कारण है.
इमरान ख़ान ने कहा कि आटे और चीनी की आसमान छूती क़ीमतों की जांच करवाई जा रही है और जो भी इसमें दोषी होगा उसका नाम सार्वजनिक किया जाएगा और क़ानून के मुताबिक़ सज़ा मिलेगी.
इमरान ख़ान ने कहा, ''चीनी और आटे की कमी हमारी कोताही के कारण है. इसे लेकर जांच की जा रही है. जो भी इसमें शामिल होगा और जिसने भी फ़ायदा उठाया है उसे छोड़ेंगे नहीं. मैं मानता हूं कि आटे की क़ीमत हमारी कोताही के कारण बढ़ी है.''
इमरान ख़ान ने लाहौर के एक सरकारी कार्यक्रम में कहा, ''जब हम सत्ता में आए तो पाकिस्तान का आयात 60 अरब रुपए का था और निर्यात महज़ 20 अरब रुपए का. हम 40 अरब रुपए के व्यापार घाटे में थे.''
पाकिस्तान में एक किलो आटे के लिए लोगों को 70 रुपए से ज़्यादा देने पड़ रहे हैं जबकि एक किलो चीनी के लिए कम से कम 85 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं. एक रोटी की क़ीमत कम से कम आठ रुपए हो गई है. इसके साथ ही रसोई गैस की कमी के कारण इसकी क़ीमत भी बढ़ गई है. परवेज़ मुशर्रफ़ के शासन में भी पाकिस्तान चीनी की कमी से जूझ रहा था और तब चीनी की क़ीमत 105 रुपए प्रति किलो पहुंच गई थी.
17 फ़रवरी को बाबूलाल मरांडी की 'घर वापसी'
झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का 17 फ़रवरी को भारतीय जनता पार्टी में विलय हो जाएगा. इस विलय पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बीजेपी में उन्होंने कई लोगों के साथ काम किया है. मरांडी ने कहा कि वो बीजेपी में एक परिवार की तरह रहे हैं.
बाबूलाल मरांडी ने 2006 में बीजेपी छोड़ी थी और पूरे 14 साल बाद वापस आ रहे हैं. मरांडी ने कहा, ''हमारी पार्टी ने बीजेपी में विलय का प्रस्ताव पारित कर दिया है. हमने बीजेपी को भी बता दिया है. चुनाव आयोग को भी इसकी सूचना दे दी गई है. अब हमारी भूमिका ख़त्म हो गई है. पिछले 12-13 सालों से बीजेपी, आरएसएस और अन्य मित्र बार-बार मुझसे कहते थे, लेकिन मैं बहुत देर तक अड़ा रहा. अब जब मन हुआ तो लगा अब देर क्या करना है. जहां तक निर्णय लेने की बात है तो इसे संयोग कह सकते हैं.''
विवादित बयान के लिए गिरिराज तलब
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने देवबंद पर विवादित बयान के लिए शनिवार को केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को तलब किया. गिरिराज ने तीन दिन पहले सहारनपुर की एक सभा में कहा था, ''मैं पहले भी कह चुका हूं कि देवबंद आतंकवाद की गंगोत्री है. दुनिया भर के तमाम बड़े आतंकी यहीं पैदा होते हैं.''
इस बयान की आलोचना होने के बावजूद उन्होंने कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं. उन्होंने कहा, 'मेरा बयान सही है और यदि किसी को समस्या है तो पुलिस से सूची मांग ले कि कितने लोग आतंकी गतिविधियों में संलिप्त हैं.''
कुशवाहा और मांझी से आरजेडी, कांग्रेस की दूरी?
नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए और एनपीआर के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा, विकासशील इंसान पार्टी, जन अधिकार पार्टी और वामदलों के नेताओं-कार्यकर्ताओं ने शनिवार को गांधी मैदान में धरना दिया. लेकिन इस धरना से आरजेडी और कांग्रेस ने दूरी बना ली.
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राजधानी पटना में रहते हुए भी वहां नहीं गए. धरने पर जीतनराम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और उदय नारायण चौधरी बैठे लेकिन पप्पू यादव और मुकेश सहनी भी नहीं पहुंचे. धरना से आरजेडी और कांग्रेस की दूरी पर जीतनराम मांझी ने सफ़ाई दी है. उन्होंने कहा, ''रणनीतिकार एक फ्रंट पर एक साथ नहीं जाते. अपने मोर्चे पर काम करते हैं. जो लोग नहीं आए हैं वो भी केंद्र के क़ानून के ख़िलाफ़ हैं.''
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)