सैयद अकबरुद्दीन ने संयुक्त राष्ट्र में कहा- ख़ुद को सुधारे पाकिस्तान

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी साज़िशों के लिए यहां कोई जगह नहीं है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "यहां कोई आपका मैलवेयर नहीं लेने वाला."
अकबरुद्दीन ने यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रतिनिधि मुनीर अकरम के बयान पर की. मुनीर ने आरोप लगाया था कि 'भारत झूठे दावे कर रहा है कि जम्मू और कश्मीर में हालात सामान्य हैं."
सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, "पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल झूठ का व्यापार कर रहा है. हम इसकी पूरी तरह आलोचना करते हैं. पाकिस्तान को मेरा सीधा सा जवाब है कि पहले वो ख़ुद को ठीक करे. उनकी साज़िशें यहां नहीं चलने वाली हैं."
इससे पहले पाकिस्तान के प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने सुंयक्त राष्ट्र से भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने और कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार देने की दिशा में मज़बूत कार्रवाई की मांग की.
उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान भारत के साथ युद्ध नहीं चाहता. लेकिन, अगर हमला किया जाता है तो पाकिस्तान उसका जवाब देगा जिस तरह पिछले साल फ़रवरी में दिया था. साथ ही यूएन जम्मू और कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन पर रोक लगाई जाए.''
भारत ने बीते साल पांच अगस्त को जम्मू और कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का फ़ैसला किया था. मुनीर ने इसे 'एकतरफ़ा क़दम' बताया.

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सुरक्षा परिषद में बदलाव की मांग
पाकिस्तान पर सख़्त शब्दों में हमला करने के अलावा सैयद अकबरुद्दीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूएन चार्टर को लेकर हो रही खुली चर्चा के दौरा मांग की कि सुरक्षा परिषद में बदलाव लाया जाए.
अकबरुद्दीन ने कहा, ''यह तेज़ी से स्वीकार किया जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आज पहचान, वैधता, प्रासंगिकता और प्रदर्शन को लेकर संकट का सामना कर रही है. आंतकी नेटवर्क का वैश्वीकरण, नई तकनीकों का शस्त्रीकरण और ख़तरनाक कूटनीतिक तरीकों का सहारा लेने वालों का मुक़ाबला करने में असमर्थता परिषद की कमियों को दिखाती है.''

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सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि सुरक्षा परिषद वैश्विक शांति और सुरक्षा के सामने मौजूद और आने वाली चुनौतियों पर ध्यान दे.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए कहा, "हमें एक ऐसी परिषद की ज़रूरत है जो दुनिया की असलियतों और विश्वसनीयता का प्रतिनिधित्व करती हो. परिषद 21वीं सदी की ज़रूरतों के अनुसार होनी चाहिए."
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