इमरान ख़ान ननकाना साहिब हमले पर आए सामने

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पाकिस्तान में शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद ननकाना साहिब गुरुद्वारे के बाहर हुए प्रदर्शन और पत्थरबाज़ी की घटना पर प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने प्रतिक्रिया दी है.
घटना की निंदा करने के साथ ही उन्होंने भारत की मोदी सरकार पर भी निशाना साधा.
इमरान खान ने ट्विटर पर लिखा, "ननकाना की निंदनीय घटना और भारत में मुसलमानों और दूसरे अल्पसंख्यकों पर जारी हमलों के बीच सबसे बड़ा अंतर ये है; ये मेरे विज़न के खिलाफ है और हम इसके प्रति ज़ीरो टॉलरेंस अपनाएंगे. साथ ही पुलिस और न्यायपालिका के ज़रिए सरकार सुरक्षा सुनिश्चित करेगी."
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इसके बाद प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने एक और ट्वीट किया. जिसमें लिखा, "इसके उलट, मोदी की आरएसएस विचारधारा अल्पसंख्यकों को दबाने का समर्थन करती है और मुसलमानों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमले इस एजेंडे का हिस्सा है. आरएसएस लोगों को पीट-पीट कर मार रहे हैं. मुसलमानों के ख़िलाफ़ भीड़ के इस रवैये को ना सिर्फ़ मोदी सरकार समर्थन देती है, बल्कि भारत की पुलिस भी मुस्लिम विरोधी हमलों का नेतृत्व कर रही है."
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नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों में 18 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी.
इमरान ख़ान लगातार भारतीय पुलिस पर बर्बरता के आरोप लगा रहे हैं. इससे पहले शुक्रवार शाम को इमरान ख़ान ने क़रीब दो मिनट का एक वीडियो क्लिप इस दावे के साथ शेयर किया था कि 'भारतीय पुलिस उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के साथ सामूहिक हिंसा कर रही है.'

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लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने तुरंत इमरान ख़ान के इस दावे को ख़ारिज कर दिया और अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा कि ये वीडियो उत्तर प्रदेश का नहीं है, बल्कि मई 2013 में बांग्लादेश के ढाका शहर में हुई किसी घटना का है.
बांग्लादेश के पुराने वीडियो को यूपी पुलिस का बताकर ट्वीट करने की वजह से इमरान ख़ान को ख़ासी आलोचना का सामना करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने ये वीडियो डिलीट कर दिया.
इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने इमरान ख़ान पर निशाना साधा. मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक ट्वीट किया, "फेक न्यूज़ ट्वीट करिए. पकड़े जाइए. ट्वीट डिलीट कीजिए. फिर ये सब दोबारा करिए."
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इससे ठीक पहले रवीश कुमार ने भारतीय विदेश मंत्रालय का वो बयान भी ट्वीट किया था, जिसमें ननकाना साहिब गुरुद्वारे की घटना की कड़ी निंदा की गई थी और पाकिस्तान से सिख समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत क़दम उठाने को कहा गया था.
बयान में ये भी लिखा है कि "पाकिस्तान के ननकाना साहिब शहर में सिख समुदाय के अल्पसंख्यक सदस्यों के साथ हिंसा की घटनाएं होती रही हैं. ये सब पिछले साल अगस्त में हुई उस घटना के बाद हुआ, जब ननकाना साहिब शहर में रहने वाली एक सिख लड़की जगजीत कौर को उसके घर से अगवा कर लिया गया और जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया."
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ननकाना साहिब में हुई इस घटना के बाद सिख समुदाय में ग़ुस्सा है. भारत में दिल्ली, अमृतसर और जम्मू में इस घटना के विरोध में प्रदर्शन हुए. लोग पाकिस्तान में रह रहे सिख समुदाय को लेकर चिंताएं ज़ाहिर कर रहे हैं.
भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध के खिलाफ अपनी पोस्ट से चर्चा में रहीं गुरमेहर कौर ने भी ट्विटर पर लिखा, "ननकाना साहिब पर हमले के बारे में सुनकर मैं बेहद दुखी हूं और इस कायरतापूर्ण कृत्य की कड़ी निंदा करती हूं."
हालांकि गुरमेहर के इस ट्वीट का जवाब देते हुए पाकिस्तानी पत्रकार हामित मीर ने कहा, "पाकिस्तान के मुसलमान हमारे सिख भाई-बहनों के साथ खड़े हैं और हम सब ननकाना साहिब में हुई घटना का विरोध करते हैं. ये कुछ लोगों का काम था. इसमें सरकार शामिल नहीं है बल्कि सरकारी संस्थाएं तो सिख समुदाय के साथ हैं."
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इससे पहले पाकिस्तान ने इसे गंभीर मामलों से ध्यान भटकाने की भारत सरकार की कोशिश बताया था. पाकिस्तान के गृह मंत्री एजाज़ शाह ने कहा था कि ननकाना साहिब में हुए एक व्यक्तिगत झगड़े को मज़हबी रंग देने की कोशिश हुई है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि गुरुद्वारा को कोई नुक़सान नहीं पहुंचा है और झगड़े में शामिल पक्षों से बात की गई है. पाकिस्तान के मुताबिक़ प्रदर्शन करने वाले शख्स ने माफ़ी मांग ली है.
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