घायल पुलिसकर्मी बोला, 'लगा आज नहीं बचेंगे'

अहमदाबाद हिंसा

अहमदाबाद के शाह-ए-आलम क्षेत्र में नए नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में गुरूवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पथराव किया गया. घटना का एक वीडियो ऑनलाइन वायरल हुआ जिसमें नजर आ रहा है कि प्रदर्शनकारी पुलिस पर पथराव कर रहे हैं जिसके बाद स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.

इस वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कारों पर भी पत्थर फेंके. जब भीड़ पुलिस पर भड़क गई, शाह-ए-आलम इलाके के कुछ लोग पुलिस की मदद के लिए आगे आए.

इस घटना के बारे में बीबीसी संवाददाता सागर पटेल ने अहमदाबाद में पुलिस अधिकारी जेएम सोलंकी से बात की.

शाह-ए-आलम इलाके में हुई हिंसा में सोलंकी के सिर में चोटें आईं थी.

उन्होंने बताया, "गुरूवार को अहमदाबाद बंद का आह्वान था. एक मीटिंग की अनुमति मांगी गई थी, जिसकी अनुमति नहीं दी गई. लेकिन लोगों के अवैध तरीके से एकत्र होने की आशंका के कारण पर्याप्त व्यवस्था की गई थी."

उन्होंने बताया, "गुरूवार शाम पांच बजे भीड़ शाह-ए-आलम की दरगाह से निकली और सड़क पर हंगामा शुरू कर दिया. हमने उन्हें शांति से तितर-बितर करने के निर्देश दिए. लेकिन वे पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए लोगों को अपने साथ ले जा रहे थे. पुलिस अधीक्षक ने हिरासत में लिए गए लोगों को थाना पहुंचाया. भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया."

अहमदाबाद हिंसा

'लगा किनहीं बचेंगे'

एक अन्य पुलिसकर्मी खुमानसिंह वाघेला को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके हाथों और पीठ में चोटें आई थीं.

बीबीसी संवाददाता तेजस वैद्य से बातचीत में उन्होंने कहा, "मैं शाह-ए-आलम की दरगाह के गेट के पास तैनात था. शाम पांच बजे के आसपास का वक्त था. इसके बाद दरगाह पर जमा हुए लोग अचानक एक पोस्टर लेकर निकले."

खुमानसिंह

खुमानसिंह ने बताया, "वहां सभी अधिकारी भी थे. हमने लोगों को पकड़ लिया और पुलिस वाहनों में डाल दिया. लेकिन भीड़ तैयारी के साथ आई थी. अगर उन्होंने तैयारी नहीं की थी तो अचानक इतने पत्थर कहां से आ गए? ये लोग पुलिस से भिड़ने के लिए पहले से ही तैयार थे."

उन्होंने बताया, "पथराव इतना तेज था कि मैं किनारे पर रखी एक कुर्सी के पीछे छिप गया. पत्थर इतने जोर से टकराया कि कुर्सी टूट गई और लोग भागने लगे. भले ही हमारे पास लाठी, हेलमेट थी, लेकिन उन्होंने मुझे मौका नहीं दिया और माहौल इतना भयंकर था कि हमें लगा कि हम नहीं बचेंगे."

अहमदाबाद हिंसा

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, पुलिस को पत्थरबाजी से बचाने की कोशिश करते लोग.

'शांतिपूर्ण प्रदर्शन की योजना बनाई गई'

खुमानसिंह ने कहा, "पुलिस ना तो अपना परिवार देखती है और ना ही कोई त्यौहार और हमेशा लोगों की सेवा के लिए तैयार रहती हैं. अगर पुलिस पर हमला होता है, तब ऐसे लोगों पर शर्म आती है."

अहमदाबाद हिंसा

इमेज स्रोत, KALPIT BHACHECH/BBC

इमेज कैप्शन, राजेन्द्र सिंह राणा

इस घटना के बारे में बीबीसी गुजराती से बात करते हुए शाह-ए-आलम इलाके के एक स्थानीय निवासी शकील कुरैशी ने कहा, "दिन में हमने शांतिपूर्वक विरोध किया. शाम को हम दरगाह पर एकत्र हुए. हमने शांतिपूर्वक विरोध करने का फैसला किया. पुलिस ने हमें जाने नहीं दिया. पुलिस ने हमारे नेताओं को गिरफ्तार कर लिया और हम पर लाठीचार्ज किया."

उन्होंने कहा, "लाठीचार्ज हुआ और कई लोग घायल हो गए थे. यह धर्म के नाम पर नहीं है, यह कानून का मामला है. यहां शांतिपूर्ण विरोध के बारे में पहले से ही जानकारी थी."

उन्होंने बताया, "हमने एक जगह निर्धारित की थी. जब हम एकजुट हुए तो हमारे नेता सुन्नी बाबा को गिरफ्तार कर लिया गया. हमने इसका विरोध किया और इसके बाद पुलिस ने हम पर लाठीचार्ज किया."

वीडियो कैप्शन, नरेेद्र मोदी ने नागरिकता कानून और एनआरसी पर क्या कहा?

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