अहमदाबाद में जब मुस्लिम महिला ने पुलिस कर्मियों को बचाया

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भारत के नए नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ अहमदाबाद शहर में जमा हुई भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया था.
विरोध के दौरान मौके पर तैनात पुलिस अपनी जान बचा कर भाग गए थे.
हज़ारों लोगों की भीड़ अचानक बेक़ाबू हो गई थी और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने लगे थे.
ऑनलाइन पर वायरल घटना के एक वीडियो में नजर आ रहा है कि लोग पुलिस पर पत्थर फेंक रहे हैं और पुलिस अपनी जान बचा कर भाग रहे हैं.
वे बचने के लिए दुकानों और छोटे लॉरियों के पीछे छिप गए थे.
जब सैकड़ों लोग पुलिस पर पत्थर फेंक रहे थे उस समय कुछ लोग उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे थे.
वीडियो में नजर आ रहा है कि शाह-ए-आलम इलाक़े में कुछ लोग भीड़ से पुलिस को बचाने के लिए ढाल बन गए थे.

इलाक़े में रहने वाली कुछ महिलाओं ने पुलिसकर्मियों को बचाया.
स्थानीय निवासी फ़रीन बानो ने बीबीसी गुजराती को बताया कि पुलिस पर पथराव किया जा रहा था. उन्होंने बताया, "कुछ पुलिसकर्मियों को पास की एक दुकान में छिपना पड़ा था. हमारे घर के पास खड़े कुछ लड़के उन पुलिसकर्मियों को अंदर ले आए."
उन्होंने बताया, "हमने उनके सिर पर बर्फ़ रगड़ कर उनका इलाज किया और उन्हें कुछ राहत मिली."
फ़रीन बानो के मुताबिक, घायल एक महिला कांस्टेबल भी उनके घर आई.
उन्होंने बताया कि कांस्टेबल बहुत डरी हुई थी. उनके सिर पर एक पत्थर लगी थी और वह रो रही थी. एक अन्य पुलिस अधिकारी के हाथ पर पत्थर लगा था और वह भी घबरा गया था. उन्होंने बताया, "हमने उन्हें शांत कराया."

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फ़रीन बानो ने बताया कि एक पुलिस अधिकारी के सिर में गंभीर चोट आई थी. उन्होंने बताया, "उनके सिर से खून बह रहा था. हमने कुछ रुई लगा दी और अपने रूमाल से उसे बांध दिया."
उन्होंने बताया, "हमने अपने घर में दो पुलिसकर्मियों और एक महिला कांस्टेबल को रखा था और शेष तीन लोगों को मकान के पिछले वाले कमरे में भेज दिया था क्योंकि वे घबरा गए थे."
स्थिति शांत होने पर घायल लोग अपने-अपने घर चले गए.
फ़रीन बानो ने बताया कि इस बात से कोई फर्क़ नहीं पड़ता कि हमारे सामने कौन है. हमें मानवता की भावना से उनकी मदद करनी चाहिए.
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