जामिया प्रदर्शन: 'क़रीब 50 प्रदर्शनकारी हमारे आंगन में घुस आए थे'

जामिया प्रदर्शन

इमेज स्रोत, Avni kaul

इमेज कैप्शन, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में एक बालकनी से लिया गया फ़ोटो.
    • Author, सूर्यांशी पांडे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

"विरोध प्रदर्शन और हिंसा से जुड़ी ख़बरें अख़बारों में पढ़ते थे लेकिन जब अपनी आंखों के सामने होते हुए देखा तो रूह कांप गई."

ये दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहने वाली अवनी कौल के शब्द हैं.

12 दिसंबर को नागरिकता संशोधन क़ानून पारित होने के बाद से जो विरोध की आंधी पहले पूर्वोत्तर भारत में चली, उसने पहले उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को लपेटे में लिया, फिर जेएनयू और दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी भी इसकी ज़द में आ गए.

रविवार को जामिया के छात्रों का प्रदर्शन जामिया के कैंपस से कुछ दूर ही चला था कि उसने हिंसक रूप ले लिया. आसपास रहने वाले लोगों ने जब अपनी आंखों के सामने ये सब होते हुए देखा तो उन्हें यक़ीन नहीं हुआ कि वह भारत की राजधानी दिल्ली में रह रहे हैं.

बीबीसी ने माता मंदिर रोड के पास और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में रहने वाले लोगों से सच जानने की कोशिश की.

जामिया प्रदर्शन

इमेज स्रोत, AVNI KAUL

इमेज कैप्शन, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में हज़ारों की संख्या में जमा हुए प्रदर्शनकारी.

"क़रीब 50 प्रदर्शकारी हमारे आंगन में आ घुसे"

हिंसक प्रदर्शन पर छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने बिना उत्तेजना के लाठी, आंसू गैस के गोले बरसाए, तो पुलिस का कहना है कि छात्रों के पत्थरबाज़ी करने पर यह क़दम उठाया गया.

अपने माता-पिता के साथ रह रही अवनी कौल ने बताया कि रविवार दोपहर को वो लोग घर में अपने किसी मेहमान के आने का इंतज़ार कर रहे थे, तभी 2:30-3:00 बजे के क़रीब उनको नारों की आवाज़ें सुनाई दीं.

न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के सी ब्लॉक में रहने वाली अवनी को लगा कि यह आम प्रदर्शन है और कुछ देर बाद शायद नारेबाज़ी बंद हो जाए.

लेकिन नारे का शोर बढ़ता गया और उनके घर के और नज़दीक आता गया. तब उन्होंने अपने घर की सामने वाली सड़क पर हज़ारों छात्र-छात्राओं का हुजूम देखा. वह दंग रह गईं. हालांकि अवनी का कहना है कि तबतक प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा था. उन्हें लगा कि यह प्रदर्शन कुछ देर बाद आगे चला जाएगा और हो सकता है बाद में जल्द ही ख़त्म भी हो जाए. वह घर के अंदर चली गईं.

लेकिन उसके कुछ देर बाद धमाकों की आवाज़ें आने लगी.

आंसू गैस के गोलों के धमाकों के चलते उनका पूरा घर हिलने लगा था, धमाका इतने नज़दीक हुआ.

अवनी अपनी बाल्कनी की ओर गईं तो उन्होंने देखा कि चारों तरफ़ अफ़रा-तफ़री मची हुई है. पुलिस आंसू गैस के गोले छोड़ रही है और जवाब में छात्र पत्थरबाज़ी कर रहे हैं. इसी मंजर को वो अभी देख ही रहीं थी कि उनके आंगन में क़रीब 50 प्रदर्शनकारी आ गए.

उनके माता-पिता पहले तो सहम गए और सबने अपने आपको घर में एक कमरे में बंद कर लिया. थोडी देर बाद प्रदर्शनकारी उनसे पानी मांगने लगे.

जामिया प्रदर्शन

इमेज स्रोत, AVNI KAUL

इमेज कैप्शन, पुलिस के पीआरओ का कहना है कि पथ्थरबाज़ों से निपटने के लिए इस्तेमाल हई टीयर गैस.

अवनी ने कहा कि उन लोगों की आंखों में जलन हो रही थी तो कुछ लोग प्यासे भी थे इसलिए पानी मांग रहे थे. मैंने फिर उनको पानी दिया.'

वह बताती हैं कि जो लोग उनके घर में घुसे उनमें से कुछ तो प्रदर्शन का हिस्सा भी नहीं थे बल्कि ग़लती से वहां फंस गए. कोई अपनी गाड़ी निकालने आया था तो कोई अपने घर जा रहा था.

जामिया प्रदर्शन

इमेज स्रोत, AVNI KAUL

इमेज कैप्शन, घर के बाहर डीटीसी की बस में लगी आग का धुआं.

"जूते-चप्पल सड़क पर बिखरे दिखे"

जब स्थिति थोड़ी शांत हुई तो उनका परिवार घर से बाहर निकला. अवनी ने बताया कि उन्होंने तब दो जली हुई डीटीसी बस देखी. हमने जब उनसे पूछा कि क्या आप देख पाए थे कि वह आग कैसे और किसने लगाई?

तो अवनी ने कहा क्योंकि वह अंदर की तरफ़ थीं इसलिए उन्होंने नहीं देखा कि आग कैसे और किसने लगाई.

उन्होंने चप्पल, जूते सड़क पर पड़े हुए देखे और कुछ लोग उस वक़्त भी पुलिस से छिपे हुए नज़र आ रहे थे. यह सब शाम के वक़्त हो रहा था.

जामिया प्रदर्शन

इमेज स्रोत, SAURABH GUPTA

इमेज कैप्शन, रात में प्रदर्शन शांत होने के बाद न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी का माहौल.

"मुझे गाड़ी छोड़कर घर आना पड़ा"

वहीं न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के डी ब्लॉक में रहने वाले वाईएस गुप्ता बताते हैं कि वह 4 बजे के क़रीब अपनी गाड़ी का पंचर टायर ठीक कराकर घर वापस लौट रहे थे.

मथुरा रोड पर प्रदर्शन के चलते जाम था तो वह कम्युनिटी सेंटर की ओर से गाड़ी लेकर आए. लेकिन वहां भी उन्होंने भारी संख्या में छात्रों को प्रदर्शन करते पाया.

तब उन्होंने गाड़ी पुलिस स्टेशन के पास छोड़ने का फ़ैसला किया और चलकर घर पहुंचने का सोचा. वाईएस गुप्ता कहते हैं कि एक तरह से वे प्रदर्शनकारियों के साथ ही चल रहे थे और तब प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरह से चल रहा था तो उन्हें किसी तरह का उनसे डर महसूस नहीं हुआ. जब वह घर पहुंच गए उसके बाद उनको ख़बरें मिली कि बसों में आग लगी और पुलिस ने लाठीचार्ज किया.

पेशे से वक़ील कॉलोनी के ए ब्लॉक में रहने वाले जगदीप गुप्ता मार्केट से अपने घर लौट रहे थे और उन्होंने सिवाए भीड़ के और कुछ नहीं देखा.

उन्होंने बताया कि माता मंदिर रोड पर रहने वाले लोगों ने भी बताया कि उस तरफ़ भी बहुत हंगामा हुआ.

जामिया प्रदर्शन

इमेज स्रोत, Alam

इमेज कैप्शन, जामिया यूनिवर्सिटी में पुलिस और छात्रों के बीच का दृश्य.

रविवार को हुए प्रदर्शन में गए जामिया के छात्र, आलम ने क्या बताया?

इस हंगामे में छात्रों के साथ प्रदर्शन करने पहुंचे जामिया में बीए के छात्र आलम दावा करते हैं कि पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था लेकिन ना जाने पुलिस को क्या हुआ कि उन्होंने हम पर लाठी चार्ज कर दिया, टीयर गैस फेकी.

हमने उनसे पूछा कि क्या छात्रों ने पत्थरबाज़ी की थी, तो वह बताते हैं कि जहां वह प्रदर्शन कर रहे थे वह उस इलाक़े का बता सकते हैं कि वहां किसी ने पहले पत्थर नहीं उठाया था. जब पुलिस ने हमला किया तो अपने बचाव में कुछ लोग भाग गए तो कुछ लोगों ने पत्थर मारना शुरू कर दिया.

उनका यह भी कहना है कि जिन्होंने भी बस में आग लगाई वो जामिया का छात्र नहीं हो सकता.

जामिया प्रदर्शन

इमेज स्रोत, SAURABH GUPTA

इमेज कैप्शन, वाई एस गुप्ता के भतीजे सौरभ गुप्ता द्वारा रात के समय का दृश्य का खीचा हुआ दृश्य.

पुलिस ने घटना को लेकर क्या बयान दिए?

साउथ-ईस्ट दिल्ली के डीसीपी ने एएनआई से बातचीत में बताया कि टीयर गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल हुआ था उन लोगों से निपटने के लिए जिन्होंने पुलिस पर पत्थर बरसाए या फिर आसपास के घरों में जो पथराव कर रहे थे.

किसने पहले किसको मारा इससे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस का किसी भी कारण से जामिया के कैंपस में घुसकर छात्रों को मारना कहीं से भी जायज़ है?

पुलिस के पीआरओ एमएस रंधावा ने प्रेस कॉन्फ़ेंस कर ये बताया था कि जिन लोगों ने बस में आग लगाई थी वह लोग भागते हुए जामिया यूनिवर्सिटी में घुस गए थे जिसके चलते जामिया में पुलिस घुसी थी. उन्होंने यह भी कहा कि न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में हुए प्रदर्शन में केवल छात्र शामिल नहीं थे बल्कि जामिया के आसपास के इलाक़े के लोग भी आए थे.

किसने बस जलाई, किसने पत्थरबाज़ी शुरू की उसपर अभी जांच की जा रही है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)