अजित पवार: कभी बीजेपी की नज़र में सबसे 'भ्रष्ट' थे

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- Author, मानसी दाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
2014 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव संपन्न हुए और सरकार बनाने को लेकर कवायद तेज़ हुई. 288 सीटों वाली विधानसभा में 123 सीटें जीत कर आई बीजेपी के लिए सरकार बनाना मुश्किल था.
उस वक्त 41 सीटों पर जीती एनसीपी ने बाहर से बीजेपी को समर्थन देने का फ़ैसला किया था.
उस वक्त शरद पवार ने कहा था, "भले ही हम दोनों में वैचारिक मतभेद हैं लेकिन हमारे पास बीजेपी को समर्थन देने के सिवा कोई रास्ता नहीं है. एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के एक साथ आने की गुंजाइश नहीं है."
लेकिन एनसीपी वही पार्टी थी जिसे चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी लगातार भ्रष्टाचार में लिप्त बता रही थी.
उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनसीपी को "नैचुरली करप्ट पार्टी" की संज्ञा दी थी. बीजेपी नेता देवेन्द्र फडनवीस ने चुनाव से पहले कहा था, "चाहे कुछ हो जाए बीजेपी एनसीपी के साथ नहीं आएगी, हमने विधानसभा में एनसीपी के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया है."
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2019 आते-आते समीकरण बदले और अब विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बीजेपी पूरी तरह अकेली पड़ चुकी थी. बीजेपी और शिवसेना ने साथ में चुनाव लड़ा था लेकिन 105 सीटों के साथ जीत कर आई बीजेपी का साथ शिवसेना ने छोड़ दिया.
आनन-फानन में एनसीपी के नेता अजित आनंदराव पवार (शरद पवार के भतीजे) के भरोसे बीजेपी ने सत्ता में वापसी का दावा किया और अजित पवार को डिप्टी मुख्यमंत्री का पद दे कर सरकार भी बनाई.
लेकिन 48 घंटों में राजनीतिक हलचल तेज़ हुई और सदन में बहुमत साबित करने से ठीक पहले अजित पवार और फिर देवेंद्र फडणवीस को इस्तीफ़ा देना पड़ा.
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान चर्चा के केंद्र में रहे अजित पवार. उनके भाजपा के साथ सरकार में शामिल होने से ठीक पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो सिंचाई घोटाले (Irrigation scam) से जुड़े नौ केस बंद कर दिए.
ब्यूरो का कहना था कि इन 9 मामलों में से कोई भी मामला अजित पवार से नहीं जुड़ा है.

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सिंचाई घोटाला क्या है?
देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी, विदर्भ सिंचाई घोटाले को लेकर हमेशा अजित पवार पर निशाना साधते रहे हैं. 2014 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जो पहली कार्रवाई उन्होंने की थी वो थी सिंचाई घोटाले में अजित पवार की कथित भूमिका की जांच के आदेश देना.
1999 से 2009 तक सिंचाई प्रकल्प में घाटोले का मामला सामने आया था. 2012 में आरोप लगाया गया कि संचाई के लिए बांध बनाने की योजना में भारी घोटाला हुआ है जिसमें राजनेता भी शामिल हैं. उस वक्त डिप्टी मुख्यमंत्री रहे अजित पवार पर क़रीब 70,000 करोड़ रुपयों के हेरफेर का आरोप लगा.
पवार पर ऊंचे दाम पर तीन महीने के भीतर 32 कॉन्ट्रैक्ट देने का आरोप है. इस घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो करीब सिंचाई से संबंधित 3000 टेंडरों की जांच कर रहा है.
2001 से 2011-12 के बीच कैग (नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) ने महाराष्ट्र सिंचाई विभाग के चार ऑडिट किए थे जिसमें नियोजन का अभाव, प्रोजेक्ट की प्रायॉरिटी तय न कर पाना, प्रकल्प आपूर्ति में लगने वाला समय जैसे मामलों में नियमों का उल्लंघन होने का आरोप लगाया गया था. कैग ने कई बार प्रकल्प की निर्धारित राशि में कई गुना इजाफ़ा होने की बात कही थी.
आरोपों के चलते 2012 सितंबर में अजित पवार ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

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2012 में नवंबर में सरकार ने एक व्हाइटपेपर प्रकाशित कर इस मामले में अजित पवार को क्लीनचिट दे दी.
2014 में बीजेपी की सरकार आने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को इस मामले की जांच के आदेश दिए. इस मामले में एनसीपी नेता छगन भुजबल और सुनील तटकारे पर भी आरोप लगे थे.
महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाला
एक घोटाला जिससे अजित पवार का नाम जुड़ा है, वो है महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक से सम्बन्धित 25,000 करोड़ रुपये का घोटाला. ये घोटाला मनी लॉन्ड्रिंग यानी पैसों की धोखाधड़ी से सम्बन्धित है.
इस मामले में इसी साल अगस्त अजित पवार समेत के साथ-साथ शरद पवार और 70 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय ने मामला दर्ज किया है.
इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस को शरद पवार और अजित पवार समेत 70 लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया था.
इस घोटाले में आरोप है कि चीनी मिल को कम दरों पर कर्ज़ दिया गया और कर्ज न चुकाने वाली कंपनियों की संपत्तियों को सस्ती कीमतों पर बेचा गया था.

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वोट नहीं तो पानी नहीं
2014 में चुनाव प्रचार के दौरान महाराष्ट्र के एक गांव में अजित पवार ने धमकी दी थी कि अगर उनकी चचेरी बहन सुप्रिया सुले (शरद पवार की बेटी) को वोट नहीं दिया तो वो गांव के पानी की सप्लाई काट देंगे.
ये घटना 17 अप्रैल 2014 की है जब पवार बारामती लोकसभा सीट के मसालवाड़ी गांव में चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे.
इस संबंध में बाद में आम आदमी पार्टी और शिव सेना ने चुनाव आयोग में शिकायत की थी.
हालांकि बाद में अजित पवार ने इसे उन्हें बदनाम करने की कोशिश बताया.
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