महाराष्ट्र: अभी आने वाली कई रातें भारी हैं...

इमेज स्रोत, Getty Images
महाराष्ट्र की सियासत में नज़ारा पल-पल बदल रहा है. अभी यह ठीक-ठीक नहीं मालूम कि किसके पास कितने विधायक हैं.
फ़िलहाल सबसे बड़ा सवाल ये है कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने शपथ तो ले ली लेकिन उनके पास 145 विधायकों का समर्थन है मौजूदा हालात को देखें तो ऐसा नहीं लगता.
ताज़ा आंकड़ें देखें जो बीजेपी के पास 105 के विधायक, निर्दलीय और छोटे दलों के 14 विधायकों को मिलाकर कुल 119 विधायक हो गए.
सुबह अजित पवार के साथ एनसीपी के 11 विधायक गए थे. अब इनमें से छह शरद पवार के पास वापस आ गए हैं और उन्होंने कहा कि हमें तो कुछ पता ही नहीं था हमें तो अचानक पकड़ कर राजभवन ले गए.
ऐसे में अजित पवार के पास अब बच गए पांच विधायक. इन पांच को अगर 119 के साथ जोड़ दें तो संख्या होती है 124 और बहुमत का आंकड़ा है 145.
ऐसे में भाजपा को 20 विधायकों की जरूरत है और वह कहां से लाएगी शायद किसी को नहीं पता.

इमेज स्रोत, Getty Images
'बाज़ार में बहुत विधायक बाकी हैं'
शनिवार सुबह तक अजित पवार के साथ एनसीपी के 11 विधायक गए थे. अब इनमें से छह विधायक शरद पवार के पास वापस आ गए हैं. इन विधायकों का कहना है कि उन्हें कुछ मालूम नहीं था, उन्हें अचानक पकड़कर राजभवन ले जाया गया.
इस तरह छह विधायकों के जाने के बाद अजित पवार के पास बचे पांच विधायक. अजित पवार के इन पांचों विधायकों को अगर बीजेपी के 119 विधायकों के साथ जोड़ें तो कुल संख्या होती है 124 और बहुमत का आंकड़ा है 145.
ऐसे में बहुमत साबित करने के लिए बीजेपी को 20 और विधायकों की ज़रूरत पड़ेगी.
थोड़ी देर पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता नारायण राणे ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि बाजार में बहुत सारे विधायक बाकी हैं.
इसका मतलब यह है कि बीजेपी यह सोच रही है कि वो बहुमत के लिए एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के अलावा और कहां-कहां से विधायक ला सकती है.
ऐसा लग रहा है कि जैसे कर्नाटक में 'ऑपरेशन कमल' कई चरण में हुआ था, वैसे ही महाराष्ट्र मे भी 'ऑपरेशन कमल' अभी बाकी है.
ये भी पढ़ें: दल-बदल क़ानून क्या है, जिसकी पवार दे रहे हैं दुहाई

इमेज स्रोत, Getty Images
भाजपा के धुरंधर क्या कर रहे होंगे?
देवेंद्र फडणवीस आगे क्या रणनीति अपनाएंगे, इस बारे में अभी कोई अंदाज़ा लगाना मुश्किल है क्योंकि उन्होंने शपथ तो ले ली लेकिन उनके पास उतने विधायक नहीं है.
फ़िलहाल कोई नहीं जानता कि फडणवीस 145 विधायक कहां से लाएंगे.
उन्हें 30 नवंबर को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना है.

इमेज स्रोत, Getty Images
सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
शनिवार तड़के देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के शपथ लेने के बाद कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
तीनों पार्टियों का कहना है कि राज्य में जो कुछ भी हुआ है, असंवैधानिक है. कांग्रेस ने इसे विशेष रूप से चुनौती दी है.
अतीत में पिछले राज्यों में पैदा हुई ऐसी ही परिस्थितियों पर वापस नज़र डालें तो ऐसे में विधानसभा में शक्ति परीक्षण सबसे महत्वपूर्ण साबित हुआ है.
महाराष्ट्र में शक्ति परीक्षण 30 नवंबर को होगा जिसमें अभी छह दिन-छह रातें बाकी हैं. ये रातें ही नहीं बल्कि अगली कई रातें भी महाराष्ट्र पर भारी पड़ने वाली हैं और ऐसा पिछले एक महीने से चलता रहा है.
ईमानदारी से कहें तो जो कुछ हो रहा है, उसकी ठीक-ठीक जानकारी नेताओं और पत्रकारों को भी नहीं है. सारे सूत्र फ़ेल हो गए हैं.
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र में कैसे बदल गया पूरा खेल

इमेज स्रोत, Getty Images
इस राजनीति में अजित पवार कहां खड़े हैं?
एक ज़माने में अजित पवार एनसीपी के बहुत बड़े नेता हुए करते थे. पिछले 10 वर्षों में उन्होंने कई मामलों पर कई बार अपनी नाराज़गी जताई.
धीरे-धीरे पार्टी में उनका कद छोटा होता गया और ऐसा शरद पवार ने जानबूझकर भी किया. चाचा-भतीजे (शरद पवार और अजित पवार) की आपस में नहीं बनती है लेकिन कोई इस बारे में खुलकर बात नहीं करता.
अब अजित पवार ने शपथ तो ले ली है लेकिन उनके पास सिर्फ़ पांच विधायक ही बचे हैं. ऐसे में वो एनसीपी में अलगाव पैदा करके विधायकों को अपने साथ ला पाएंगे, ये मुश्लिक लगता है.
ये भी पढ़ें: क्या अजित पवार ने शरद पवार की पार्टी को तोड़ दिया?

इमेज स्रोत, Getty Images
अमित शाह बनाम शरद पवार
देवेंद्र फडणवीस के शपथ लेने के बावजूद अगर आज महाराष्ट्र में अगर किसी के पास ताकत है तो शरद पवार के पास है.
फिर चाहे वो अलग-अलग पार्टियों के साथ रिश्तों के मामले में हो या फिर संख्याबल के बारे में.
मिशन नाकाम रहा तो क्या होगा?
अगले कुछ दिनों में क्या होगा, अभी इस बारे में ज़्यादा कुछ कहा नहीं जा सकता. यह भी ठीक-ठीक नहीं मालूम कि किस पार्टी के विधायक किसके संपर्क में हैं.
इन सबके बीच एक महत्वपूर्ण बात ये है कि कई लोगों पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की जांच चल रही है, जिसमें अजित पवार और प्रफुल्ल पटेल भी शामिल हैं.
(बीबीसी मराठी सेवा के संपादक आशीष दीक्षित और बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी की बातचीत पर आधारित)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















