अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले अयोध्या में कड़ी सुरक्षा

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को देखते हुए अयोध्या समेत पूरे उत्तर प्रदेश में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
अर्धसैनिक बलों के क़रीब चालीस हज़ार जवान राज्य भर में भेजे गए हैं तो स्कूल कॉलेज अगले दो दिनों तक बंद कर दिए गए हैं. जगह-जगह पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान गश्त भी कर रहे हैं.
हालांकि अयोध्या में धारा 144 और क़ानून व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती पिछले कई दिनों से शुरू हो गई थी, लेकिन शुक्रवार को फ़ैसले की तारीख़ सामने आते ही सतर्कता और सख़्ती दोनों ही बढ़ा दी गई.
फ़ैसले की सूचना के साथ ही सरकार ने सभी स्कूलों और कॉलेजों को एहतियातन 11 नवंबर तक बंद करने के निर्देश जारी कर दिए.
शुक्रवार सुबह ही सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को दिल्ली बुलाकर क़ानून व्यवस्था की जानकारी ली.

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उससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ज़िले के सभी ज़िलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए वस्तुस्थिति की जानकारी ली और क़ानून व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए कई निर्देश भी दिए.
डीजीपी ओ.पी. सिंह ने कहा, "सभी ज़िलों के कप्तानों और ज़िलाधिकारियों को हर स्थिति में शांति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं. हर जगह पुलिस की पैदल पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है. किसी को भी किसी क़ीमत पर क़ानून हाथ में लेने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. किसी को डरने की ज़रूरत नहीं है, पुलिस पर भरोसा रखने को कहा गया है. गड़बड़ी फैलाने की कोशिश करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी."

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सोशल मीडिया पर भी नज़र
सोशल मीडिया पर अफ़वाह फैलाने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं अयोध्या में चप्पे चप्पे पर पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है.
शुक्रवार को अयोध्या में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई. राम जन्मभूमि मंदिर की तरफ जाने वाले सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं. अब वहां से सिर्फ़ पैदल गुज़रा जा सकता है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हर जिले में एक कंट्रोल रूम बनाने और लखनऊ और अयोध्या में दो हेलीकॉप्टर तैयार रखने के आदेश दिए हैं. पूरे यूपी में पुलिस दंगों से निपटने के लिए रिहर्सल कर रही है. अस्थाई जेलें बना दी गई हैं जहां जरूरत पड़ने पर गिरफ्तार लोगों को रखा जा सकेगा. सरकार ने हर ज़िले में शांति समितियों के ज़रिए लोगों से सद्भाव बनाए रखने की अपील भी की है.

इस बीच, ख़बर है कि राज्य भर में कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में भी लिया गया है. केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से अलर्ट रहने और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है. गृह मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश और खासतौर पर अयोध्या में सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों के 4,000 जवानों को भेज दिया है.
पुलिस और प्रशासन से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. रेलवे पुलिस ने भी सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं. उन्हें ट्रेनों की सुरक्षा में तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं.
अयोध्या के सारे प्रमुख मंदिरों के आसपास बड़े पैमाने पर सिक्योरिटी लगा दी गई है. जिन जगहों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है उनमें राम जन्मभूमि कॉम्प्लेक्स, हनुमानगढ़ी, दशरथ महल, कनक भवन, मंदिर निर्माण कार्यशाला राम की पैड़ी, कारसेवक पुरम, सरयू घाट वगैरह शामिल हैं.
हालांकि प्रशासन का कहना है कि इन जगहों पर सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद ज़िंदगी अपनी रफ़्तार से चलेगी. अयोध्या के ज़िलाधिकारी अनुज झा कहते हैं, "शादी-ब्याह का सीजन है. जैसा तय किया है वैसा ही रहेगा. कहीं कोई समस्या आती है तो हम तुरंत समन्वय स्थापित करेंगे. सबके पास हमारे नंबर बंटे हैं. जो भी अप्रोच करेगा, उसकी समस्या का हम समाधान करेंगे.

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राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील इस मामले में शनिवार यानी आज सुप्रीम कोर्ट अपना फ़ैसला सुनाएगा. सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने 16 अक्तूबर को सुनवाई पूरी की थी. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने छह अगस्त से लगातार 40 दिन इस मामले में सुनवाई की थी.
सोशल मीडिया पर किसी भी सम्प्रदाय के ख़िलाफ़ भड़काऊ कंटेंट के प्रसार पर नज़र रखने के लिए ज़िले के 1600 स्थानों पर 16 हज़ार वॉलंटियर तैनात किए गए हैं.
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