करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन, सिखों ने कहा बड़ा लम्हा

करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब

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    • Author, अरविंद छाबड़ा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, डेरा बाबा नानक, गुरदासपुर (पंजाब)

भारत-पाकिस्तान की सीमा पर मौजूद डेरा बाबा नानक में इस समय काफ़ी चहल-पहल है. पंजाब के विभिन्न हिस्सों से महिला, पुरुष और बच्चे गुरुद्वारे के 'दर्शन' के लिए आ रहे हैं जो शनिवार को एक कॉरिडोर के ज़रिए पाकिस्तान में स्थित करतारपुर साहिब गुरुद्वारे से जुड़ने जा रहा है.

जब भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उधर पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अपने-अपने यहां कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे तो वहीं दुनिया के अनगिनत सिखों का बरसों पुराना सपना पूरा हो जाएगा.

तरनतारन से डेरा बाबा नानक आए 65 वर्षीय हरिंदर सिंह कहते हैं, "ये बहुत बड़ा है और इससे बड़ा लम्हा कोई भी नहीं हो सकता है."

"हमने पूरी ज़िंदगी इस लम्हे का इंतज़ार किया है. हम बहुत ख़ुशी महसूस कर रहे हैं."

अमृतसर से आए एक दूसरे श्रद्धालु बलवंत सिंह कहते हैं, "हम गुरु नानक देव से प्रार्थना करते रहे हैं कि वो हमें जीवन में एक बार अपने गुरुद्वारे आने की इजाज़त दें और वो अब आख़िरकार हो रहा है."

पाकिस्तान में मौजूद यह गुरुद्वारा सिखों और दूसरे पंजाबियों के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपनी ज़िंदगी के अंतिम 18 साल यहीं बिताए थे.

सीमा की दोनों तरफ एंट्री पॉइंट के खुलने की शुरुआत गुरु नानक देव के 550वें जन्मदिवस पर हो रही है.

भारत और पाकिस्तान कॉरिडोर को लेकर पहले ही एक समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं जिसके तहत भारतीय तीर्थयात्रियों को गुरुद्वारा आने के लिए पाकिस्तान वीज़ा फ़्री एंट्री देगा.

समझौते के तहत 5,000 भारतीय श्रद्धालु रोज़ाना गुरुद्वारा दरबार साहिब जा सकेंगे.

करतापुर कॉरिडोर
इमेज कैप्शन, करतापुर कॉरिडोर की तैयारियां ज़ोरों पर हैं

भारत का कॉरिडोर 4.1 किलोमीटर लंबा

डेरा बाबा नानक पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में है. कहा जाता है कि गुरु नानक के अनुयायियों ने इस शहर को बनाया और उन्होंने अपने गुरु के नाम पर इसका नाम डेरा बाबा नानक रखा.

डेरा बाबा नानक भारत-पाकिस्तान सीमा से एक किलोमीटर की दूरी पर और रावी नदी के पूर्वी किनारे पर है. नदी के पश्चिम की ओर पाकिस्तान में करतारपुर शहर है. करतारपुर साहिब गुरुद्वारा पाकिस्तान के नारोवाल ज़िले में है जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से 4.5 किलोमीटर दूर है.

भारत के हिस्से में बन रहा डेरा बाबा नानक-श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर 4.1 किलोमीटर लंबा है जो डेरा बाबा नानक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक जाता है. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग बनाई गई है.

नवजोत सिंह सिद्धू

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सिद्धू भी जाएंगे करतारपुर

शनिवार को करतारपुर कॉरिडोर से गुरुद्वारा दरबार साहिब जाने वाले 550 सदस्यों के भारतीय प्रतिनिधिमंडल में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और हरसिमरत कौर बादल शामिल हैं.

इस समारोह में भाग लेने के लिए पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राजनेता नवजोत सिंह सिद्धू को भी भारत सरकार ने अनुमति दे दी है.

विदेश मंत्रालय को तीसरी बार ख़त लिखने के बाद उन्हें यह अनुमति मिली है. उन्होंने कहा था कि अगर सरकार उन्हें जाने की अनुमति नहीं देती है तो वो 'क़ानून का पालन करने वाले एक नागरिक के रूप में' इस समारोह में शामिल नहीं होंगे.

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि अगर केंद्र उनके ख़त का जवाब नहीं देता है तो वो 'पाकिस्तान जाने वाले लाखों सिख श्रद्धालुओं की तरह वैध वीज़ा पर पाकिस्तान जाएंगे.'

श्रद्धालु
इमेज कैप्शन, बारिश ने उद्घाटन समारोह की तैयारियों को नुकसान पहुंचाया है

आख़िरी वक़्त में बारिश से हुआ काम ख़राब

वहीं, आयोजकों को उद्घाटन समारोह के लिए काफ़ी मशक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि अचानक आई बारिश ने सारी तैयारियों को ख़राब कर दिया है.

बारिश ने टेंट से बनाए गए इलाक़े को ख़ासा नुक़सान पहुंचाया जो पंजाब सरकार ने उद्घाटन के लिए तक़रीबन 4 करोड़ रुपये में तैयार किया था.

यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सैकड़ों टेंट और कॉटेज बनाए गए थे.

इसके अलावा लंगर हॉल और दूसरे दफ़्तर बनाए गए थे जो पानी में डूब चुके हैं और कई होर्डिंग उखड़ गए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने शनिवार को होने वाले प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की जगह को बदल दिया है.

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कुछ लोग करतारपुर कॉरिडोर को मानते हैं साज़िश

जहां भारत में कई श्रद्धालु इस कॉरिडोर के बनने से ख़ुश हैं वहीं कुछ मानते हैं कि यह पाकिस्तान की एक 'साज़िश' है.

उद्घाटन से पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बयान जारी किया था, "इसके पीछे आईएसआई का एक नकारात्मक एजेंडा है. हमें इसको लेकर बहुत सतर्क रहना है. एक और वो (पाकिस्तान) हमें सहानुभूति और मानवता दिखाते हैं वहीं दूसरी ओर वो भारत में आईएसआई और ख़ालिस्तान समर्थित सिखों के स्लीपर सेल बनाने का इरादा रखते हैं."

हालांकि, इस जगह पर पंजाब पुलिस के जवान और कमांडो की कड़ी सुरक्षा है और आने-जाने वाले वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध है. इस इलाक़े को एक क़िले में तब्दील कर दिया गया है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है, "पड़ोसी ज़िले अमृतसर से अतिरिक्त पुलिस बल को लाया गया है क्योंकि शनिवार को हज़ारों लोगों के साथ-साथ यहां कई वीवीआईपी लोग आ रहे हैं."

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