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पीएमसी बैंक मामला: '...वो और कितनी मौत चाहते हैं?'
"पीएमसी बैंक में मेरे एक करोड़ रुपये फँसे हुए हैं. बीते 26 साल से पीएमसी बैंक में मेरा अकाउंट है. अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा वापस पाने के लिए मैं अब इस उम्र में सड़क पर विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकती. बुढ़ापे के लिए की गई हमारी बचत को इन लोगों ने छीन लिया है."
ये कहना है पीएमसी बैंक की एक खाताधारक अनीता लोहिया का.
पीएमसी बैंक पर लगाई गई पाबंदियों से अनीता समेत 15 लाख से ज़्यादा ग्राहक प्रभावित हुए हैं. ये सभी अब सुप्रीम कोर्ट से कुछ राहत पाने की आस लगाए हैं. कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को हो सकती है.
खाताधारकों का दावा है कि पैसे गँवाने के दबाव के चलते अब तक कम से कम तीन खाताधारकों की मौत हो चुकी है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे लेकर कुछ नहीं कहा गया है. खाताधारक का कहना है कि वो इस मामले में जल्दी से जल्दी राहत चाहते हैं.
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
बैंक में जमा राशि पर बीमा कवर सिर्फ़ एक लाख रुपये तक ही मिलता है. सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल याचिका के ज़रिए पीएमसी खाताधारकों ने सौ फ़ीसदी कवर दिए जाने की माँग की है.
इस मामले में मुंबई के एक कोर्ट के आदेश पर पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक के पूर्व चेयरमैन वार्याम सिंह, हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) के डायरेक्टर राकेश वाधवान और सारंग वाधवान को 23 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.
'नो नोट- नो वोट'
कोर्ट में जब इस मामले की सुनवाई हो रही थी तब नाराज़ खाताधारक अदालत के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. प्रदर्शनकारी अपना पैसा जल्दी से जल्दी लौटाने की मांग कर रहे थे. बैंक में पैसा जमा करने वालों ने ये धमकी भी दी कि अगर उन्हें उनके पैसे वापस नहीं मिले तो वो विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डालेंगे.
बैंक की एक खाताधारक अनीता लोहिया भी प्रदर्शन में मौजूद थीं. उनके इस बैंक में एक करोड़ रुपये जमा हैं.
उन्होंने कहा, "मैं वरिष्ठ नागरिक हूं. बैंक में एक घोटाला हुआ है. आरबीआई (भारतीय रिज़र्व बैंक) इसके लिए ज़िम्मेदार है. वो कह रहे हैं कि हमें एक लाख रुपये दिए जाएंगे. क्या हम भिखारी हैं? ये हमारा पैसा है और अब वो कह रहे हैं कि वो हमें दस हज़ार या एक लाख या ऐसा ही कुछ देंगे. सरकारी अधिकारी चुनाव में व्यस्त हैं. अगर हमें हमारा पैसा नहीं मिला तो हम वोट नहीं देंगे. नो नोट, नो वोट."
'रात भर सो नहीं पाते हैं'
खाताधारकों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई पीएमसी बैंक में जमा की थी. वो मौजूदा हालात को लेकर काफ़ी ग़ुस्से में है. उन्हें इस बात को लेकर नाराज़गी है कि ज़रूरत होने पर भी वो अपना ही पैसा इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं.
पीएमसी के खाताधारक अमरजीत ने कहा, "तमाम साल काम करने के बाद मैंने बैंक में कुछ पैसे की बचत की थी. हाल में मेरे हाथ का ऑपरेशन हुआ है. मुझे इसके लिए डेढ़ लाख रुपये की ज़रूरत थी. बैंक में मेरी बचत के रुपये होने के बाद भी मुझे ऑपरेशन के लिए क़र्ज़ लेना पड़ा. वो मेरा पैसा कब लौटाएंगे? जीवनभर की बचत बैंक में फँसी है और मैं बेचैनी की वजह से रात भर सो नहीं पाता हूं."
न्याय की मांग
जित्सु सेन का पीएमसी बैंक में 20 साल से खाता है. उनके बैंक में 20 लाख रुपये फँसे हुए हैं. वो कहती हैं कि रक़म चाहे कम हो या ज़्यादा सभी को उनका पैसा वापस मिलना चाहिए.
वो कहती हैं, "मेरे 20 लाख रुपये इस बैंक में फँसे हुए हैं. लेकिन, अगर किसी के सिर्फ़ दस रुपये बैंक में जमा हैं तो उस व्यक्ति को भी पैसे वापस मिलने चाहिए. आज की तारीख़ तक पैसे गँवाने के तनाव की वजह से तीन या चार लोग अपनी जान गँवा चुके हैं. वो कितनी और मौत चाहते हैं? ये सारी आरबीआई की ग़लती है."
उन्होंने आगे कहा, "बैंक के कामकाज के लिए आचार संहिता की हमें क्यों ज़रुरत है? ये लोग अपनी रैली में कहते हैं कि वो चुनाव के बाद पैसे देंगे. लेकिन, प्रधानमंत्री को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जो इस बीच जान गँवा सकते हैं. इन सभी मौत के लिए आरबीआई दोषी है. हमें न्याय मिलना चाहिए."
सरकार ने क्या कहा?
इस बीच मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने कहा कि वो पीएमसी बैंक का मुद्दा केंद्र सरकार के सामने उठाएंगे और बैंक में पैसे जमा करने वाले सभी लोगों की रक़म वापस दिलाने के लिए केंद्र सरकार की मदद मांगेंगे.
गृह मंत्री अमित शाह ने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि पीएमसी बैंक के 80 फ़ीसदी खाताधारकों को उनका पैसा वापस मिलेगा.
पीएमसी बैंक में पैसे जमा करने वाले लोगों के एक समूह ने मुंबई के पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे से मुलाक़ात की और अपनी तकलीफ़ों की जानकारी दी.
प्रत्यर्पण निदेशालय (ईडी) ने जानकारी दी है कि उन्होंने एचडीआईएल कंपनी निदेशकों, प्रमोटरों, पीएमसी अधिकारियों और पीएमसी बैंक घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की सपंत्तियां ज़ब्त की हैं. इनकी क़ीमत 3830 करोड़ रुपये से ज़्यादा है.
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