यूपी: दिवाली से पहले 25,000 होमगार्डों के घर छाया अंधेरा

उत्तर प्रदेश होमगार्ड

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    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या में भले ही करोड़ों रुपये ख़र्च करके इसी महीने भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम करने जा रही हो लेकिन राज्य के 25,000 होमगार्ड जवानों के घरों पर दिवाली से पहले ही अंधेरा छा गया है.

सरकार ने एक आदेश जारी कर इन जवानों की सेवा समाप्त करने का फ़ैसला किया है.

पुलिस मुख्यालय में अपर पुलिस महानिदेशक बीपी जोगदंड ने इस संबंध में आदेश जारी किया है.

हालांकि इस मामले को तूल पकड़ता देख राज्य के होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी जवान को बेरोज़गार नहीं होने दिया जाएगा और सरकार कोई न कोई रास्ता ज़रूर निकालेगी.

होमगार्ड के ये पचीस हज़ार जवान ज़िला मुख्यालयों में क़ानून व्यवस्था संभालने में पुलिस की मदद करने के लिए लगे हुए थे.

एडीजी बीपी जोगदंड ने बीबीसी को बताया कि ये शासन का आदेश है लेकिन इसके पीछे वजह क्या है, इसका जवाब देने के लिए यूपी का कोई भी ज़िम्मेदार अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है. लेकिन माना ये जा रहा है कि इसके पीछे अपर्याप्त बजट एक बड़ा कारण है.

एडीजी बीपी जोगदंड का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है बल्कि अक़्सर होता रहता है.

उन्होंने कहा, "होमगार्ड कोई स्थायी पुलिसकर्मी तो हैं नहीं. वो एक स्वयंसेवक के तौर पर काम करते हैं और सरकार उन्हें उसका भुगतान करती है."

"जब उनकी ज़रूरत पड़ती है तो होमगार्ड विभाग से उन्हें बुला लिया जाता है और जब ज़रूरत नहीं रहती है तो वापस भेज दिया जाता है. अक़्सर चुनावी ड्यूटी या फिर कुंभ इत्यादि जैसे मौक़ों पर बड़ी संख्या में ये जवान बुलाए जाते हैं."

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फ़ैसले पर उठते कई सवाल

राज्य सरकार के इस फ़ैसले से एक ही झटके में पचीस हज़ार होमगार्ड जवान तो बेरोज़गार हो ही गए हैं आने वाले दिनों में कई त्योहार को देखते हुए इनकी सेवाएं समाप्त करने का समय भी सवालों के घेरे में है.

सरकार के आदेश के मुताबिक़ इसी साल अप्रैल महीने से ज़िलों में पुलिस विभाग के सहयोगी की भूमिका निभा रहे होमगार्ड के जवानों के लिए ये आदेश जारी हुआ है.

उत्तर प्रदेश में होमगार्ड के जवान क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस के सहयोगी बनते हैं और थानों से लेकर ट्रैफ़िक चौराहों तक पर अपनी ड्यूटी निभाते हैं. इसके अलावा अधिकारियों के साथ उनके अंगरक्षक के तौर पर भी इनकी सेवाएं ली जाती हैं.

अचानक इन जवानों को हटाने के पीछे क्या वजह है, इस बारे में राज्य सरकार के गृह विभाग या फिर पुलिस विभाग का कोई भी अधिकारी बतानें को तैयार नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने होमगार्ड के जवानों को भी पुलिस के जवानों की तरह पांच सौ रुपये की बजाय 672 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय देने का जो निर्देश दिया था वो राज्य के क़रीब एक लाख जवानों को देना सरकार पर भारी पड़ रहा था.

योगी आदित्यनाथ

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उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिदेशक रह चुके रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एके जैन कहते हैं, "सुप्रीम कोर्ट का जब आदेश आया, तब तक बजट आ चुका था. ऐसे में इस अतिरिक्त धनराशि का इंतज़ाम किस मद से किया जाए, ये भी एक समस्या होती है. ज़ाहिर है, इसके लिए अलग से प्रावधान करना पड़ता है. हो सकता है कि आने वाले दिनों में सरकार ऐसा कोई प्रावधान करे और तब इन्हें फिर समायोजित किया जा सके."

हालांकि जानकारों के मुताबिक़ यह अतिरिक्त धनराशि इतनी बड़ी नहीं थी कि इसे किसी अन्य मद से समायोजित न किया जा सके. सरकार ने ये आदेश भले ही अब जारी किया है लेकिन इसका फ़ैसला क़रीब डेढ़ महीने पहले ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में लिया जा चुका है.

हज़ारों परिवारों पर गहराया आर्थिक संकट

पचीस हज़ार इन जवानों के सामने न सिर्फ़ रोज़ी रोटी का संकट आ गया है बल्कि सालों से यहीं काम करने के चलते किसी दूसरी जगह कोई काम मिलने का भी संकट है.

लखनऊ में तैनात होमगार्ड के एक जवान से हमने बात की जो पिछले आठ साल से विभाग में सेवा दे रहे हैं और सरकार के इस आदेश से उनकी सेवा भी समाप्त हो चुकी है. वो कहते हैं, "अचानक बतया गया कि अब आप लोगों की सेवाएं समाप्त हो गई हैं. अब हमारे सामने मज़दूरी के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है. ज़्यादातर लोगों के यहां यही जवान अकेले कमाने वाले हैं. क्या होगा आगे, कुछ पता नहीं."

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उत्तर प्रदेश में होमगार्ड के कुल स्वीकृत पद एक लाख 18 हजार हैं जिसमें से खाली पदों की संख्या उन्नीस हज़ार है. पचीस हज़ार जवानों की सेवा समाप्त होने के बाद उन सेवाओं पर भी असर पड़ेगा जहां इन जवानों की सेवाएं नियमित रूप से ली जाती थीं.

दरअसल, पुलिस विभाग के सिपाही के बराबर होमगार्ड का वेतन देने का फैसला होमगार्डों के लिए मुसीबत का सबब बन गया. जानकारों के मुताबिक, बढ़े हुए मानदेय की वजह से पुलिस महकमे ने तय किया है कि वह होमगार्ड के जवानों से काम ही नहीं लेगा.

सरकार ने उन्हीं पचीस हज़ार होमगार्ड के जवानों की सेवाएं समाप्त करने का फ़ैसला लिया है जिन्हें एक साल पहले गृह विभाग ने सिपाहियों के रिक्त पदों के स्थान पर लिया था.

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यही नहीं, होमगार्ड के जवानों को हर दिन की ड्यूटी के हिसाब से पैसा मिलता है. यानी 25 दिन काम करने पर उन्हें महीने में क़रीब 12,500 रुपये मिलते. लेकिन सरकार ने अब ड्यूटी के दिनों को भी घटाकर 15 दिन कर दिया है जिसके अनुसार अब उन्हें सिर्फ़ दस हज़ार रुपये ही मिल सकेंगे.

इसके अलावा प्रदेश भर में क़रीब नौ हज़ार होमगार्ड के जवान सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में भी लगे हुए हैं जहां पहले प्राइवेट सिक्योरिया गार्ड ड्यूटी करते थे.

बताया जा रहा है कि अब यहां दोबारा प्राइवेट गार्ड्स की तैनाती करने की तैयारी हो रही है.

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