पटना में बारिश रुकी, पर जमा पानी कहाँ जाएगा?

पटना बारिश

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    • Author, नीरज प्रियदर्शी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए पटना से

पिछले पांच दिनों से बिहार में लगातार हो रही बारिश के बीच वज्रपात, करेंट लगने और पानी में डूबने से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है. सबसे बुरा हाल राजधानी पटना का है जहाँ अब तक आठ लोगों के मरने की ख़बर है.

पटना की सड़कों पर शनिवार से ही नावें चलनी लगी थीं. रविवार को भी दिनभर लगातार तेज बारिश होती रही. अब वर्षा का पानी शहर के सभी मुहल्लों में फैल गया है.

निचले इलाक़े जैसे कंकड़बाग, राजेंद्र नगर, पटना सिटी जलमग्न हैं. रविवार तो पटना में बीते 24 घंटों के दौरान 116 मिलीमीटर बारिश हुई है. शनिवार तक यह रिकार्ड पहले से 205 मिमी था.

वैसे तो पिछले 12 घंटों से बारिश रुकी है. मगर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक सोमवार को भी शहर में रेड अलर्ट है.

बारिश थमने को बाद लोगों को उम्मीद है कि जलजमाव कम होगा. मगर चिंता इस बात की है कि शहर में जमा पानी जाएगा कहां.

पटना से सटी सारी नदियाँ गंगा, पुनपुन, गंडक, सोन पहले से उफान पर हैं. जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है. पानी के दबाव के कारण ड्रेनेज सिस्टम फेल हो चुका है.

नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा ने कल शहर के पंप हाउसों का जायजा लेने के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर बारिश थम जाती है तो 48 घंटे के दौरान शहर से पानी निकाल दिया जाएगा. मगर इस सवाल पर कि पानी निकाल कर कहां छोड़ा जाएगा इसका वे जवाब नहीं दे सके.

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कल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बारिश से उपजे हालात के कारण सभी विभागों के अधिकारियों के साथ आपात बैठक की.

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक संभावित सूखे से निपटने की तैयारी कर रही सरकार के लिए बारिश चुनौती बन गई है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी कल यह बात स्वीकार करनी पड़ी. उन्होंने इसका कारण जलवायु परिवर्तन को बताते हुए कहा, "हमलोग सूखे का अनुमान लगा रहे थे. लेकिन इतनी बारिश हो गई. नेचर के आगे किसी का नहीं चलता. लोगों को हौसला बुलंद रखना होगा."

सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार के इस बयान की यह कहकर आलोचना की जा रही है कि सुशासन की सरकार बारिश से निपटने की प्लानिंग भी नहीं कर सकी.

हालांकि मुख्यमंत्री अब यह जरूर कहते हैं कि आपदा और प्रबंधन विभाग पूरी तरह मुस्तैद है. हरसंभव राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं.

लेकिन पटना की एक बड़ी आबादी अभी भी अपने घरों में फंसी है. कई घरों के ग्राउंड फ्लोर पर पानी है.

कंकड़बाग, राजेन्द्र नगर, पाटलिपुत्र कॉलोनी, पटना सिटी के कई इलाकों में सड़कों पर सीने भर तक पानी जम गया है. सबसे अधिक दिक्कत छात्राओं और महिलाओं को हो रही है.

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कंकड़बाग की रहने वाली छात्रा शाम्भवी वत्स कहती हैं, "पुरुष तो घर के बाहर निकल भी जा रहे हैं. मगर महिलाएँ उनसे अपेक्षाकृत कम हाइट की होती हैं. हमारे लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल है. मेरी कई दोस्त जो हॉस्टल और पीजी में यहाँ रहती थीं, उनको सबसे अधिक दिक्कत है. पीने का पानी नहीं है, खाने का खाना नहीं है और हॉस्टल के मालिक लोग हॉस्टल, पीजी खाली करने को बोल चुके हैं. वे अब किसी तरह घर जाने को मजबूर हैं."

राजेंद्र नगर के एक छात्र सोमू आनंद और उनके जैसे कई छात्रों के हॉस्टल, किराए के घर खाली हो गए हैं. सीने भर तक पानी लाँघकर अपने घर से आए. लेकिन ये युवा अब राहत और बचाव कार्य में लग गए हैं.

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वे कहते हैं, "हमलोग किसी तरह बाहर आ पाए हैं. हमें पता है बहुत से लोग फंसे हैं. लेकिन जो राहत और बचाव कार्य प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे हैं वे नाकाफी हैं. सिर्फ दो बोट कल उतारे गए थे. हमलोगों ने आज एक प्राइवेट बोट किराए पर किया है. साथ में चलने के लिए कुछ तैराकों को भी तैयार किए हैं."

राहत और बचाव कार्य के इंतजामों पर पटना डीएम कुमार रवि कहते हैं, "हम अपने स्तर से हर प्रयास कर रहे हैं. शहर के सभी प्राइवेट और निजी स्कूलों को कैंप बना दिया गया है. हम इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि जो लोग बुरी तरह फंस गए हैं उनके लिए सेना की मदद ली जाए. क्विक रिस्पांस टीम 24 घंटे एक्टिव है."

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पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एपी शाही ने भारी बारिश और जलजमाव को देखते हुए सोमवार को पब्लिक हॉलीडे घोषित करने का आदेश दिया है.

रविवार की रात से बारिश फिलहाल थमी है. लेकिन मौसम विभाग के पूर्वानुमान डराने वाले हैं. अगले 24 घंटों के लिए पटना समेत समूचे पूर्वी बिहार में रेड अलर्ट जारी किया गया है.

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