पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने सार्क बैठक में जयशंकर का किया बहिष्कार: प्रेस रिव्यू

शाह महमूद क़ुरैशी

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पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी गुरुवार को तब तक सार्क विदेश मंत्रियों की बैठक में नहीं गए जब तक भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर वहां मौजूद रहे.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ जयशंकर जब बैठक स्थल से चले गए तब क़ुरैशी आए और कहा, "आपको लगता है मैं कश्मीर के कसाई के साथ बैठूंगा?"

जयशंकर ने पाकिस्तान को बेहद चुनौतीपूर्ण पड़ोसी बताया. उन्होंने कहा कि 'भारत ऐसे पड़ोसी से बात नहीं कर सकता जो आतंकवाद को हथियार बनाता है.'

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना दोबारा शुरू करने का सवाल ही नहीं है.

पाक विदेश मंत्री ने सार्क बैठक में जयशंकर का किया बहिष्कार, भारत ने कहा ड्रामा

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मध्यप्रदेश: दलित परिवार ने गांव छोड़ने का फ़ैसला किया

द हिंदू की ख़बर के अनुसार, खुले में शौच कर रहे बच्चों के पीट-पीटकर मारे जाने के बाद दलित परिवार ने गांव छोड़ने का फ़ैसला किया है.

बच्चे के पिता बबलू वाल्मीकि को डर है कि अब उनपर भी हमला हो सकता है.

पाक विदेश मंत्री ने सार्क बैठक में जयशंकर का किया बहिष्कार, भारत ने कहा ड्रामा

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उन्होंने कहा, "पंचायत ने सभी के लिए शौचालय बनाया, लेकिन हमारे लिए नहीं बनाया. जब मुझे बताया गया कि मैं एक घर और एक शौचालय का पात्र हूं तो मैंने दोनों के लिए आवेदन किया. मगर बताया गया कि मेरा आवेदन अस्वीकार कर दिया गया."

बबलू के 10 साल के बेटे और 12 साल की बेटी को कथित तौर पर सिर्फ़ इसलिए पीट-पीटकर मार दिया गया था क्योंकि वो खुले में शौच कर रहे थे.

'एनआरसी लिस्ट से बाहर हुए लोग कर सकेंगे मतदान'

चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि एनआरसी लिस्ट में जिन लोगों का नाम नहीं आया है, उन्हें 'डाउटफ़ुल' नहीं कहा जाएगा.

डाउटफ़ुल या डी वोटर्स, मतदाताओं का एक वर्ग है जिनकी नागरिकता को लेकर अनिश्चितता या विवाद है.

गुवाहाटी स्थित एनआरसी का दफ्तर

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1997 में चुनाव आयोग ने असम की वोटर लिस्ट में संशोधन के समय ये वर्ग जोड़ा था. डाउनटफ़ुल वोटर तब तक वोट नहीं कर सकते थे जब तक कि विदेशी ट्राइब्यूनल उनके मामले का फ़ैसला नहीं कर देता.

इस बार के लोकसभा चुनाव में क़रीब 1.2 लाख डी वोटर्स ने मतदान नहीं किया था. हालांकि जो लोग एनआरसी ड्राफ्ट से बाहर हैं उन्हें वोट करने का अधिकार होगा.

इस बीच इंडियन एक्सप्रेस में ही ख़बर है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इनकार के बावजूद राज्य में एनआरसी को लेकर डर का माहौल है.

तारीख़ पर तारीख़ अब और नहीं: सुप्रीम कोर्ट

अयोध्या भूमि विवाद मामले की सुनवाई कर रही संविधान पीठ ने हिंदू एवं मुस्लिम पक्षकारों से कहा कि वे दलीलें पूरी होने की समयसीमा बताएं और 18 अक्तूबर के बाद एक भी अतिरिक्त दिन नहीं दिया जाएगा.

जनसत्ता अख़बार के अनुसार प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा कि यदि हम इस मामले में चार हफ़्ते में फ़ैसला सुना देते हैं तो यह अद्भुत होगा.

तारीख पर तारीख अब और नहीं: सुप्रीम कोर्ट

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अदालत ने मुस्लिम पक्षकार से कहा कि वे एएसआई रिपोर्ट पर अपनी दलीलें दिन में ही पूरी करें. अदालत ने कहा कि अक्तूबर में छुट्टियां हैं और चार हिंदू पक्षकारों के केवल एक वकील को जवाबी दलीलें देने की अनुमति दी जाएगी.

इस बीच, अयोध्या भूमि विवाद मामले में मुस्लिम पक्षकारों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की 2003 की रिपोर्ट के लेखकीय दावे पर साल करने को लेकर गुरुवार को यू टर्न लिया और मामले में सुप्रीम कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए माफ़ी मांगी.

तमिलनाडु विश्वविद्यालय में गीता अनिवार्य, विवाद

अन्ना विश्विद्यालय के एक फ़ैसले को लेकर विवाद हो गया है. विश्वविद्यालय में बी-टेक और पोस्ट ग्रैजुएशन इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए भागवत गीता, उपनिषद और संस्कृत अनिवार्य कर दी गई है.

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार के मुताबिक़ ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ़ टेक्निकल एजुकेशन द्वारा निर्धारित 'मॉडल पाठ्यक्रम' के तहत ऐसा किया गया है.

तमिलनाडु विश्वविद्यालय में गीता अनिवार्य, विवाद

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हाल में हिंदी दिवस के मौके पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बयान दिया था कि पूरे देश एक भाषा होनी चाहिए. उन्होंने कहा था कि देश को एकजुट करने का काम अगर कोई भाषा कर सकती है तो वह हिन्दी है. उनके इस बयान पर काफ़ी विवाद हुआ था.

ताज़ा मामले के बाद एक बार फिर विपक्ष बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को निशाने पर ले रहा है.

डीएमके, लेफ्ट जैसी पार्टियों ने इस कदम का विरोध किया है और इसे 'शिक्षा के भगवाकरण' की एक और कोशिश बताया है.

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