प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ अमरीका में हुई नारेबाज़ी का फ़र्ज़ी वीडियो

    • Author, फ़ैक्ट चेक टीम
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

सड़कों पर प्रदर्शन करती उग्र भीड़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि 'अमरीका में पीएम नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी हुई, पर मीडिया ने इसे नहीं दिखाया'.

क़रीब तीन मिनट के इस वीडियो में कई समुदायों के लोग पीएम मोदी के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते दिखते हैं.

फ़ेसबुक पर बहुत से लोगों ने यह वायरल वीडियो इस दावे के साथ पोस्ट किया है कि ये अमरीका के ह्यूस्टन शहर का वीडियो है जहाँ 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम आयोजित किया गया था.

यह बात सही है कि ह्यूस्टन शहर में एनआरजी स्टेडियम के बाहर कुछ संगठनों ने 22 सितंबर 2019 को नरेंद्र मोदी और डोनल्ड ट्रंप के कार्यक्रम के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था और पीएम मोदी के ख़िलाफ़ काफ़ी नारेबाज़ी हुई थी.

बीबीसी ने इस प्रदर्शन पर उसी दिन एक वीडियो रिपोर्ट छापी थी जिसे आप देख सकते हैं.

लेकिन अमरीका में हुए इन प्रदर्शनों का बताकर सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, वो यूके के लंदन शहर में हुए प्रदर्शनों के कुछ पुराने वीडियो को जोड़कर बनाया गया है.

अपनी पड़ताल में हमने पाया कि इनमें से तीन वीडियो साल 2018 और एक वीडियो साल 2015 का है.

पहला वीडियो

वायरल वीडियो की शुरुआत में दिखने वाला वीडियो यूके के लंदन शहर में हुए प्रदर्शन का है.

इस वीडियो को 'न्यूज़ फ़्लेयर डॉम कॉम' नाम की वेबसाइट से लिया गया है. वेबसाइट के अनुसार यह वीडियो लंदन के 'पारलियामेंट स्क्वेयर' के क़रीब 18 अप्रैल 2018 को हुए प्रदर्शन का है.

वेबसाइट के मुताबिक़ लंदन में भारतीय मूल के लोगों ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ ज़िले में 8 साल की नाबालिग़ बच्ची के रेप और हत्या से नाराज़ होकर पीएम मोदी के ख़िलाफ़ ये प्रदर्शन किया था.

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार मोदी 16 से 20 अप्रैल 2018 के बीच तीन देशों (स्वीडन, यूके और जर्मनी) की यात्रा पर थे और जिस दिन ये प्रदर्शन हुए यानी 18 अप्रैल 2018 को ही पीएम मोदी दो दिन की यात्रा के लिए यूके पहुँचे थे.

दूसरा वीडियो

वायरल वीडियो का दूसरा हिस्सा 'गो न्यूज़ 24/7 इंडिया' नाम के यू-ट्यूब पेज से लिया गया है.

इस वीडियो को भी 18 अप्रैल 2018 को ही यू-ट्यूब पर अपलोड किया गया था. ओरिजनल वीडियो में दोनों पक्ष दिखाये गए थे.

वीडियो में दिखता है कि कुछ लोग मोदी की यूके यात्रा का विरोध कर रहे हैं. जबकि लोगों का एक अन्य समूह यूके में पीएम मोदी के आगमन का स्वागत कर रहा है.

वायरल वीडियो में अप्रैल 2018 के इस वीडियो का सिर्फ़ एक हिस्सा दिखाया जा रहा है जिसमें मोदी-विरोधी नारे लगाते लोग दिखाई देते हैं.

तीसरा वीडियो

वायरल वीडियो का तीसरा हिस्सा 'धाकड़ ख़बर' नाम के यू-ट्यूब चैनल से लिया गया है जिसे 21 जनवरी 2018 को अपलोड किया गया था.

चैनल के अनुसार ये वीडियो लंदन में पीएम मोदी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते लोगों का है. ओरिजनल वीडियो के साथ चैनल ने लिखा है, "देश ही नहीं, अब विदेशों में भी होने लगे मोदी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन."

यू-ट्यूब चैनल पर यह वीडियो दो लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.

इस वीडियो में लोग भारत में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हो रही घटनाओं के लिए मोदी सरकार की आलोचना करते हैं.

लेकिन इस वीडियो को अब 'अमरीका में मोदी विरोधी प्रदर्शन' बताकर शेयर किया जा रहा है.

चौथा और अंतिम वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का अंतिम हिस्सा समाचार एजेंसी एएफ़पी के चार साल पुराने वीडियो से लिया गया है.

एजेंसी ने 12 नवंबर 2015 को अपने आधिकारिक यू-ट्यूब चैनल पर यह वीडियो अपलोड किया था.

एजेंसी के अनुसार 500 से ज़्यादा सिखों ने लंदन की डाउनिंग स्ट्रीट (यूके के प्रधानमंत्री का कार्यालय) पर मोदी की यूके यात्रा के विरोध में प्रदर्शन किया था. मोदी उस समय यूके के दौरे पर थे.

इस प्रदर्शन में भारतीय मूल के सिखों के साथ-साथ लंदन में रह रहे नेपाल के लोगों ने भी हिस्सा लिया था. नेपाल के लोगों की शिकायत थी कि मोदी ने नेपाल को जाने वाले रास्ते बंद करके उनके देश की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

तीन तरफ़ से भारत और एक तरफ़ चीन से घिरा नेपाल तेल, दवाओं और अन्य ज़रूरी सामानों की आपूर्ति के लिए पूरी तरह भारत पर निर्भर रहा है.

लेकिन वर्ष 2015 में भारत सरकार ने भारत-नेपाल सीमा पर अघोषित आर्थिक नाकेबंदी कर नेपाल में ईधन संकट पैदा कर दिया था.

बहरहाल, मोदी विरोध में किये गए धरने-प्रदर्शनों के ये चारों वीडियो पुराने हैं. लेकिन इन सभी को जोड़कर एक वीडियो बनाया गया है जिसे सोशल मीडिया पर अमरीका का बताकर शेयर किया जा रहा है.

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