You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कश्मीर में तीन सूत्रीय फ़ॉर्मूले पर काम कर रही है सरकार
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
पाँच अगस्त को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को ख़त्म किए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में बीते डेढ़ महीने से प्रशासन लगातार हालात को सामान्य करने का प्रयास करता रहा है.
नुक़सान को बहुत हद तक रोका गया है. अब जो बातें हो रही हैं गवर्नर से लेकर पुलिस प्रशासन तक उससे तीन फ़ॉर्मूले निकल कर सामने आ रहे हैं.
क्या हैं ये तीन फ़ॉर्मूले?
पहला फ़ॉर्मूला, बड़ी संख्या में कश्मीरी युवाओं को नौकरियां दी जाएंगी लेकिन इनमें अधिकतम नौकरियां आर्म्ड फ़ोर्सेज यानी बीएसएफ़, सीआरपीएफ़, सीआईएसएफ़, एसएसबी और सेना में दी जाएंगी.
इसके लिए बाक़ायदा मुहिम छेड़ी जाएगी. पहले चरण में दो हज़ार कश्मीरियों को सेना में भर्ती कराया जाना है.
दूसरा फ़ॉर्मूला, सर्दियों में यहां ट्रांसमिशन लाइनें बहुत ख़राब हो जाती हैं. सर्दियों में यहां की आवश्यकता के मुताबिक़ बिजली का उत्पादन नहीं हो पाता है.
इसलिए केंद्र सरकार के बिजली मंत्रालय ने 10 हज़ार करोड़ के लागत के कई प्रोजेक्ट एक साथ शुरू करने की घोषणा की है. कहा गया है कि उनको फ़ास्ट ट्रैक आधार पर शुरू किया जाएगा और वो दिन दूर नहीं जब कश्मीर में चौबीसों घंटे बिजली मुहैया कराई जाएगी.
तीसरा फ़ॉर्मूला, पुलिस प्रशासन का कहना है कि बीते 45 दिनों में उन्होंने 24 चरमपंथियों को गिरफ़्तार किया है.
डीजीपी ने यह बात ज़ोर देकर कही है कि वो ऐसे लोगों की पहचान कर रहे हैं जो लोगों को डराते हैं कि वो बाहर न निकलें और दुकानदारों या कामर्शियल वाहनों को चलाने वालों को धमकियां देते हैं. उनकी पहचान कर उन्हें गिरफ़्तार किया जाएगा, उन पर मुक़दमे चलाए जाएंगे.
इन तीनों फ़ॉर्मूले पर एक साथ काम चल रहा है और प्रशासन को इस बात की आशा है कि बहुत जल्दी स्थिति पटरी पर आ जाएगी.
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर
पिछले कुछ दिनों के दौरान केंद्र सरकार के कई मंत्रियों ने ये बातें कहीं कि मसला अब कश्मीर का नहीं बल्कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का है.
इस तरह के बयानों पर जब कश्मीर में राजनीति सक्रिय थी तब भी इस पर नपे तुले स्तर पर ही प्रतिक्रिया होती थी. आज इसके समर्थक नेता हों या अलगाववादी नेता सभी बंद हैं और उनकी तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है. तो ज़ाहिर है इस मसले पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आएगी.
लेकिन एक प्रतिक्रिया ठोस तौर पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक की तरफ़ से आई है.
उन्होंने कहा है कि ताक़त या फ़ोर्स के बल पर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर को हासिल करने के बजाए ऐसा किया जाए कि भारत प्रशासित कश्मीर में विकास कार्यों की एक मुहिम छेड़ी जाए और इतनी तरक़्क़ी हो कश्मीर में कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहने वाले लोग ख़ुद ये कहें कि वो भारत से मिलना चाहते हैं.
तो एक तरह का यह लचीला आग्रह है लेकिन साथ ही उन्होंने इस बात का खंडन भी नहीं किया जो केंद्रीय स्तर पर कहा जाता है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर को हासिल करना है. राज्यपाल ने उसका ज़िक्र न करते हुए ये बातें कहीं.
भारत प्रशासित कश्मीर और भारत प्रशासित लद्दाख़ में जो तरक़्क़ी होगी उससे एक दिन ज़रूर आएगा कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के लोग ख़ुद कहेंगे कि उन्हें भारत के साथ रहना है.
(बीबीसी संवाददाता शकील अख़्तर से बातचीत पर आधारित)
ये भी पढ़ें:
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)