पूर्व चीनी सैनिक वांग छी को मिला भारत का वीज़ा

वांग छी
    • Author, विनीत खरे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत में 54 साल फंसे रहने के बाद 2017 में आख़िरकार चीन पहुंचने वाले पूर्व चीनी सैनिक वांग छी को अब भारत आने के लिए वीज़ा मिल गया है.

वांग छी के बेटे विष्णु ने बताया कि उनके पिता को दो सितंबर 2019 से लेकर एक मार्च 2020 तक का- छह महीने का मल्टीएंट्री वीज़ा मिला है.

विष्णु कहते हैं, "मेरे पिता ख़ुश हैं और मैं भी उनके लिए ख़ुश हूं. हमें छह महीने बाद फिर से वीज़ा के लिए अप्लाई करना होगा. हम भारत सरकार से गुज़ारिश करेंगे कि उन्हें कम से कम पाँच साल का मल्टीएंट्री वीज़ा दिया जाए ताकि उन्हें बार-बार बीजिंग न जाना पड़े. बीजिंग उनके गाँव से क़रीब एक हज़ार किलोमीटर दूर है. इससे पहले उनहें एक साल की अवधि का वीज़ा दिया जाता था लेकिन इस बार इसकी अवधि आधी कर दी गई है."

वांग छी का कहना है कि वो अपने परिवार के बारे मैं चिंतित थे लेकिन अब वीज़ा मिलने के बाद उन्हें अच्छा लग रहा है.

उन्होंने कहा, "बीते छह महीनों से मैं अपने परिवार के बारे में सोच-सोच कर परेशान था. लेकिन अब मुझे अच्छा लग रहा है. भारत पहुँचने के बाद मैं भारतीय सरकार से पूछूंगा कि उन्होंने मुझे कम अवधि का वीज़ा क्यों दिया है. मैं उनसे गुज़ारिश करूंगा कि वो मुझे लंबी अवधि के लिए वीज़ा दें."

वांग छी अपने भारतीय परिवार से मिलने भारत आना चाहते थे लेकिन चार महीनों से ज़्यादा इंतज़ार के बाद भी उन्हें बीज़िंग स्थित भारतीय दूतावास से वीज़ा नहीं मिल पा रहा था.

उनके बेटे, दो बेटियां, पोता-पोती मध्य प्रदेश के तिरोड़ी में रहते हैं. साल 2017 में उनके चीन जाने के कुछ महीनों बाद ही उनकी पत्नी सुशीला की मौत हो गई थी.

चीन में भारत आने के लिए वीज़ा पाने की कोशिश कर रहे वांग छी का कहना है कि दूतावास की ओर से उन्हें साफ़ जवाब नहीं मिल रहा था जिस कारण वो ग़ुस्से में थे.

उनके परिवार के कहना है कि वीज़ा मिलने के बाद अब वो वांग छी के लिए टिकटें बुक कर रहे हैं.

वांग छी

वांग छी के मुताबिक़ साल 1963 में वो ग़लती से भारत में घुस गए थे और पकड़े गए थे. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक़ वो भारत में बिना काग़ज़ात के घुसे.

क़रीब 54 साल भारत में बिताने के बाद 2017 में वो चीन के अपने घर जा पाए थे. उनका परिवार के शांक्सी राज्य के शियानयांग इलाके में है.

वांग छी की कहानी

वांग छी विभिन्न जेलों में छह से सात साल रहे और उसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश के एक गांव तिरोड़ी में छोड़ दिया गया.

वांग छी ने वहां एक आटे की चक्की में काम करना शुरू किया. उन्होंने सुशीला से शादी की, वहीं उनके बच्चे हुए.

80 के दशक में पहली बार पत्रों के माध्यम से चीन में परिवार के साथ उनका संपर्क हुआ.

40 साल में पहली बार 2002 में फ़ोन पर उनकी बात उनकी मां से हुई. साल 2006 में उनकी मां की मृत्यु हो गई.

बीबीसी में कहानी छपने के बाद भारत और चीन की मीडिया में इसे लेकर भारी प्रतिक्रिया हुई जिस कारण दोनो देशों के अधिकारियों में बात हुई.

वांग छी को कुछ समय पहले ही चीन का पासपोर्ट मिला था.

वांग छी

वांग छी के परिवार के मुताबिक़ वो बेटे विष्णु, विष्णु की पत्नी और बेटी के साथ चीन जा पाए और उन्हें भारत आने का एक साल का मल्टीएंट्री वीज़ा मिला.

साल 2017 में ही वांग छी के चीन वापस जाने के कुछ दिनों बाद ही उनकी पत्नी सुशीला को "लीवर में समस्या आ गई" और उन्हें नागपुर में अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा. अस्पताल में भर्ती होने के 10-15 दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गई.

विष्णु के मुताबिक मार्च 2019 को वांग छी का एक साल का भारतीय मल्टी-एंट्री वीज़ा एक्सपायर हो गया और अप्रेल 2019 में उन्होने वीज़ा के रिन्युअल के लिए अप्लाई किया, जो अभी तक लटका हुआ है.

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