एनआरसी जारी होने से पहले असम में तनाव- ग्राउंड रिपोर्ट

एनआरसी, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर

इमेज स्रोत, PTI

    • Author, प्रियंका दुबे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, गुवाहाटी से

नेशनल सिटिज़न रजिस्टर या एनआरसी की अंतिम लिस्ट के प्रकाशन से पहले असम में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. साथ ही, हिंसा की आशंका और सांप्रदायिक झड़पों की आशंकाओं को देखते हुए पुलिस, प्रशासन और गृह मंत्रालय अलग-अलग स्तरों पर जनता से शांति बनाए रखने और अफ़वाहों पर ध्यान न देने की अपील की है.

आम लोगों में विश्वास जगाने की कोशिश के तहत असम पुलिस ने ट्विटर पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार ने उन सभी लोगों की सुरक्षा व्यवस्था के पुख़्ता इंतज़ाम किए हैं जिनका नाम एनआरसी लिस्ट में शामिल नहीं है.

पाँच बातों की एक विशेष एडवाइज़री जारी करते हुए असम पुलिस ने लोगों से अफ़वाहों, सुनी-सुनाई बातों और फ़ेक न्यूज़ पर विश्वास न करने की अपील की.

यातायात, प्रशासन और क़ानून व्यवस्था के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए गुवाहाटी समेत राज्य के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सीआरपीसी की धारा 144 लगा दी गई है.

यह धारा पाँच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने, विरोध प्रदर्शन करने, हथियार या विस्फोटक सामग्री लेकर चलने या सांप्रदायिक हिंसा भड़काने को प्रतिबंधित करती है.

वीडियो कैप्शन, एनआरसी से बहुत से हिंदू बाहर

31 अगस्त को ही रिटायर हो रहे असम के पुलिस महानिदेशक कुलाधर सैकिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एनआरसी की अंतिम लिस्ट के प्रकाशन से पहले सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. "राज्य भर में पुलिस अधीक्षकों से लेकर अन्य सभी सुरक्षा कर्मचारियों को इस बारे में विशेष तौर पर ब्रीफ़ किया गया है ताकि वह ठीक से क़ानून व्यवस्था का पालन करवा सकें. मुझे उम्मीद है कि असम के लोग इस क़ानूनी प्रक्रिया का समर्थन करेंगे और हम शांतिपूर्ण ढंग से एनआरसी का प्रकाशन पूरा करवा पाएँगे."

साथ ही, गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी अपने ट्वीट करते हुए आम लोगों से फ़ेक न्यूज़ और अफ़वाहों पर भरोसा न करने की अपील की.

अपने बयान में गृह मंत्रालय ने कहा कि "सिर्फ़ एनआरसी में नाम न आने से कोई भी विदेशी नागरिक नहीं हो जाएगा. जिनका नाम एनआरसी में नहीं आता वह सभी लोग राज्य भर में बनवाए जा रहे फ़ॉरेन ट्रायब्यूनल या एफटी में अपील कर सकते हैं".

एनआरसी

ग़रीब को दी जाएगी मदद

आम लोगों में डर, भ्रम और आतंक की स्थिति को रोकने के लिए असम सरकार के अतिरिक्त प्रमुख सचिव कुमार संजय कृष्णा ने एक पब्लिक नोटिस ज़ारे करते हुए कहा है राज्य सरकार डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस औथोरिटी (डीएलसीए) के ज़रिए उन सभी लोगों की मदद करेगी जिनका नाम अंतिम एनआरसी में शामिल नहीं होगा.

एनआरसी में नाम शामिल न होने की स्थिति में इन लोगों को फ़ॉरेन ट्रायब्यूनल में नागरिकता के लिए आवेदन दाख़िल करने और सुनवाई में हिस्सा लेने के लिए ज़रूरी क़ानूनी मदद दी जाएगी. मदद की इस प्रक्रिया में ग़रीब तबके से आने वाले लोगों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी.

वीडियो कैप्शन, क्या इस महिला के पति की भारतीय नागरिकता बरकरार रहेगी?

नहीं किया जाएगा गिरफ़्तार

असम भर में फैले 33 फ़ॉरेन ट्रायब्यूनल की एक सूची जारी करते हुए असम के अतिरिक्त प्रमुख सचिव कुमार संजय कृष्णा ने कहा कि जिन लोगों में नाम एनआरसी में शामिल नहीं होंगे वह इन फ़ॉरेन ट्रायब्यूनल में अपील कर सकते हैं. इसके अलावा सरकार ने राज्य भर में 200 नए फ़ॉरेन ट्रायब्यूनल बनवाए जाने का आश्वासन भी दिया.

कुमार संजय से आगे यह भी कहा कि लोगों की सहूलियत के लिए फ़ॉरेन ट्रायब्यूनल में अपील करने की समय सीमा को 60 से बढ़ाकर 120 दिन कर दिया गया है. उन्होंने साफ़ कहा की जिन लोगों का नाम एनआरसी लिस्ट में नहीं आया है उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता - जब तक कि उन्हें अपील और सुनवाई के बाद फ़ॉरेन ट्रायब्यूनल 'वेदेशी नागरिक' घोषित नहीं कर देती.

एनआरसी, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर

इमेज स्रोत, DILIP SHARMA/BBC

एनआरसी असम में रह रहे भारतीय नागरिकों की एक लिस्ट है. इसे राज्य में अवैध तरीक़े से घुस आए तथाकथित बंगलादेशियों के ख़िलाफ़ असम में हुए छह साल लंबे जनांदोलन के नतीजे के तौर पर भी समझा जा सकता है.

एनआरसी के तहत 03 करोड़ 29 लाख लोगों ने ख़ुद को असम का नागरिक बताते हुए आवेदन दाख़िल किए लेकिन 30 जुलाई 2018 को प्रकाशित हुई एनआरसी के ड्राफ़्ट में 40 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं थे. फिर इसी साल की 26 जून को प्रकाशित हुई एक नई अतिरिक्त लिस्ट में तक़रीबन एक लाख नए नामों को सूची से बाहर किया गया.

इस तरह 31 अगस्त को एनआरसी की अंतिम लिस्ट के प्रकाशन के बाद कुल 41 लाख लोगों को आधर में लटकी अपनी नागरिकता की क़ानूनी स्थिति की जानकारी मिलेगी.

आगे क्या होगा

एनआरसी में नाम न आने और फ़ॉरेन ट्रायब्यूनल सुनवाई के बाद 'विदेशी नागरिक' घोषित हो जाने के बाद क्या होगा? क़ानून में घोषित विदेशी नागरिकों को गिरफ़्तार कर उन्हें निर्वासित करने का प्रावधान है. लेकिन इस बारे में सरकार की ओर से कोई भी अधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

एनआरसी

इमेज स्रोत, Pti

सभी को है गरिमा से जीने का अधिकार

संविधान के आर्टिकल 21 का हवाला देते हुए स्थानीय वक़ील अमन वानुड बताते हैं कि यह आर्टिकल नागरिक और ग़ैर-नागरिक सभी के गरिमा के साथ जीने के अधिकार की सुरक्षा करता है. "आर्टिकल 21 के तहत जिनका नाम लिस्ट में शामिल नहीं होगा, उन्हें भी गरिमा से जीने का अधिकार है. उम्मीद है कि भारत सरकार सभी लोगों के इस अधिकार की सुरक्षा करेगी"

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)