चाचा को भीड़ ने 'बच्चा चोर' समझ लिंच किया

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- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बच्चा चोर-बच्चा चोर और मारो-मारो का शोर मचाती भीड़, ज़मीन पर गिरे दो बेबस लोग, हर ओर से पड़ते लात घूंसे और लाठी डंडे और इसके बीच मोबाइल से वीडियो बनाते लोग.
ये वीडियो मंगलवार को उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में भीड़ की हिंसा में हुई एक व्यक्ति की मौत के सबूत बन चुके हैं.
ऐसे ही वायरल हो चुके एक वीडियो में ज़मीन पर पड़े राम अवतार गिड़गिड़ा कर बता रहे हैं कि जो बच्चा उनके साथ है वो उनका भतीजा है.
मारने वाले उनका नाम, गाँव का नाम और जात जानने के बाद भी नहीं रुके.
भीड़ में शामिल लोग बारी-बारी से उन्हें पीटते हैं. वो रहम की गुहार लगाते रहते हैं जो हर बार अनसुनी रह जाती है.
मौक़े पर पहुंची पुलिस ने जब तक राम अवतार और उनके भाई राम बहादुर को अस्पताल पहुंचाया तब तक राम अवतार दम तोड़ चुके थे.
पुलिस के मुताबिक़ वो अपने भतीजे का इलाज कराने जा रहे थे तभी भीड़ ने उन्हें बच्चा चोर समझकर पकड़ लिया.

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संभल के पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने बताया, "वो अपने भतीजे को इलाज कराने के लिए ला रहे थे. रास्ते में जराई गांव पड़ता है जहां भीड़ ने उन्हें बच्चा चोर होने के शक़ में पकड़ लिया और पिटाई शुरू कर दी."
"पुलिस मौक़े पर पहुंची और उन्हें छुड़ाकर अस्पताल लेकर गई, जहां उनमें से एक की मौत हो गई. वो दोनों भाई थे."
हमले का शिकार दोनों भाइयों के एक रिश्तेदार ने बताया कि वो बीमार भतीजे को लेकर अस्पताल गए थे क्योंकि उसके पिता घर पर नहीं थे.
स्थानीय पत्रकार ग़जनफ़र अली के मुताबिक़ हमले का शिकार हुए राम अवतार संभल के ही कुढ़फतहगढ़ थाना इलाक़े के छाबड़ा गांव के रहने वाले हैं.
गज़फ़र अली के मुताबिक़, "हमले के दौरान राम अवतार ने अपने घर पर फ़ोन लगाकर बताया था कि भीड़ उन पर हमला कर रही है. उनके भाई ने तुरंत डायल 100 पर फ़ोन किया था लेकिन पुलिस ने पहुंचने में देर कर दी."
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में मंगलवार को बच्चा चोरी की कई अफ़वाहें फैलीं. अब पुलिस लोगों से अफ़वाहें न फैलाने की अपील कर रही है.

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संभल के पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद कहते हैं, "किसी भी झूठी अफ़वाह पर ध्यान न दें. कोई भी बच्चा चोर गैंग नहीं है जो बच्चे चुरा रहा हो."
उन्होंने कहा, "ग़लत सूचना, भ्रामक जानकारी और अफ़वाहें फैलाने वाले लोगों को पुलिस चिह्नित कर रही है. ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी."
पुलिस के मुताबिक़ भीड़ की हिंसा के इस मामले में अब तक एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है और वीडियो के आधार पर अन्य हमलावरों की पहचान की जा रही है.
पुलिस का कहना है कि इस घटना में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाएगा.
लेकिन ये भारत में भीड़ की हिंसा का पहला मामला नहीं है. बीते कुछ सालों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं. कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि इसकी वजह सोशल मीडिया है जहां तेज़ी से जानकारी साझा की जाती है.

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लेकिन समाजशास्त्री संजय श्रीवास्तव का मानना है कि भीड़ की इस हिंसा की एक वजह वो माहौल भी है जो राष्ट्रीय स्तर पर बनाया जा रहा है.
वो कहते हैं, "राष्ट्रीय स्तर पर एक माहौल सा बना दिया गया है कि आप ये कर सकते हैं और आपको कोई कुछ कहेगा नहीं. अगर आपने ऐसा कोई काम भी किया तो आपके समर्थन में भी लोग आ जाएंगे ऐसी घटनाओं को सही ठहराने के कारण बताएंगे."
उनका ये भी मानना है कि ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सरकार को उच्चस्तर पर क़दम उठाने होंगे.

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वो कहते हैं, "निचले स्तर पर क़दम उठाकर कुछ नहीं होगा. किसी सिपाही या दारोगा से ये घटनाएं नहीं रुकेंगी.
इन्हें रोकने के लिए सरकार के सर्वोच्च पद पर बैठे लोगों को ज़ोर देकर ये कहना होगा कि ये ग़लत है और ऐसा नहीं होना चाहिए. जो लोग ऐसा कर रहे हैं उन्हें तुरंत और कड़ी सज़ा मिलेगी."
संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि सरकार के शीर्ष लोगों को राष्ट्रीय मीडिया पर आकर देश को ये भरोसा देना होगा कि ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सरकार गंभीर और सख़्त कार्रवाई करने का इरादा रखती है.

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