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केरल में बाढ़ से 72 लोगों की मौत
- Author, दीप्ति बथिनी
- पदनाम, कन्नूर (केरल) से, बीबीसी संवाददाता
पिछले साल भीषण बाढ़ झेलने के बाद केरल इस साल भी तबाही की चपेट में है.
उत्तरी केरल के कोझीकोड, वायनाड, मलप्पुरम जैसे इलाक़े इससे बुरी तरह प्रभावित हैं. रविवार शाम तक 72 लोगों के मारे जाने की ख़बर है, जिनमें से 23 मलप्पुरम से हैं.
ज़िला नियंत्रण कक्ष के मुताबिक अधिकर मौतें भूस्खलन के कारण हुई हैं. केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि पिछले दो दिनों में आठ ज़िलों से भूस्खलन की कुल 80 सूचनाएं मिलीं.
मलप्पुरम, कवलप्परा, मेप्पडी और वायनाड में भूस्खलन की बड़ी घटनाएं हुई. केंद्रीय बल, राज्य पुलिस, अग्निशमन विभाग, मछुआरों और स्वयंसेवकों के साथ बचाव कार्य में जुटे हैं.
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लाखों लोग राहत शिविरों में
केरल राज्य बिजली बोर्ड के एक इंजीनियर बैजू की मौत ड्यूटी के दौरान हो गई. ऊर्जा मंत्री एमएम मणि ने इस बारे में एक फ़ेसबुक पोस्ट किया है, जिसके मुताबिक बैजू की मौत त्रिशूर के पुन्नयुरकुलम में एक टावर के गिरने से हुई.
क़रीब 46,400 परिवारों के 1.65 लाख लोगों को प्रभावित इलाकों से निकाल कर 1318 राहत शिविरों में ठहराया गया है.
कोझीकोड में सबसे ज़्यादा 287 राहत शिविर कैंप बनाए गए हैं. वहीं वायनाड में 197 कैंपों की व्यवस्था की गई है.
हम कन्नूर ज़िले के कुछ राहत शिविरों में पहुंचे. यहां कुल 91 कैंप बनाए गए हैं. मय्यिली स्थित कैंप में पवनूर गांव के ग्रामीणों ने शरण ली है. इनके घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है.
यहां जब हमने एक वृद्ध महिला से पूछा कि वो कहां से आई हैं तो उन्होंने बताया, "मेरा पूरा गांव पानी में डूब गया है. हम सभी ने अपने घर खो दिए हैं. हमने अपने सामान को आंखों के सामने बहते देखा. लेकिन हम कुछ नहीं कर सकते थे."
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पानी से भरे खेत
सरकार की तरफ से राहत शिविर में मौजूद लोगों को एक जोड़ी कपड़े वाला बैग दिया गया है.
इस शिविर से कुछ किलोमीटर दूर एक गांव है, जहां पर घरों की दीवारों पर बाढ़ के पानी के निशान साफ देखे जा सकते हैं.
धान और केले के खेतों में अब पानी भरा है. उसकी तरफ इशारा करते हुए पवनूल गांव के निवासी अशोक कहते हैं, "हमने पहले ऐसी तबाही कभी नहीं देखी. पिछले साल जब बाढ़ आई थी तो कन्नूर में हमें ज़्यादा कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा था, लेकिन इस साल हालात कुछ और हैं."
रेड अलर्ट
कन्नूर ज़िला रेड अलर्ट पर है. भारतीय मौसम विभाग की ओर से अगले दो दिनों में यहां भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है.
केरल के नौ ज़िले रेड अलर्ट पर हैं. शनिवार को कोझीकोड के वडकारा में सबसे ज़्यादा 296 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई.
पिछले एक सप्ताह में केरल में भारी बारिश हुई है. दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत एक जुलाई से होती है.
हालांकि पिछले साल की तुलना में अभी तक बारिश कम हुई है.
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 2018 में 2039.6 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य आंकड़े 2515.73 मिलीमीटर से कम थी.
इस साल एक जून से 10 अगस्त तक 1406.82 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य स्थिति में यह आंकड़ा 1527.2 मिलीमीटर होना चाहिए था.
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