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असम की बाढ़ में कैसे वरदान साबित हो रहा है व्हाट्सएप?
- Author, रॉक्सी गागडेकर छारा
- पदनाम, कोकराझार, असम से बीबीसी संवाददाता
भूटान में जब भी भारी बारिश होती है, असम में 50 साल के पीतांबर कोइराला की ज़िंदगी काफ़ी व्यस्त हो जाती है.
असम में उनके जैसे 500 वॉलंटियर गांववालों को बाढ़ की चेतावनी देते हैं और समय रहते सजग करने का काम करते हैं. कोइराला उस व्हाट्सऐप ग्रुप के सदस्य हैं जो भूटान से बाढ़ का अलर्ट भेजता है.
जो लोग सरलभंगा नदी के किनारे रहते हैं, उनके लिए बाढ़ एक आम बात है. जब मानसून आता है तो वे लोग सुरक्षित जगहों पर चले जाते हैं.
हर परिवार के सदस्य को सुरक्षित जगह पर जाने के बारे में पता होता है और उन्हें ये भी पता होता है कि जब नदी ख़तरे के निशान से ऊपर चली जाए तो बूढ़े लोगों को कैसे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए.
लेकिन जब नदी में अचानक बाढ़ आए तो ये सतर्कता काम नहीं आती. सरलभंगा नदी में भूटान में होने वाली बारिश से पानी आता है. इस तरह की 50 अन्य नदियां हैं जो भूटान और असम को जोड़ती हैं.
जब भी भूटान में भारी बारिश होती , इन नदियों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है और सरहद के गांवों में जो लोग रहते हैं जैसे असम के कोकराझार, चिरांग, बाक्सा और उदालगुड़ी, उन्हें बाढ़ की चुनौती का सामना करना पड़ता है.
सुदूर गांवों तक नेटवर्क
भूटान की सीमा पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम से भी जुड़ी हुई है.
दोनों देशों के कुछ लोगों की पहल पर व्हाट्सएप का एक ऐसा नेटवर्क बना है जिससे गांव वालों को बाढ़ का अलर्ट उनके फ़ोन पर ही मिल जाता है.
ये अलग बात है कि फ़ेक न्यूज़ फैलाने में व्हाट्सएप का दुरुपयोग किया जाता है, लेकिन यहां कई गांवों के लिए ये मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म वरदान साबित हो रहा है.
व्हाट्सएप नेटवर्क जंगल के उन गांवों में बहुत प्रभावी साबित हो रहा है जहां ज़िले के डिप्टी कमिश्नर और यहां तक कि असम डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के लोग भी नहीं पहुंच पाते हैं.
ये वालंटियर बाढ़ की सूचनाएं अपने व्हाट्सएप पर हासिल करते हैं और फिर गांव वालों को देते हैं.
बाढ़ से पहले अलर्ट पहुंचा
इस साल विनाशकारी बाढ़ ने काफ़ी नुकसान पहुंचाया. कोइराला कहते हैं कि मध्य जुलाई में बागालझोरा गांव चार दिन तक बाढ़ में डूबा रहा. हालांकि जबतक पानी घरों में पहुंचता लोग सुरक्षित जगहों पर पहुंच गए थे.
वो कहते हैं, "ऐसा पहली बार हुआ है कि जबतक पानी घरों तक पहुंचे, लोग ऊंची जगहों पर पहुंच गए थे. बहुत कम नुकसान हुआ और किसी की जान नहीं गई. अलर्ट के मैसेज ने हमारे लिए काफी कुछ बदल दिया है."
हालांकी सरकारों के बीच भी संदेश के आदान-प्रदान का तंत्र मौजूद है.
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के ज़िला योजना अधिकारी कमल हज़ारिका ने बीबीसी को बताया कि सरकारी नेटवर्क होने के बावजूद, ये संदेश बहुत तेज़ी से लोगों तक पहुंचते हैं, ख़ासकर जंगल में स्थित गांवों तक. इससे सरकार को तेज़ी से कार्रवाई करने में भी मदद मिलती है.
कैसे शुरू हुआ?
ये पहल नॉर्थ ईस्टर्न रिसर्च एंड सोशल वर्क नेटवर्किंग और भूटान इंडिया फ़्रेंडशिप एसोसिएशन के सहयोग से शुरू हुई.
साल 2018 में इसकी शुरुआत हुई, इसके तहत दोनों देशों के बीच संस्कृति और विचारों के आदान प्रदान को बढ़ावा दिया जाए और पानी को लेकर किसी भी विवाद को सुलझाया जाना तय हुआ.
नॉर्थ ईस्टर्न रिसर्च एंड सोशल वर्क नेटवर्किंग के डायरेक्टर राजू नारजारी के अनुसार, "दोनों देशों के बीच पानी कोई समस्या पैदा नहीं करता, इसी को ध्यान में रखकर ये पहल शुरू की गई. जब भी भूटान से पानी आता है, हम निचले हिस्से के लोगों को अलर्ट करते हैं. बातचीत के माध्यम से हम नियमित रूप से असम के किसानों के लिए पानी छोड़ते हैं."
भूटान और असम के बीच नदियों का मुक्त प्रवाह है यानी बीच में कहीं कोई रुकावट नहीं है.
व्हाट्सऐप नेटवर्क कैसे काम करता है?
असल में संदेश की शुरुआत भूटान के सबसे ऊपरी ज़िले में स्थित गांव के मुखिया से होती है. जब वहां बारिश होती है और बाढ़ जैसी स्थिति की आशंका होती है तो वे संबंधित लोगों को चेतावनी के साथ मैसेज भेजते हैं.
ये वालंटियर भूटान इंडिया फ़्रेंडशिप एसोसिएशन के स्थानीय समूह 'गालेफू' का हिस्सा होते हैं.
एसोसिएशन के महासचिव उग्येन रैबटन संदेश भेजने और प्राप्त करने वालों के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं.
वो बताते हैं, "10 जुलाई को जब असम में बाढ़ आई तो मुझे भूटान के पहाड़ों में भारी बारिश आने की सूचना मिली थी. हमने इस संदेश की जांच की, जब हमने पाया कि संदेश ग़लत नहीं है तो फिर हमने इसे असम में राजू को भेज दिया."
यहां से राजू असम में वॉलंटियर के ग्रुप में संदेश को भेजते हैं, जो गांव वालों तक इस संदेश को पहुंचाते हैं.
भूटान के लोग क्या कहते हैं?
सेवानिवृत्त राबटेन बताते हैं कि भारत और भूटान में बड़े अच्छे संबंध हैं लेकिन भूटान से भारत आने वाले पानी को लेकर कभी कभी ग़लतफहमियां पैदा हो जाती हैं.
वो कहते हैं, "मैं अपने भारतीय दोस्तों को बताना चाहता हूं कि भूटान कभी ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे पड़ोसियों को नुकसान पहुंचे. बाढ़ का अलर्ट संदेश दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्ते को और मज़बूत करने वाला है."
असम में आई इस बार की बाढ़ पिछले कुछ सालों में आई बाढ़ से ज़्यादा विनाशकारी साबित हुई है.
बाढ़ में अभी तक कम से कम 82 लोगों के मारे जाने की ख़बर है और अब तक 54 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं.
ये बाढ़ काज़ीरंगा नेशनल पार्क के लिए भी काफ़ी विनाशकारी साबित हुई है, जहां इस साल 13 जुलाई के बाद 220 जानवरों की मौत हुई है.
असम आपदा प्रबंधन अथॉरिटी के अनुसार, 13 ज़िलों के करीब आठ लाख लोग अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं.
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