श्रीनगर में कर्फ्यू के बीच हुआ विरोध प्रदर्शन

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- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी संवाददाता
भारत प्रशासित कश्मीर के साथ-साथ जम्मू के भी पुंछ, राजौरी, डोडा और किश्तवाड़ इलाकों में लगातार छठे दिन सरकार की ओर से धारा 144 लागू है.
सरकार भले ही कह रही है कि तमाम पाबंदियां सिर्फ धारा 144 के तहत लगाई गई हैं, लेकिन इन सभी जगहों पर कर्फ्यू जैसे हालात बने हुए हैं.
सरकार ने यह भी कहा था कि ईद को देखते हुए कई जगहों पर पाबंदियों में छूट दी जाएगी लेकिन जिन इलाकों में अक्सर विरोध प्रदर्शन होते रहते हैं वहां अभी भी सख्त नाकेबंदी जारी है.
श्रीनगर के सौरा इलाके में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. सरकार की ओर से इसे एक छोटा-मोटा प्रदर्शन कहा गया. लेकिन जब हम वहां पर पहुंचे तो जुमे की नमाज़ के बाद वहां पर भारी तादाद में लोग मौजूद थे.
सौरा के सबसे बड़े अस्पताल शेर-इ-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज से सड़क ईदगाह की तरफ जाती है. उस रास्ते पर करीब आधे घंटे में ही हज़ारों की तादाद में लोग इकट्ठा हो गए थे.

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ये सभी लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. शुरुआत में तो सुरक्षाबलों ने इन लोगों को जाने दिया लेकिन कुछ देर बाद सुरक्षाबलों की ओर से फ़ायरिंग की गई.
पहले पुलिस ने हवा में फ़ायरिंग की लेकिन उसके बाद उन्होंने पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया. इससे वहां पर भगदड़ की स्थिति बन गई, लोग खुद को बचाने के लिए यहां वहां भागने लगे.
उसके बाद हमने देखा कि सौरा इंस्टीट्यूट में आठ घायलों को लाया गया, जिसमें दो महिलाएं भी शामिल थीं. एक नौजवान के पैर में गोली लगी हुई थी और बाकी लोगों को पैलेट लगे हुए थे.

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ईद की तैयारियां
अभी जो ईद आने वाली है, वह ईद-उल-अजहा है. उसमें कुर्बानी की रस्म मनाई जाती है. लोगों ने इस मौक़े के लिए कई भेड़ और बकरियां रखी हुई हैं.
जिन लोगों के लिए कुर्बानी देना बहुत अहम होता है, फिलहाल उन्हें इसके लिए भेड़ या बकरी मिलना मुश्किल है. क्योंकि ईदगाह पर ही भेड़ों की सबसे बड़ी मंडी होती है.
ईद की रौनक कहीं भी देखने को नहीं मिल रही है. किसी तरह की खरीददारी नहीं हो रही. लोग देख रहे हैं कि जिस सड़क या इलाके में थोड़ी बहुत छूट दी जाती है, वो उस सड़क पर निकल पड़ते हैं.
शोपियां, पुलवामा जैसे इलाके तो बिलकुल बंद पड़े हैं. यहां सबसे ज़्यादा विरोध प्रदर्शन होते हैं.
हमने कुछ लोगों से ईद की तैयारी के बारे में पूछा तो उन्होंने चौंककर हमसे ही उल्टा पूछ लिया कि 'ईद कब है?' इससे महसूस किया जा सकता है कि भारत सरकार के फैसले से यहां पर लोगों में कितनी नाराज़गी है.
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रोजमर्रा की ज़रूरत कैसे पूरी हो रही है?
वैसे जिस तरह के हालात या कर्फ्यू अभी घाटी में लगा हुआ है, वहां के लोगों के लिए कोई नई बात नहीं है. उन्हें इसकी एक तरह की आदत हो चुकी है. इससे पहले भी कई बार घाटी में कर्फ्यू लगता रहा है.
इस बार फर्क यह है कि घाटी में पाबंदियों के साथ-साथ लोगों में अजीब सी बेबसी देखने को मिल रही है. इसकी वजह यह है कि इस बार के हालात में कश्मीर का जो रसूकदार तबका था, जिसमें महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्लाह शामिल हैं, वो भी बेबस हैं.
इसके अलावा ऐसी ख़बरें भी हैं कि इन नेताओं के जो कार्यकर्ता हैं, उन्हें आगरा भेजा गया है.

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सुरक्षाबलों का रवैया?
शुरुआती चार दिन तो हम जहां भी गए वहां सुरक्षाबलों का लहज़ा काफी नरम देखने को मिला. जिन जगहों पर जाने से रोक थी, उसके बारे में सुरक्षाबलों ने बहुत अच्छे तरीके से बताया.
हमने जम्मू कश्मीर पुलिस से भी बात की तो उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ़ हमेशा से साथ में मिलकर काम करती रही है. हालांकि पुलिसवालों का मानना था कि इस बार सीआरपीएफ़ का रवैया थोड़ा बदला हुआ है.
क्योंकि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत सीआरपीएफ़ को जम्मू कश्मीर पुलिस ही मैनेज करती है. श्रीनगर के सौरा में जो प्रदर्शन हुआ, उसमें भी जम्मू कश्मीर पुलिस की तरफ से फ़ायरिंग हुई है. जबकि सीआरपीएफ़ ने इन प्रदर्शनकारियों को तीन नाकों से जाने दिया था.
(बीबीसी उर्दू संवाददाता शकील अख़्तर के साथ बातचीत पर आधारित)
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