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व्यापार से ही सुधरेंगे भारत-पाक रिश्ते: नज़रिया
- Author, आशुतोष सिन्हा
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
जम्मू कश्मीर में चरमपंथी घटनाओं के कारण वहां के व्यापार का माहौल बिगड़ गया है.
पुलवामा हमले के बाद सरहद के आर-पार होने वाले व्यापार में गिरावट आई है. उससे पहले उरी पर हुए हमले के बाद भी दोनों देशों के बीच व्यापार पर सीधा असर पड़ा था. और पठानकोट हमले के बाद भी ठीक वैसा ही हुआ था.
पुलवामा की घटना के बाद पाकिस्तान से आने वाले कई सामानों पर भारत ने आयात शुल्क लगा दिया था जिस कारण उन उत्पादों की मांग देश में काफी गिर गई थी.
भारत और पाकिस्तान के नेताओं ने जब भी अमन कायम करने की कोशिश की है, दोनों देशों के लोगों ने एक-दूसरे तक अपना सामान पहुंचाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है.
लेकिन जैसे ही दोनों तरफ के नेता तल्ख़ भाषा का इस्तेमाल करते हैं, व्यापारियों के बीच ये साफ़ हो जाता है कि अब समय करवट लेने वाला है.
कश्मीर से जुड़ी की हर बड़ी घटना के बाद ऐसा देखने में आया है. आंकड़े गवाह हैं कि ये कोई नई बात नहीं है.
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती है और लोगों और कंपनियों के बीच हो रहे व्यापार पर उसका सीधा असर पड़ता है.
चूंकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भारत से काफी छोटी है, इसलिए रिश्तों में खटास की मार वहां के लोगों और कंपनियों पर ज़्यादा पड़ती है.
अर्थव्यवस्था बदली लेकिन नहीं बढ़ा व्यापार
साल 2018-19 में दोनों देशों के बीच 2.56 बिलियन डॉलर (करीब 18,000 करोड़ रुपये) का व्यापार हुआ. लेकिन पिछले दशक में जैसे-जैसे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था बदली है, उस तरह से उनके बीच व्यापार बढ़ता नहीं दिख रहा है.
2010-11 में दोनों देशों के बीच 2.37 बिलियन (क़रीब 17,000 करोड़ रुपये) डॉलर का व्यापार हुआ था और अगले दस सालों में इसमें नहीं के बराबर वृद्धि हुई है.
इस दौरान भारत में पाकिस्तान से होने वाला आयात भी नहीं के बराबर बढ़ा है.
एक दूसरे से क्या ख़रीदते हैं भारत-पाकिस्तान?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान ने भारत से 2018-19 में 2000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का कपास आयात किया.
तेल और केमिकल पदार्थ (चूना पत्थर, सीमेंट, नमक, सल्फ़र, दूसरे खनिज) जैसे सामानों को मिलाकर 2018-19 में भारत ने करीब 14,000 करोड़ रुपये का निर्यात किया.
पाकिस्तान से करीब 3500 करोड़ रुपये के फल, सब्ज़ी, प्लास्टिक के सामान, चाय, मसाले जैसे सामान भारत में आयात किये गए.
इनके अलावा भारत पाकिस्तान से फल, सूखे मेवे, खट्टे फल और खरबूज भी आयात करता है.
चीन से भी भारत के रिश्ते बहुत बढ़िया नहीं हैं. एशिया के इन दोनों सबसे बड़े देशों के बीच सीमा विवाद बरक़रार है.
लेकिन भारत और चीन के बीच होने वाला व्यापार इतनी तेज़ी से बढ़ा है कि अब आपसी रिश्तों में सीमा रेखा पर अंतर के बारे में कम और आपसी व्यापार को बढ़ाने की बात ज़्यादा होती है. इससे होने वाला फायदा लोगों को साफ़ दिखता है.
हालांकि इसका ये मतलब नहीं है कि सभी विवादास्पद मुद्दों का हल मिल गया है. लेकिन दोनों देश इन मुद्दों को शायद दरकिनार कर, व्यापार पर ध्यान देना चाहते हैं जिससे कि वहां के लोग और कंपनियां फल-फूल सकें. आंकड़े साफ़ दर्शाते हैं कि पाकिस्तान के साथ ऐसा नहीं हुआ है.
चीन से बढ़ेगा व्यापार?
चीन मैन्युफैक्चरिंग प्रधान देश रहा है और भारत की सर्विस इंडस्ट्री ने दुनिया भर में अपना डंका बजाया है. चीन की कई बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने भारत में निवेश किया है और दुनिया भर में काम करने के बाद, भारत की बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों ने चीन में अपना बिज़नेस फैलाया है.
भारत की कई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने चीन में भी अपनी फैक्ट्री लगा ली है. चीन की कंपनियों ने देश भर में बिजली के प्रोजेक्ट लगाने में अपनी टेक्नोलॉजी दी है. चीन के बैंकों ने कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए पैसे भी दिए हैं.
एक तरफ भारत और पाकिस्तान के व्यापार पर अगर चरमपंथ का साया मंडराता रहता है तो दूसरी तरफ चीन के साथ व्यापार धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है.
2018-19 के वित्तीय वर्ष में दोनों देशों के बीच व्यापार 100 बिलियन डॉलर (करीब 700,000 करोड़ रुपये) के आंकड़े को पार कर जाने की उम्मीद है.
अमन रखना सभी के हित में
चीन से भारत में आयात होने वाला सामान 2011 में करीब 55 बिलियन डॉलर (385,000 करोड़ रुपये) का था. उस साल भारत का चीन को निर्यात करीब 17 बिलियन डॉलर (120,000 करोड़ रुपये) का था.
लेकिन साल 2016 के आते आते चीन का बाज़ार भारत के लिए दुनिया भर में सातवां सबसे बड़ा बाजार बन गया था. अब दोनों देशों की 100 से ज़्यादा कंपनियां एक दूसरे के बाज़ारों में अपना बिज़नेस बढ़ाने का काम कर रही हैं.
आख़िर में बात आती है पाकिस्तान और भारत की सरकारों और दोनों देशों के लोगों पर. अगर दोनों देश के लोग और नेता व्यापार बढ़ाना चाहते हैं तो अमन रखना सभी के हित में होगा. कई अहम मुद्दों के न सुलझने के बावजूद, चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापारिक संबंध इसकी मिसाल हैं.
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(इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं. इसमें शामिल तथ्य और विचार बीबीसी के नहीं हैं और बीबीसी इसकी कोई ज़िम्मेदारी या जवाबदेही नहीं लेती है)
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