अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस में बढ़ रहा विरोध

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक

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जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता पर संविधान से अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद असमंजस में फंसी कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार देर रात कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक की थी.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने फ़ेसबुक पर कार्यसमिति की बैठक में पारित प्रस्ताव भी साझा किया है.

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि कश्मीर पर सरकार के फ़ैसले से 'भारत के संघीय ढाँचे' पर गंभीर असर पड़ेगा.

प्रस्ताव में कहा गया है, "कांग्रेस वर्किंग कमिटी अनुच्छेद 370 को एकतरफ़ा और अलोकतांत्रिक तरीक़े से हटाए जाने की निंदा करती है."

"संवैधानिक नियमों, राज्य के अधिकारों, संसदीय प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक शासन के सभी सिद्धांतों का घोर उल्लंघन किया गया है."

इस प्रस्ताव में ये भी कहा गया कि अनुच्छेद 370 को जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल और डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने आगे बढ़ाया था.

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प्रस्ताव में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 का तब तक सम्मान किया जाना चाहिए था जब तक सभी वर्गों से रायशुमारी के बाद और भारत के संविधान के तहत इसमें संशोधन न कर दिया जाता है.

प्रस्ताव में ये भी कहा गया है कि राज्यसभा और लोकसभा में बीजेपी सरकार ने जिस तरह से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किया है उसके परिणाम सिर्फ़ जम्मू-कश्मीर तक ही सीमित नहीं रहेंगे.

"इससे भारत के संघीय ढांचे पर ही सवाल खड़ा हो गया है क्योंकि किसी भी सरकार के पास ये शक्ति नहीं है कि वो किसी राज्य का दर्जा कम कर दे या उसके किसी हिस्से को केंद्र शासित क्षेत्र में बदल दे."

प्रस्ताव में कहा गया, "कांग्रेस वर्किंग कमिटी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की घोषित और निरंतर स्थिति को मज़बूती से दोहराती है कि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के अवैध क़ब्ज़े वाला और पाकिस्तान की ओर से चीन को दिया गया क्षेत्र भी शामिल है और यह भारत का अभिन्न अंग है."

"भारत में जम्मू-कश्मीर का विलय अंतिम और अटल है. जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी मुद्दे भारत का आंतरिक मामला हैं और इसमें कोई बाहरी दख़ल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."

दिल्ली में हुए प्रदर्शन

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इमेज कैप्शन, दिल्ली में कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए हैं

कांग्रेस की ओर से ये बयान आने से पहले कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी लाइन से बाहर जाकर अनुच्छेद 370 हटाए जाने का समर्थन किया.

कार्यसमिति की बैठक से कुछ देर पहले ही राहुल गांधी के क़रीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक ट्वीट करके केंद्र सरकार के फ़ैसले का समर्थन कर दिया.

उन्होंने कहा, "मैं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर उठाए गए क़दम और इसके भारत में पूर्ण विलय का समर्थन करता हूं. ये देशहित में उठाया गया क़दम है."

लोकसभा में दिए गए पार्टी सांसद अधीर रंजन चौधरी के बयान ने भी पार्टी को परेशानी में डाल दिया.

चौधरी ने कहा था, "आप इसे आंतरिक मामला बताते हैं लेकिन 1948 से ये संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में हैं. क्या ये आंतरिक मामला है? हमने शिमला समझौता और लाहौर डिक्लेरेशन पर दस्तख़त किए थे. क्या वो आंतरिक मामला था या द्वीपक्षीय था?"

बीएसएफ़ के जवान

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चौधरी का ये बयान कश्मीर मुद्दे पर भारत के घोषित दीर्घकालिक पक्ष से ठीक उलट था. गृह मंत्री अमित शाह ने तो पार्टी से पूछ लिया था कि क्या ये कांग्रेस का अधिकारिक पक्ष है.

शाह ने कहा था, "मैं जब भी कश्मीर की बात करता हूं, पाक अधिकृत कश्मीर और चीन के क़ब्ज़े वाला क्षेत्र भी उसमें शामिल होता है. हम इसके लिए अपनी जान भी दे सकते हैं."

अनुच्छेद 370 को लेकर पार्टी में उठे विरोधी स्वर सोशल मीडिया पर भी सुनाई दिए. वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी, दीपेंद्र हुड्डा, अनिल शास्त्री के अलावा यूपी की विधायक अदिति सिंह ने भी सरकार के क़दम का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया है.

वहीं राज्यसभा में पार्टी के सांसद और चीफ़ व्हिप भुवनेश्वर कलिता ने भी पार्टी के पक्ष को देश के मूड के उलट बताते हुए संसद की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया.

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