कश्मीरः नज़रबंद होने के बाद क्या बोले उमर और महबूबा?

महबूबा मुफ़्ती और उमर अबदुल्लाह

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इमेज कैप्शन, महबूबा मुफ़्ती और उमर अबदुल्लाह

जम्मू कश्मीर में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. राज्य के तीन प्रमुख नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया है. इसमें दो पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं.

सोमवार आधी रात को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्लाह और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने अपने घरों में नज़रबंद किए जाने के बाद कई ट्वीट किए हैं.

नज़रबंदी के बाद उमर अब्दुल्लाह ने जो पहला ट्वीट किया है उसमें लिखा है, ''कश्मीर के लोगों से कहना चाहता हूं, हमें नहीं पता कि क्या होने जा रहा है लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि अल्लाह ने हमारे लिए जो भी सोचा होगा वह बेहतर होगा. हम भले ही अभी उसे देख ना पा रहे हों, लेकिन हमें उस पर कभी शक नहीं करना चाहिए. सभी को शुभकामनाएं. सभी सुरक्षित रहें और इससे भी बढ़कर सभी संयम में रहें.''

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दूसरे ट्वीट में उमर अब्दुल्लाह ने लिखा, ''जिस वक़्त हम सभी का ध्यान कश्मीर की तरफ़ है, मैं कुछ बातें कारगिल, लद्दाख़ और जम्मू के लोगों के लिए कहना चाहता हूं. मुझे कुछ नहीं पता कि हमारे राज्य के साथ क्या होने वाला है लेकिन यह कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा. मैं जानता हूं कि आपमें से बहुत लोगों को यह चीजें निराश कर रही हैं. लेकिन क़ानून को अपने हाथ में मत लीजिए. कृपया शांति बनाए रखें.''

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तीसरे ट्वीट में वो लिखते हैं, ''हिंसा सिर्फ़ वे लोग करते हैं जो हमारे राज्य का भला नहीं चाहते. ये वो भारत नहीं था जिसे जम्मू कश्मीर ने चुना था लेकिन मैं अभी भी उम्मीद छोड़ने के लिए तैयार नहीं हूं. भगवान सभी के साथ है.''

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अपने एक और ट्वीट में उमर अब्दुल्लाह ने लिखा, ''मुझे पीर पंजल और चेनाब घाटी में रहने वाले लोगों की ख़ास चिंता हो रही है. इन इलाक़ों में सांप्रदायिक हिंसा होने की बहुत ज़्यादा आशंका है. मुझे उम्मीद है कि सरकार ने इन इलाक़ों में सही इंतज़ाम कर रखे होंगे.''

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वहीं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला चुकीं पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने भी नज़रबंद होने के बाद कई ट्वीट किए हैं.

उन्होंने अपने पहले ट्वीट में लिखा है, ''यह कितनी बड़ी विडंबना है कि हम चुने हुए प्रतिनिधी जिन्होंने यहां शांति के लिए लड़ाई लड़ी, उन्हें आज नज़रबंद किया गया है. दुनियाभर के लोग देख रहे हैं कि जम्मू कश्मीर की आवाज़ को कैसे दबाया जा रहा है. इसी कश्मीर ने एक सेक्युलर लोकतांत्रिक भारत को चुना था. आज यहां इस तरह का उत्पीड़न हो रहा है. जागो इंडिया.''

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अपने दूसरे ट्वीट में महबूबा मुफ़्ती ने लिखा है, ''मुझे उम्मीद है कि जिन लोगों ने हम पर अफ़वाह फैलाने के आरोप लगाए थे उन्हें अब एहसास हो गया होगा कि हम ग़लत नहीं थे. नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया है, इंटरनेट सेवाएं बंद हैं और धारा 144 लगा दी गई है. यह सब कोई सामान्य चीज़ें नहीं हैं.''

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एक और ट्वीट में वो लिखती हैं, ''जो लोग आज के हालात का जश्न मना रहे हैं उन्हें यह नहीं मालूम इनका कितना दूरगामी असर पड़ेगा.''

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महबूबा मुफ़्ती ने अगले ट्वीट में लिखा, ''वाजपेयी जी भले ही बीजेपी के नेता थे लेकिन वो कश्मीरियों के साथ हमदर्दी रखते और उन्होंने कश्मीरियों का प्यार जीता था. आज हमें उनके कमी महसूस हो रही है.''

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जम्मू कश्मीर में फ़िलहाल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं और कई इलाक़ों में धारा 144 लगाई गई है. इसके साथ ही सभी शैक्षणिक संस्थान भी बंद कर दिए गए हैं.

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