पाकिस्तान अपने जवानों के शव ले जाए: भारत

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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भारतीय सेना ने पाकिस्तान से कहा है कि वो अपने जवानों के शव ले जाए.
पीटीआई के अनुसार पाकिस्तान बॉर्डर एक्शन टीम यानी बीएटी के जवान जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में हमले कोशिश कर रहे थे और भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में बीएटी के पाँच से सात जवान मारे गए.
पीटीआई ने सेना के सूत्रों के हवाले से बताया है कि पाकिस्तानी सेना को अपने जवानों के शव ले जाने के लिए कहा गया है जो नियंत्रण रेखा पर भारत की तरफ़ पड़े हैं.
वहीं पाकिस्तान ने भारत के इस दावे को ख़ारिज किया है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने एक ट्वीट में इसे भारत का प्रोपागेंडा बताया है.
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कहा जा रहा है कि भारतीय सेना ने बीएटी के हमलों की कोशिश को नाकाम कर दिया और उसके पाँच से सात लोग मारे गए. सेना के सूत्रों के हवाले से पीटीआई ने बताया है कि बीएटी ने 31 जुलाई और एक अगस्त को घुसपैठ की कोशिश की थी.
पीटीआई के अनुसार कम से कम चार शव पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप यानी एसएसजी कमांडो हैं.
भारत प्रशासित कश्मीर में बीते तीन दिनों से काफ़ी गहमागहमी है. सरकार की ओर से घाटी में मौजूद तमाम पर्यटकों और अमरनाथ यात्रा कर रहे तीर्थ यात्रियों को कश्मीर छोड़ने को कहा गया है.

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इस आदेश के बाद से जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने शुक्रवार रात अपने निवास स्थान पर एक आपात बैठक बुलाई थी. इसमें जम्मू-कश्मीर के अन्य क्षेत्रीय दलों के नेता शामिल हुए थे जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के फ़ारूक़ अब्दुल्लाह, पीपल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन और पीपल्स मूवमेंट के शाह फ़ैसल शामिल हुए थे.
हालांकि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का कहना है कि ऐसा ख़ुफ़िया सूचना के आधार पर सुरक्षा के लिहाज से किया गया है. जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक की ओर से बयान आया कि उन्हें किसी संवैधानिक प्रावधान में बदलाव की ख़बर नहीं है.
राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती केवल सुरक्षा कारणों से की जा रही है. मगर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने दोपहर बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके घाटी के हालात पर चिंता जताई और अमरनाथ यात्रा को रोकने के दिशा-निर्देश जारी करने की निंदा की.
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