उन्नाव रेप कांड में बढ़ती रहस्य की परतें

कुलदीप सिंह सेंगर

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इमेज कैप्शन, कुलदीप सिंह सेंगर रेप के मामले में अभी जेल में बंद हैं
    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए

"हादसा नहीं है ये. सब जानबूझकर कराया गया है. विधायक के लोग ये सब कर रहे हैं. कई बार धमकी दी जा चुकी है. समझौता कराने का दबाव बनाया जा रहा है. विधायक सब काम जेल से ही कर रहे हैं. विधायक ख़ुद भले ही जेल में हैं लेकिन उनके आदमी बाहर हैं. हमें न्याय चाहिए."

उन्नाव के रेप कांड की पीड़ित लड़की की मां लखनऊ के केजीएमयू हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के बाहर बदहवास घूम रही थीं और मीडिया वालों के कुछ पूछने पर ऐसे जवाब दे रही थीं जैसे थोड़ी ही देर में बहुत सी बातें कह देना चाहती हों.

उनका कहना था कि आए दिन उन लोगों के घर के सदस्यों को जेल में डलवाने या फिर हत्या करा देने की धमकी दी जाती है.

रेप पीड़िता के परिवार पर एक बार फिर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. जेल में बंद अपने चाचा से मिलने के लिए जब वो उन्नाव से रायबरेली जेल जा रही थी, तब रास्ते में एक ट्रक से सीधी टक्कर होने के चलते उनकी चाची और मौसी की मौत हो गई.

ये लोग रेप पीड़िता और उनके वकील के साथ एक ही गाड़ी में सवार थे. हादसे में रेप पीड़िता और वकील भी बुरी तरह से घायल हुए हैं जिनका लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है. इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 302, 307, 506 और 120-बी धाराओं के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई है.

साथ ही इस मामले में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत दस लोगों को नामज़द किया गया है.

उत्तर प्रदेश पुलिस की एफ़आईआर

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इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश पुलिस की एफ़आईआर में कुलदीप सिंह सेंगर को आरोपी बनाया गया है

पुलिस मान रही हादसा

रेप पीड़िता की मां जिस वक़्त मीडिया से बात कर रही थीं लगभग उसी वक़्त राज्य के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह का बयान आया कि 'प्रथम दृष्ट्या यह हादसा ही प्रतीत हो रहा है, इसमें साज़िश जैसी कोई बात नहीं दिख रही है.'

यह बयान रायबरेली के पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह के बयान जैसा ही था जो घटना के दिन उन्होंने प्रथम दृष्ट्या जानकारी के आधार पर दी थी.

वहीं, सोमवार दोपहर तक जब इस मामले को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में उबाल आने लगा तो लखनऊ ज़ोन के एडीजी राजीव कृष्ण ने प्रेस कांफ्रेंस करके कुछ जानकारियां साझा कीं.

उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर तमाम नमूने इकट्ठा करके जांच के लिए भेजे जा चुके हैं. जांच रिपोर्ट आने पर घटना की सीबीआई जांच कराई जाएगी. जिस ट्रक की टक्कर से दुर्घटना हुई है, उसके ड्राइवर, मालिक और क्लीनर को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है.

जिस ट्रक से रेप पीड़िता की कार की टक्कर हुई, उसके नंबर प्लेट पर कालिख पुती हुई थी.

एडीजी राजीव कृष्ण ने इसकी वजह बताई, "ट्रक मालिक ने बताया कि वह समय पर किश्तों का भुगतान करने में असमर्थ था और फ़ाइनेंसर बार-बार परेशान कर रहे थे. इस वजह से उसने ट्रक के सामने की साइड नंबर प्लेट पर कुछ ग्रीस से पेंट कर दिया था."

स्वाति मालीवाल

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इमेज कैप्शन, स्वाति मालीवाल ने लखनऊ जाकर पीड़िता को देखा है

राजनेता नहीं मान रहे हादसा

इन सब मामलों की जांच होगी. जांच इस बात की भी होगी कि सरकार की ओर से छह सुरक्षाकर्मी मिलने के बावजूद पीड़ित लड़की के साथ उस वक़्त कोई भी क्यों नहीं था?

हालांकि इस बारे में पीड़ित लड़की की मां ने मीडिया को बताया, "उन लोगों की कोई ग़लती नहीं है. एक सिपाही के घर पर कोई बीमार था, वो चले गए थे और गाड़ी में जगह भी नहीं थी."

इस हादसे पर चौतरफ़ा सवाल उठ रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सीधे तौर पर इसे साज़िश बता रहे हैं.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी इसे हादसा मानने को तैयार नहीं हैं और योगी सरकार की क़ानून-व्यवस्था को मृतप्राय बता रही हैं तो दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने पीड़ित परिवार से मुलाक़ात के बाद कहा कि जब तक इस मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश के बाहर नहीं होती, पीड़ित और उसके परिवार को न्याय नहीं मिलेगा.

ट्रक

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इमेज कैप्शन, कार की जिस ट्रक से टक्कर हुई उसका नंबर मिटा हुआ है

थ्रिलर फ़िल्म जैसी कहानी

28 जुलाई को हुई सड़क दुर्घटना में मृत महिलाओं में से एक इस पूरे मामले में गवाह भी हैं. एक अन्य गवाह की मौत अभी कुछ दिन पहले ही हुई थी.

रेप पीड़ित लड़की के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है जबकि उसके चाचा भी कुछ अन्य मामलों में गिरफ़्तार करके पिछले दिनों जेल भेज दिए गए थे. ये लोग उन्हीं से मिलने रायबरेली जेल जा रहे थे.

दरअसल, ये पूरा मामला किसी थ्रिलर फ़िल्म की कहानी से कम नहीं है. उन्नाव के बांगरमऊ से बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर पर एक नाब़ालिग लड़की ने जून 2017 में बलात्कार करने का आरोप लगाया था.

आरोप थे कि बार-बार शिकायत के बावजूद पीड़ित लड़की की एफ़आईआर पुलिस ने नहीं लिखी थी जिसके बाद लड़की के परिवार वालों ने कोर्ट का सहारा लिया.

पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस दौरान विधायक के परिजन उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाते रहे. लड़की का कहना है कि न्याय के लिए वह उन्नाव पुलिस के हर अधिकारी के पास गई, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई.

इसी ट्रक से हुई टक्कर

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इमेज कैप्शन, इसी ट्रक से हुई टक्कर

पीड़ित के मुताबिक़, पिछले साल अप्रैल में विधायक के भाई अतुल सिंह और उनके साथियों ने उसके पिता को मारा-पीटा और बाद में पुलिस ने उसके पिता के ही ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करके उसे जेल भेज दिया.

आख़िरकार परेशान होकर पीड़ित लड़की अपनी मां के साथ पिछले साल ही आठ अप्रैल को लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पर आई और अपने ऊपर तेल छिड़ककर आत्महत्या की कोशिश की लेकिन उसे बचा लिया गया. अगले ही दिन पीड़ित लड़की के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई और ये मामला सुर्ख़ियों में आ गया.

चार महीने बाद इस घटना यानी पुलिस हिरासत में पिटाई और मारपीट के चश्मदीद और मामले में मुख्य गवाह की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई.

बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर पर उनके गांव माखी में घर के पड़ोस में ही रहने वाली एक नाबालिग लड़की ने बलात्कार का आरोप लगाया है.

मामले के सुर्खियों में आने और चौतरफ़ा दबाव के बावजूद उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं हुई लेकिन जब ख़ुद कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सरकार को घेरा और उसके बाद सीबीआई जांच शुरू हुई तब जाकर पिछले साल 13 अप्रैल को कुलदीप सेंगर की गिरफ़्तारी हुई.

हालांकि इस मामले में विधायक कुलदीप सेंगर की पत्नी और उनके परिवार के अन्य लोग रेप समेत पूरी घटना को साज़िश बता रहे हैं.

इन लोगों का कहना है कि पीड़ित लड़की के पिता और उसके चाचा के ख़िलाफ़ तमाम केस दर्ज हैं और ये लोग ज़बरन कुछ लोगों की साज़िश के तहत विधायक और उनके परिवार वालों को फँसाने की कोशिश कर रहे हैं.

इस मामले में गठित एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने र्आईपीसी की धारा 363, 366, 376 और 506 के तहत मुक़दमा दर्ज किया है. और चूंकि घटना के वक़्त पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए पॉक्सो एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रेन फ़्रॉम सेक्सुअल ऑफ़ेंसेस एक्ट, 2012) के तहत भी ये मामला दर्ज किया गया है. मामले की जांच सीबीआई कर रही है.

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