अहमदाबाद: गर्भवती पत्नी को लाने गए दलित की पुलिस के सामने हत्या

    • Author, तेजस वैद्य
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

अहमदाबाद के मांडल तहसील के वरमोर गांव में गरासिया (राजपूत) युवती के साथ शादी करने वाले दलित युवक को पुलिस के ही सामने मार डाला गया. मामले में युवती के पिता समेत आठ लोगों को अभियुक्त बनाया गया है.

घटना सोमवार शाम की है. हरेश सोलंकी दो महीने से गर्भवती अपनी पत्नी उर्मिला झाला को लेने अपने ससुराल गए थे. उनके साथ 181 पुलिस वाहन और हेल्पलाइन अधिकारी भी थे.

दावा है कि उसी समय आठ लोगों ने धारदार हथियार से हरेश सोलंकी पर हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई. हेल्पलाइन सर्विस के स्टाफ, महिला कॉन्सटेबल को भी चोट आई है.

इस पूरे मामले में अभयम (पुलिस वाहन) ऑफिसर चश्मदीद हैं और फरियादी भी वही बने हैं.

मृतक हरेश सोलंकी परिवार में कमाने वाले अकेले व्यक्ति थे. उनकी हत्या होने से उनके परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है.

पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ लिया है और बाकी सब फरार हैं.

गर्भवती पत्नी

कच्छ ज़िले में अंजार तहसील के वरसामेडी गांव के हरेश सोलंकी ने अहमदाबाद के मांडल तहसील के वरमोर गांव की उर्मिला झाला के साथ प्रेम विवाह किया था.

पिछले दो महीने से उर्मिला अपने मायके में रह रही थीं. पत्नी को अपने साथ ले जाने के लिए हरेश सोलंकी ने 181 अभयम (पुलिस वाहन) की मदद ली थी.

फरियादी भाविका बेन नवजीभाई ने कहा, "हरेश सोलंकी ने कहा था कि उनकी पत्नी दो महीने से गर्भवती हैं. इसलिए अच्छा होगा आप मेरे ससुर परिवार को समझाने के लिए आएं."

गुजरात सरकार ने गुजरात की महिलाओं की सुरक्षा के लिए 181 अभयम नाम की टोल फ्री सेवा शुरू की है, जो गुजरात पुलिस की 1091 हेल्पलाइन की पूरक सेवा के तौर पर काम करती है.

अभयम महिला को काउंसलिंग, मार्गदर्शन और परेशानी से बचाने का काम करता है.

निशस्त्र महिला पुलिस कॉन्स्टेबल अर्पिता बेन और ड्राइवर सुनिल भी उनके साथ गए थे.

'ससुर ने बुलाया था'

हरेश सोलंकी अभयम टीम के साथ उर्मिला बेन के पिता दशरथ सिंह झाला के घर आने के लिए तैयार हुए.

तीन साल से हेल्पलाइन काउंसल के तौर पर काम कर रही भाविका बेन ने हरेश भाई को आगाह किया था कि दोनों परिवार के बीच कोई पुलिस केस या मतभेद चल रहे हों, तो वहां जाना सही नहीं है.

उनके जवाब में हरेश ने कहा था कि ऐसा कुछ नहीं है. उन्होंने कहा था, "आपको कोई घर नहीं दिखाएगा. मैं आपके साथ आता हूं. उर्मिला के पिता मुझे जानते हैं."

हरेश ने कहा, "उर्मिला खुशी-खुशी गई है. मैं आपको दूर से उनका घर दिखा दूंगा."

अभयम ऑफिसर भाविका बेन और कॉन्स्टेबल अर्पिता बेन अभियुक्त दशरथ सिंह के घर गए थे. हरेश ने वरमोर गांव में उनकी पत्नी उर्मिला का घर दिखाया था और खुद अभयम वैन में ड्राइवर के साथ बैठे थे.

'दलित अपनी लड़की को भगा ले गया'

भाविका बेन ने फरियादी हरेश सोलंकी की पत्नी उर्मिला बहन, उनके पिता दशरथ सिंह, भाई इंद्रजीत सिंह और परिवार की महिलाओं के साथ 15-20 मिनट बातचीत की.

विचार-विमर्श के बाद परिवार ने सोचने के लिए एक महीने का वक्त मांगा था. इसलिए अभयम स्टाफ वापस आ गया.

स्टाफ जब वापस आने लगा तो उर्मिला के पिता दशरथ सिंह भी उन्हें छोड़ने के लिए गाड़ी तक आए, जहां उन्हें हरेश को देख लिया.

एफआईआर के मुताबिक दशरथ सिंह ने कहा था, " दलित अपनी लड़की को भगा ले गया है. वो गाड़ी में ड्राइवर के पास बैठा है. उसे बाहर निकालकर मार डालो."

फिर उन्होंने अभयम गाड़ी के सामने ट्रेक्टर और बाइक लगा दी और अभयम स्टाफ पर भी हमला किया.

महिला कॉन्स्टेबल अर्पिता बेन के साथ भी मार-पीट की गई. बाद में उन्होंने 181 में फोन करके पुलिस बुलाई.

हरेश की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. 15 मिनट बाद पुलिस आ गई. उन्होंने हरेश की लाश को सरकारी अस्पताल पहुंचाया.

'अकेला कमाने वाला था'

हरेश सोलंकी के चाचा शांतिलाल के मुताबिक, "पूरा परिवार हरेश भाई पर निर्भर था और उनकी हत्या कर दी गई."

उन्होंने बताया, "हरेश के पिता यशवंत भाई पहले सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर नौकरी करते थे. अब उनके पास कोई काम नहीं है."

"हरेश प्राइवेट कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करते थे. छोटे भाई संजय मज़दूरी करते हैं. एक साल पहले उन्हें सरकारी योजना के तहत मकान मिला था. जिनके लोन की किश्त हरेश भरते थे. हरेश की एक बहन है, जिनकी शादी हो चुकी है."

पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धारा लगाकर शिकायत दर्ज करके कार्रवाई शुरू की है.

अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस सुप्रिटेंडेंट वीएस असारी ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा, "इस केस में आठ अभियुक्त में से एक को हिरासत में लिया गया है और बाकी सब फरार हैं. उनकी तलाश के लिए पांच टीम बनाई गई है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)