चेन्नई जल संकट: पानी के लिए त्राहि- त्राहि

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पानी भरने के लिए लगी लंबी-लंबी कतारें और कतारों में लगे लोगों के बीच होती लड़ाई, बहुत से लोग पानी की किल्लत के चलते नहा नहीं पा रहे हैं. होटल में लोगों को पानी के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी जा रही है.
यह हाल है भारत के छठे सबसे बड़े शहर चेन्नई का, जहां इसी सप्ताह चार जलाशय सूख गए.
और अब जबकि बहुत कम मात्रा में पानी बचा हुआ है तो ये बता पाना मुश्किल है ये पानी आख़िर कब तक चलेगा.
पानी की इस क़िल्लत का परिणाम ये है कि चेन्नई की लगभग चालीस लाख से ज़्यादा आबादी के लिए एकमात्र आसरा अब सिर्फ़ सरकारी पानी टैंकर ही हैं.
कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ऊंची क़ीमत देकर पानी के टैंकर अपने घरों पर बुलवाते हैं. महंगे होने के बावजूद इन टैंकरों को पहुंचने में चार दिन का समय लग जाता है.
कुछ जगहों पर तो लोग कुंए से भी पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन पानी ज़मीन के इतने नीचे जा चुका है कि वहां से पानी मिल पाना भी बहुत मुश्किल है.

ये वो वक़्त है जब देश के अधिकांश शहर पानी की क़िल्लत से जूझ रहे हैं. लोगों को इस बात का डर भी है कि कब उनके घर में लगे नल से पानी आना बंद हो जाए.
लेकिन इस साल मानसून आने में देरी के चलते शहर में पानी का समस्या बढ़ गई है.
छोटे रेस्त्रां को बंद किया जा रहा है जबकि कुछ ऑफ़िस में वर्क फ्रॉम होम का नियम लागू किया गया है ताकि ऑफ़िस में पानी बचाया जा सके. शहर के मेट्रो सिस्टम ने अपने स्टेशनों पर एयर कंडीशनिंग का उपयोग करना भी बंद कर दिया है ताकि पानी बचाया जा सके.
होटलों ने भी अपने मेहमानों के लिए पानी बचाना शुरू कर दिया है.
शहर में मौजूद एक छोटे से होटल के सुपरवाइज़र पी चंद्रशेखर ने अपने मेहमानों को पानी की एक-एक बूंद के प्रति ज़िम्मेदार होने के लिए कहा है. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ़ हमारी बात नहीं है शहर के बहुत से होटलों के पास पानी नहीं है और इसलिए वे बंद होने की क़गार पर आ पहुंचे हैं.
हालांकि गुरुवार को ऐसी कुछ ख़बरे ज़रूर मिलीं जिनमें कहा गया कि शहर में बारिश हुई है. क़रीब 190 दिनों में हुई पहली बारिश की खुशी को साझा करने के लिए लोगों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया.
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रेडियो प्रस्तोता जोहा ने बीबीसी को बताया " शहर इस समय मौसम से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहा है." उनका दावा है कि बीते दस सालों में ये पहला मौक़ा है जब इतने लंबे समय तक शहर में बारिश नहीं हुई है.
"ऐसी कोई तय रक़म नहीं है जिससे आप पानी ख़रीद सकें. ऐसे बहुत से लोग हैं जो पानी के कुछ लीटर के लिए हज़ारों रुपये ख़र्च करने को तैयार हैं लेकिन बावजूद इसके वो पानी नहीं ख़रीद पा रहे हैं."
"मॉल्स बंद हो गए हैं. पानी की कमी के कारण सार्वजनिक शौचालय और ऐसी ही दूसरी सेवाओं पर असर पड़ा है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि जितनी जल्दी हो सके यहां बारिश हो जाए और हमें दोबारा पानी मिल जाए."
पुनीता दो बच्चों की मां हैं. उन्होंने एनडीटीवी को बताया कि वो हर दूसरे दिन घंटों इंतज़ार में बैठती हैं कि कब सरकारी पानी का टैंक आए और वो पानी भर सकें.

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"हमारे बच्चे स्कूल और कॉलेज नहीं जा पा रहे हैं. हम रात एक और दो बजे भी पानी जमा कर रहे हैं."
कई जगहों पर लोगों के बीच झड़प की ख़बरें भी आईं कि पानी लेने के लिए कतार बनाकर खड़े लोगों के बीच पानी को लेकर लड़ाई हो गई.
शहर में रहने राजसिंहन ने बीबीसी को बताया कि बीते कुछ सालों में पानी की ऐसी क़िल्लत पहले कभी नहीं हुई थी. पिछले महीने से तो पानी की स्थित बहुत ही ख़राब हो गई है. और अगर आने वाले कुछ दिनों में बारिश नहीं होती है तो परिस्थिति और ख़राब हो जाएगी. नल से पानी आना बंद हो चुका है."
अक्षय एक फ़ूड ब्लॉगर हैं उन्होंने बीबीसी को बताया कि पानी के बिना ज़िंदा रहना मुश्किल होता जा रहा है. हर दिन महंगा होता पानी अब उनकी ख़रीदने की क्षमता से बाहर होता जा रहा है.
वो कहते हैं "होटल और रेस्त्रां में भी पानी नहीं रह गया है. जब हम वहां जाते हैं तो वे हमें पानी दे दे रहे हैं जो सेहत के लिहाज़ से बिल्कुल भी अच्छा नहीं. मैं लोगों को पानी बचाने के जागरुक करने की कोशिश कर रहा हूं. मैं अपने दोस्तों को इसके बारे में बताने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन देखते हैं कि क्या होता है."
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