लोकसभा चुनाव 2019: वो हाईप्रोफ़ाइल सीटें जिनके नतीजों का था इंतजार

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- Author, अभिजीत श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लोकसभा चुनाव 2019 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 303 सीटों पर रिकॉर्ड जीत हासिल की है.
इस चुनाव में जहां बीजेपी ने 2014 की ही तरह कई राज्यों में सभी सीटों पर जीत हासिल की है वहीं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और असम जैसे राज्यों में पहले से कहीं बेहतर प्रदर्शन भी किया.
11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में लोकसभा की 542 सीटों के लिए हुए चुनाव में उतरे कुल 8,040 उम्मीदवारों की किस्मत का फ़ैसला हो गया है तो देखते हैं कि कौन-कौन से कद्दावर चेहरे यह चुनाव हार गये और वो कौन-कौन से बड़े नाम थे जिन्हें जनता ने अपना प्रतिनिधि चुना.
बात करते हैं उन बहुचर्चित उम्मीदवारों और वैसी हाईप्रोफ़ाइल सीटों का हाल, जिन पर सबकी नज़रें थीं.

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1. नरेंद्र मोदी, वाराणसी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से 4,79,505 वोटों से जीते. उन्हें 6 लाख 75 हज़ार से भी अधिक वोट मिले. 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने यहां अरविंद केजरीवाल को 3,71,784 वोटों से हराया था. यहां से मैदान में उतरे कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय की जमानत ज़ब्त हो गई. उन्हें महज 1 लाख 53 हज़ार वोट मिले.
जब कोई प्रत्याशी अपने चुनाव क्षेत्र में पड़े कुल वोटों का छठा हिस्सा भी हासिल नहीं कर पाता है तो उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त मानी जाती है और नामांकन के दौरान दी गई उनकी राशि ज़ब्त हो जाती है.
2019 के चुनाव में वाराणसी में क़रीब 10 लाख 60 हज़ार वोट पड़े.
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2. अमित शाह, गांधीनगर
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पहली बार लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे और 5 लाख 55 हज़ार से अधिक वोटों से जीत हासिल की.
गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी को लगभग 3 लाख 35 हज़ार वोट मिले तो अमित शाह को लगभग 9 लाख वोट. अन्य सभी 16 प्रत्याशियों की जमानत ज़ब्त हो गई.
इस सीट से जीत कर लाल कृष्ण आडवाणी जैसे बीजेपी के कद्दावर नेता संसद पहुंच चुके हैं.
चुनाव के दौरान इस बात की चर्चा थी कि बीजेपी की पारंपरिक सीट पर क्या अमित शाह रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करेंगे और चुनाव परिणाम में उन्होंने यहां न केवल अब तक के सबसे बड़े अंतर से जीत हासिल की बल्कि अब तक सबसे अधिक वोट हासिल करने वाले नेता भी साबित हुए.
2014 के चुनाव में लाल कृष्ण आडवाणी को यहां 7,73,539 वोट मिले थे.
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3. स्मृति ईरानी, अमेठी
लोकसभा चुनाव 2019 में जिस एक सीट से बीजेपी की जीत को सबसे बड़ा माना जा रहा है वह अमेठी है.
अमेठी कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ है और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यहीं से चुनकर बीते तीन बार से लोकसभा में जाते रहे हैं. यह लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी को मिली पहली जीत भी है.
स्मृति इससे पहले 2014 में भी अमेठी से ही चुनाव मैदान में उतरी थीं लेकिन तब राहुल गांधी ने उन्हें 1,07,903 वोटों से हराया था.
हालांकि, स्मृति ईरानी केंद्र में मंत्री बनाई गईं और साथ ही अमेठी कड़ी मेहनत में जुटी रहीं.
23 मई को राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के नतीजे घोषित किये जाने से पहले ही अमेठी से हार मानते हुए स्मृति ईरानी को जीत की बधाई दे दी और साथ ही ये भी कहा कि वो वहां की जनता का ख्याल रखें और उनकी अपेक्षा पर खरी उतरें.
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4. राहुल गांधीः वायनाड में रिकॉर्ड जीत
कांग्रेस अध्यक्ष भले ही अमेठी के अपने पारिवारिक गढ़ को गंवा बैठे हों. वो केरल की वायनाड सीट से 431,770 मतों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की.
राहुल गांधी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पीपी सुनीर को पराजित किया जिन्हें 274,597 वोट मिले, जबकि राहुल गांधी को 7,06,367 वोट हासिल हुए.
केरल में यह किसी भी प्रत्याशी की सबसे बड़ी जीत है. पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने भारी जीत पर प्रसन्नता व्यक्त की. सबसे पहले उन्होंने ही राहुल गांधी की उम्मीदवारी की घोषणा की थी.
चांडी ने कहा, "इस परिणाम की उम्मीद पहले से थी, क्योंकि जिस दिन उनके नाम की घोषणा हुई थी, वायनाड के लोगों ने उन्हें स्वीकार कर लिया था. इस क्षेत्र में जब भी उनका दौरा हुआ. पहली बार जब वह नामांकन भरने आए और उसके बाद एक दिन के प्रचार के लिए आए, कांग्रेस का हर कार्यकर्ता वाकई उत्साहित था. उनकी उपस्थिति के कारण सभी उम्मीदवारों का मनोबल बढ़ा और यही कारण है कि हम केरल में इस तरह की भारी जीत हासिल कर सके."
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5. कन्हैया कुमार, बेगूसराय
लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान बिहार की बेगूसराय सीट सबसे हॉट सीटों में से एक थी. यह सीट देशद्रोह का आरोप झेल रहे जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के यहां से चुनावी मैदान में उतरने की वजह से सुर्खियों में रही.
इस सीट पर बीजेपी ने भी अपने कद्दावर नेता गिरिराज सिंह को उतार कर मुक़ाबला बेहद रोमांचक बना दिया था.
हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान यहां इन दोनों के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही थी लेकिन जब नतीजे आये तो कन्हैया कुमार यहां गिरिराज सिंह से लगभग 4 लाख 20 हज़ार वोटों से हार गये.
कन्हैया को क़रीब 2 लाख 68 हज़ार वोट ही मिले. वहीं तीसरे स्थान पर रहे आरजेडी के मोहम्मद तनवीर हसन को क़रीब दो लाख वोट मिले.
6. ज्योतिरादित्य सिंधिया, गुना
बीते साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मध्य प्रदेश में मिली जीत के पीछे रहे चेहरों में से एक ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना सीट से 1,25,549 वोटों से चुनाव हार गए.
माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य के लिए यह दोहरी हार है, क्योंकि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी थे, जहां पार्टी का पूरी तरह सफाया हो गया है.
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7. गौतम गंभीर, पूर्वी दिल्ली
बीजेपी ने 2014 की ही तरह दिल्ली की सभी सात सीटों पर जीत का परचम लहराया है. यहां चुनाव के दौरान सबसे चर्चित सीटों में से एक थी पूर्वी दिल्ली.
इस सीट से क्रिकेट के मैदान से संन्यास लेकर लोकसभा चुनाव में पहली बार उतरे क्रिकेटर गौतम गंभीर चुनावी मैदान में थे और उन्होंने जीत का परचम लहराते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली को 3.91 लाख मतों से हराया है.
चुनाव प्रचार के दौरान यह सीट गौतम गंभीर और आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार आतिशी मार्लेना के कारण लगातार चर्चाओं में बनी हुई थीं.
मार्लेना ने बीजेपी उम्मीदवार गौतम गंभीर पर गंभीर आरोप लगाए थे.
आतिशी ने गौतम गंभीर के ख़िलाफ़ ऐसे पर्चे बांटने का आरोप लगाया था जिसमें उनके (आतिशी के) लिए बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था.
इस पर गंभीर ने कहा था कि यदि वो यह साबित कर देती हैं तो जीतने के बावजूद वो राजनीति से संन्यास ले लेंगे.
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8. सनी देओल, गुरदासपुर
गुरदासपुर सीट से बीजेपी ने सनी देओल को अपना प्रत्याशी बनाया था जो वोटों के अंतर से चुनाव जीतकर चुने गए हैं. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार सुनील जाखड़ को 82,459 वोटों से हराया.
इस सीट पर 2014 में भी बीजेपी ही जीत हुई थी. तब दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना ने यहां 1.36 लाख मतों से जीत हासिल की थी.
बॉलीवुड के एक्शन हीरो रहे सनी देओल की यह पहली राजनीतिक पारी है.
दोपहर को जब मतगणना चल रही थी तब सनी देओल ने अपनी जीत के रुझान पर मीडिया से बातचीत में कहा कि "मुझे बहुत खुशी है कि मोदी जी जीत रहे हैं. मुझे इस बात की खुशी है कि मेरी जीत हो रही है. अब बस मेरा एक ही उद्देश्य है कि मुझे जो जीत मिली है उसके बदले में काम करूं. अपने क्षेत्र को बेहतर बना सकूं. यही मेरी ज़िम्मेदारी है. लोगों ने जो प्यार दिया उससे बहुत खुशी मिली. मैं यहां कोई इरादा लेकर नहीं आया था, बस अपना काम करूंगा.''
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9. आज़म ख़ान, रामपुर
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को पांच सीटों आज़मगढ़, मैनपुरी, मुरादाबाद, संभल और रामपुर पर जीत मिली है.
आज़मगढ़ से अखिलेश यादव, मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव, मुरादाबाद से डॉ. एसटी हसन, संभल से डॉ. शफीक़ुर रहमान बर्क और रामपुर से आज़म ख़ान जीते हैं.
इनमें से रामपुर की सीट चुनाव के दौरान बेहद चर्चा में रही क्योंकि बीजेपी ने यहां से फ़िल्म अभिनेत्री से राजनीति में आईं जया प्रदा को उतारा था और प्रचार के दौरान उन पर किये गये बयान की वजह से आज़म ख़ान के प्रचार करने पर प्रतिबंध भी लगाया गया था.
हालांकि, यहां की जनता ने आज़म ख़ान को अपना नेता चुना और उन्हें क़रीब 1 लाख 10 हज़ार वोटों से जीत मिली.
जया प्रदा को क़रीब साढ़े चार लाख वोट मिले वहीं आज़म ख़ान को लगभग साढ़े पांच लाख. वहीं तीसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के संजय कपूर (क़रीब 34 हज़ार वोट) का जमानत जब्त हो गया.
10. फजलुर्रहमान, सहारनपुर
उत्तर प्रदेश की सहारनपुर लोकसभा सीट पर गठबंधन भारी पड़ा है. यहां से गठबंधन से बसपा प्रत्याशी हाजी फजलुर्रहमान ने 22,417 वोटों से बीजेपी प्रत्याशी राघव लखनपाल शर्मा को हराया.
कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे. राघव लखनपाल 2014 में इसी सीट से संसद पहुंचे थे.
यह वहीं सीट है जहां लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान देवबंद में 7 अप्रैल को बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन की पहली संयुक्त रैली का आयोजन किया गया था और पहली बार अखिलेश, मायावती और अजित सिंह ने मंच साझा किया था.
11. प्रदीप सिंह, कैराना
बीजेपी ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की कैराना सीट अपने कब्जे में कर लिया है. बीजेपी के प्रदीप सिंह ने यहां 92,160 वोटों से जीत हासिल की है.
गठबंधन की रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हसन को 4,74,801 और प्रदीप सिंह को 5,66,961 वोट मिले. तीसरे स्थान पर रहे कांग्रेसी उम्मीदवार हरेंद्र सिंह मलिक की वैसे तो जमानत जब्त हो गयी लेकिन वो गठबंधन की प्रत्याशी की हार की बड़ी वजह भी बने. उन्हें 69,355 वोट मिले.
2014 में यहां से बीजेपी की बड़े अंतर (2,36,828) से जीत हुई थी लेकिन बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुए इस सीट पर हुए उप चुनाव में विपक्षी एकता के सहारे रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हसन की जीत हुई थी.
2019 के चुनाव में सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन की वजह से यहां 2014 का प्रदर्शन दोहराना बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती थी.
12. सत्यपाल सिंह, बाग़पत
भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से मौजूदा सांसद सत्यपाल सिंह ने एक बार फिर मैदान मार लिया है.
हालांकि इस सीट पर 2014 की तुलना में उनकी जीत का अंतर बहुत कम रहा. उन्होंने आरएलडी प्रत्याशी जयंत चौधरी को 23,502 वोटों से हराया. 2014 में इसी सीट से वो 2,09,866 वोटों से जीते थे.
मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह ने तब जयंत चौधरी के पिता अजित सिंह को इस सीट से हराया था. इस सीट से कांग्रेस ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था.
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13. पूनम सिन्हा, लखनऊ
बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा लखनऊ में बीजेपी के राजनाथ सिंह से 3.47 लाख वोटों से चुनाव हार गई हैं. वो यहां से गठबंधन की सपा प्रत्याशी थीं.
पहली बार चुनाव मैदान में उतरीं पूनम को यहां क़रीब 25.59 फ़ीसदी वोट मिले और वो दूसरे स्थान पर रहीं.

14. जनरल वीके सिंह, गाज़ियाबाद
2008 में अस्तित्व में आई गाज़ियाबाद सीट पर 2009 से ही बीजेपी का वर्चस्व बना हुआ है. एक बार फिर जनरल विजय कुमार सिंह यहां से संसद पहुंच गये हैं.
2014 में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर को 5.57 लाख वोटों से हराया था.
इस बार उन्होंने गठबंधन के सपा प्रत्याशी सुरेश बंसल को 5.01 लाख मतों से हराया है. जबकि इस सीट पर तीसरे स्थान पर कांग्रेस की डॉली शर्मा रहीं जिन्हें 1.12 लाख वोट मिले.

15. महेश शर्मा, गौतमबुद्ध नगर
बीजेपी के केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा (8.30 लाख वोट) ने एक बार फिर इस सीट से जीत हासिल की है. इस सीट पर उनकी जीत 2014 की तुलना में अधिक वोटों से हुई है.
2014 में वो 2.80 लाख वोटों से जीते थे जबकि इस बार उन्हें 3.37 लाख वोटों से जीत मिली है.
2015 में दादरी क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में हुई मोहम्मद अख़लाक़ की हत्या मामले को लेकर यह लोकसभा सीट चर्चा में रही है.
2009 में यहां पहली बार लोकसभा चुनाव हुए जिसमें बसपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की.
इस बार यहां दूसरे स्थान पर महागठबंधन से बीएसपी प्रत्याशी सतवीर नागर (4.93 लाख) रहे. जबकि तीसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के डॉ. अरविंद कुमार सिंह (42 हज़ार वोट) की जमानत भी जब्त हो गई.
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16. हेमा मालिनी, मथुरा
बीजेपी की हेमा मालिनी ने मथुरा सीट एक बार फिर जीत ली है. उन्होंने 2.93 लाख वोटों से जीत हासिल की.
2014 के आम चुनाव में भी हेमा मालिनी ही यहां से बीजेपी सांसद बनी थीं.
जाट और मुस्लिम वोटरों के वर्चस्व वाले इस सीट पर तब उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी को हराया था. इस बार उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल के प्रत्याशी कुंवर नरेंद्र सिंह को हराया है.
17. भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सोनीपत
हरियाणा में एक बार फिर बीजेपी ने सभी सीटों पर जीत हासिल की है.
यहां तक कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सोनीपत में बीजेपी के निवर्तमान सांसद रमेश चंद्र कौशिक से 1.64 लाख वोटों के अंतर से हार गए.
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर भी सिरसा से हार गए और पार्टी की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा अंबाला से चुनाव हार गयीं.

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18. महबूबा मुफ़्ती, अनंतनाग
जम्मू-कश्मीर की जिस एक लोकसभा सीट की चर्चा चुनाव के दौरान रही वो है अनंतनाग क्योंकि यहां तीन चरणों में मतदान संपन्न हुए थे.
यह पहली बार था जब किसी एक सीट पर तीन चरणों में वोट डाले गये. साथ ही यह सीट इसलिए भी चर्चा में थी क्योंकि यहां से जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ़्ती चुनाव लड़ रही थीं.
चुनाव नतीजों में महबूबा मुफ़्ती यहां से तीसरे स्थान पर रहीं और उनके नेतृत्व वाली पीडीपी को जम्मू-कश्मीर की सभी छह सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है.
अनंतनाग से जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी को जीत मिली जबकि कांग्रेस प्रत्याशी गुलाम अहमद मीर दूसरे और बीजेपी के सोफी यूसुफ़ चौथे नंबर पर रहे चुनाव के नतीजों के आने के बाद महबूबा मुफ़्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ट्वीट के जरिये जीत की बधाई भी दी.
उन्होंने लिखा, "नरेंद्र मोदी को ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त करने के लिए बधाई. आज का दिन निश्चित रूप से बीजेपी और उसके सहयोगियों का है. अब वक्त आ गया है कि कांग्रेस के पास भी एक अमित शाह हो."
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19. कविता, निजामाबाद (तेलंगाना)
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता को निजामाबाद लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी ने हरा दिया. टीआरएस के राज्यसभा सदस्य डी श्रीनिवास के बेटे और चुनावी राजनीति में पहली बार कदम रखने वाले डी अरविंद यहां से 71 हज़ार मतों के अंतर से जीते हैं.
कविता को 2014 के चुनाव में 1.67 लाख वोटों से जीती थीं. निजामाबाद तब सुर्खियों में आया था जब 177 किसान चुनावी मैदान में उतरे थे.

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20. शशि थरूर, तिरूवनंतपुरम
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर एक बार फिर लोकसभा पहुंच गये हैं. उन्होंने तिरूवनंतपुरम सीट से चुनाव जीता है. इस सीट पर शशि थरूर से चुनाव लड़ने के लिए मार्च में मिजोरम के राज्यपाल पद से इस्तीफ़ा देकर कुम्मनम राजशेखरन उतरे थे.
66 वर्षीय राजशेखरन ने 1970 के दशक में आरएसएस के कार्यकर्ता के तौर अपना सफर शुरू किया था और दिसंबर 2015 से मई 2018 तक वह बीजेपी की केरल इकाई के अध्यक्ष रहे और फिर मिजोरम के राज्यपाल बनाए गए थे. थरूर ने उन्हें एक लाख वोटों के अंतर से हराया. वो इस निर्वाचन क्षेत्र से तीसरी बार जीते हैं.
अपनी जीत और बीजेपी की जीत के बाद थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट भी किया.
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21. रवि किशन, गोरखपुर
इस सीट पर बीजेपी के रवि किशन और सपा-बसपा-रालोद उम्मीदवार रामभुआल निषाद के बीच मुक़ाबला था जबकि कांग्रेस के मधुसूदन तिवारी मुक़ाबले को त्रिकोणीय बना रहे थे. हालांकि नतीजों में रवि किशन को 3 लाख से भी अधिक वोटों से जीत मिली जबकि गठबंधन के सपा प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे.
2014 में इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी कृष्ण प्रताप सिंह महज 42 हज़ार वोटों से जीते लेकिन 2018 में हुए उपचुनाव में बीजेपी ने ये सीट गंवा दी थी और सपा-बसपा और निषाद पार्टी के संयुक्त प्रत्याशी प्रवीण निषाद विजयी हुए थे.
हालांकि इस चुनाव से पहले निषाद पार्टी ने बीजेपी का दामन थाम लिया था जिससे रवि किशन की राह आसान हो गई मानी जा रही थी. इस बार यहां से कांग्रेस प्रत्याशी मधुसूदन तिवारी का जमानत जब्त हो गया है.
22. बाबुल सुप्रियो, आसनसोल
पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 2014 में दो सीटें जीती थीं लेकिन इस बार वहां उसे 18 सीटों पर जीत मिली है. चुनाव के दौरान बंगाल की जिस सबसे चर्चित सीट पर सबकी नज़र टिकी हुई थी वो है आसनसोल.
यहां से बीजेपी के केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने तृणमूल कांग्रेस की मुनमुन सेन को 1 लाख 97 हज़ार से अधिक वोटों से हराया है.
23. ग़ाज़ीपुर, मनोज सिन्हा
बीजेपी के केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा गाजीपुर से चुनाव हार गये हैं. 2014 में इस सीट से मनोज सिन्हा ने समाजवादी पार्टी के शिवकन्या कुशवाहा को क़रीब 32 हज़ार वोटों से हराया था. इस बार मनोज सिन्हा गठबंधन के अफजाल अंसारी से 1.19 लाख वोटों से हार गये हैं.

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24. संजय निरूपम, मुंबई उत्तर-पश्चिम
मुंबई उत्तर पश्चिम सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता संजय निरूपम चुनाव हार गए हैं. शिवसेना के गजानन कीर्तिकर ने निरूपम को 2 लाख 51 हजार वोटों से हराया. फ़िल्म से राजनीति का सफ़र तय करने वाले सुनील दत्त की वजह से मुंबई उत्तर सीट मशहूर रही है. सुनील दत्त यहां से 18 साल सांसद रहे.
1967 से 1977 तक ये सीट कांग्रेस के पास रही और उसके बाद जानेमाने वकील राम जेठमलानी पहले जनता पार्टी बाद में बीजेपी के सांसद बने. फिर 1984 से 1996 तक कांग्रेस के सांसद और फिल्म अभिनेता सुनील दत्त का दौर रहा.
2005 में सुनील दत्त की मौत के बाद हुए उपचुनाव में उनकी बेटी प्रिया दत्त सांसद चुनी गई थीं. 2009 में भी ये सीट कांग्रेस के पास रही लेकिन फिर 2014 में शिवसेना के गजानन कीर्तिकर ने इस सीट को जीत लिया.

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25. पटना साहिब, शत्रुघ्न सिन्हा
2014 में बीजेपी के टिकट पर 2.65 लाख वोटों से जीते शत्रुघ्न सिन्हा इस बार यहां से 2.84 लाख वोटों से हार गये.
गांधी मैदान पटना साहिब की एक बड़ी पहचान है जहां कई बड़े नेताओं ने रैलियां की हैं. कभी सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, राम मनोहर लोहिया और अटल बिहारी वाजपेयी भी रैलियां कर चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यहां रैली की है. जयप्रकाश नारायण ने 1974 में इसी मैदान से संपूर्ण क्रांति की बात कही थी.
परिसीमन के बाद 2009 में पहली बार यहां लोकसभा चुनाव हुए जिसमें बीजेपी के टिकट पर शत्रुघ्न सिन्हा की जीत हुई. 2014 में वे फिर से यहीं से सांसद बने. कायस्थ बहुल इस सीट पर इस बार बीजेपी ने उनका टिकट काटकर केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद को दे दिया था.
26. शीला दीक्षित, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली सीट से दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और आम आदमी पार्टी के दिलीप पांडेय के बीच मुक़ाबला था जिसे मनोज तिवारी ने 3,66,102 वोटों से अंतर से जीत लिया है.
तिवारी को 7,87,799 (53.9 फ़ीसदी) वोट, जबकि दीक्षित को 4,21,697 (28.85 फ़ीसदी) वोट मिले.
वहीं आम आदमी पार्टी (आप) के दिलीप पांडेय 1,90,856 (13.06 फ़ीसदी) वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. 2014 में भी मनोज तिवारी इसी सीट से संसद पहुंचे थे.
माना तो यहां तक जा रहा है कि इस सीट के नतीजे दिल्ली में कांग्रेस और बीजेपी का भविष्य तय करेगी क्योंकि 2020 में यहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

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27. प्रज्ञा ठाकुर, भोपाल
बीजेपी की जिस दूसरी महिला नेता की सबसे ज़्यादा चुनाव प्रचार के दौरान चर्चा रही वो हैं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर. साध्वी ने भोपाल सीट से संसद का रुख किया है.
उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह को 3,64,822 वोटों से हराया. इस सीट से जीत कर कांग्रेस के शंकरदयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति), बीजेपी की उमा भारती, सुशील चंद्र वर्मा और कैलाश जोशी कभी संसद पहुंचे थे.
बीजेपी प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर इस चुनाव के दौरान बहुत विवादों में रही हैं. उन्हें मालेगांव बम ब्लास्ट मामले के एक अभियुक्त के तौर पर जाना जाता है.
साध्वी प्रज्ञा ने पत्रकारों से बात करते हुए दिग्विजय सिंह को देश का दुश्मन बताया. उन्होंने कहा, "मैं देश के दुश्मनों के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए तैयार हूं." इसके अलावा भी उन्होंने कई ऐसे बयान दिये जिस पर बहुत विवाद हुआ. इसमें से एक था "नाथूराम गोडसे को देशभक्त" बताना.

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28. उर्मिला मातोंडकर, मुंबई उत्तर
इस बार के लोकसभा चुनाव में मुंबई उत्तर लोकसभा सीट सबसे चर्चित सीटों में से एक रही है क्योंकि कांग्रेस ने यहां से बॉलीवुड अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर को उम्मीदवार बनाया है. लेकिन कांग्रेस का यह दांव सफल नहीं हो सका और उर्मिला 4.65 लाख वोटों से हार गईं.
यहां से बीजेपी के प्रत्याशी गोपाल शेट्टी ने एक बार फिर जीत हासिल की है. यह सीट 1989, 1991, 1996, 1998 और 1999 में भी बीजेपी के खाते में गई थी. जबकि 2004 कांग्रेस के टिकट पर गोविंदा यहां से जीते थे तो 2009 में कांग्रेस के संजय निरुपम.
29. सीआर पाटिलः बड़े अंतर से जीत
दक्षिण गुजरात की नवसारी सीट से दोबारा मैदान में उतरे बीजेपी प्रत्याशी सीआर पाटिल ने लोकसभा चुनाव 2019 में सबसे बड़े अंतर से जीत हासिल की है. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 6,78,545 मतों के अंतर से हराया है.
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