लोकसभा चुनाव 2019: इस बार देर से आएंगे चुनाव नतीजे, वजह है VVPAT

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17वें आम चुनावों के लिए मतगणना 23 मई को होनी है.
इस चुनाव में पहली बार VVPAT (वोटर वेरिफियेबल पेपरऑडिट ट्रायल) का इस्तेमाल देश भर में हो रहा है जिसकी वजह से नतीजे आने में कुछ घंटों की देरी होगी.
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि आख़िरी नतीजे आने में कम से कम पांच से छह घंटे की देरी होगी.
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चुनाव आयोग के सीनियर डिप्टी कमिश्नर उमेश सिन्हा ने राज्यसभा टीवी को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा है कि ईवीएम की गिनती ख़त्म होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक़ वीवीपैट रिज़ल्ट से उसे मैच किया जाएगा.

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इस बार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से पांच वीवीपैट मशीनों और ईवीएम नतीजों को मिलान किया जाएगा जबकि पहले हर विधानसभा क्षेत्र में एक वीवीपैट मशीन का इस्तेमाल किया जाता था.
राजनीतिक दल हाल के दिनों में वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं.
वीवीपैट इस बात को तय करने में मददगार होगी कि ईवीएम में मतदाता ने जिस दल को वोट दिया है वो वीवीपैट से मैच कर रहा है या नहीं.

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आधे वोटों पर वीवीपैट मिलान चाहता था विपक्ष
वीवीपैट का प्रयोग सबसे पहले नगालैंड के नक्सन विधान सभा चुनाव के दौरान किया गया था. इसके बाद 2014 के संसदीय चुनाव में इस मशीन का इस्तेमाल लखनऊ, गांधी नगर, बेंगलुरु दक्षिण, मध्य चेन्नई, जादवपुर, रायपुर, पटना साहिब और मिज़ोरम में किया गया.
इसके बाद, 2017 में गोवा के विधानसभा चुनावों में वीवीपैट मशीनों का उपयोग किया गया था.
इन मशीनों का इस्तेमाल वर्तमान संसदीय चुनावों में पहली बार पूरे देश में किया गया है.
इस मामले में 21 विपक्षी दल ने सर्वोच्च न्यायालय में अर्ज़ी देकर मांग की थी कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के 50 प्रतिशत वोटों को वीवीपैट के साथ मिलाया जाए. लेकिन चुनाव आयोग का कहना था कि पचास फीसदी ईवीएम और वीवीपैट को मैच करने में कम कम पांच दिन लग जाएंगे जिससे नतीजे आने में देरी हो जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पांच ईवीएम और वीवीपैट में पड़े वोटों की जांच की जाए.
चुनाव आयोग ने फ़ैसला किया है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से पांच-पांच वीवीपैट का चयन 'रैंडमली' यानी बिना किसी क्रम के किया जाएगा और ईवीएम और वीवीपैट के नतीजों को मैच किया जाएगा.
इस काम के लिए हर काउंटिंग हॉल में वीवीपैट बूथ बनाया गया है.
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