पटना में अमित शाह के रोड शो की ऑंखों देखी: लगे बार-बार मोदी सरकार के नारे...

- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना से
बिहार के पटना साहिब लोकसभा सीट में शनिवार शाम को भारतीय जनता पार्टी ने अपनी ताकत को दिखाने के लिए विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा के आवास वाले इलाके को ही चुना.
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के समर्थन में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कदमकुंआ के बुद्ध मूर्ति चौक से लेकर कारगिल चौक तक करीब दो किलोमीटर लंबा रोड शो निकाला.
इस रोड शो के दौरान पूरे दो किलोमीटर का रास्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बैनर कट आउट और बीजेपी के झंडे से पटा रहा. इन्हें हाथों में संभाले कार्यकर्ताओं का समूह मोदी-मोदी-मोदी के नारों से गूंज उठता था.
पार्टी के समर्थक कार्यकर्ताओं का पहुंचना तो दोपहर बारह बजे के बाद ही शुरू हो गया था लेकिन चार बजे आते-आते ये बात साफ होने लगी थी कि इवेंट को मेगा इवेंट में तब्दील करने में बीजेपी के आस-पास कोई दूसरी पार्टी नहीं है.
हालांकि पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता ने बताया, "देखिए एक तो पटना साहिब का इलाका हम लोगों का गढ़ है. रविशंकर बाबू हमारे सुख-दुख के साथी हैं. छह में पांच हमारे विधायक हैं तो ये व्यवस्था तो हम महज़ दो घंटे में कर सकते हैं."

'शत्रुघ्न को औकात पता चल जाएगा'
बीजेपी के स्थानीय विधायक ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी भी कार्यक्रम को कामयाब बनाने में जुटे थे.
अधिवक्ता संघ के एक वकील ने बताया, "यहां शत्रुघ्न सिन्हा को अपनी औकात का पता चल जाएगा."
बीजेपी के पुराने नेता नंदकिशोर यादव कहते हैं, "शत्रुघ्न सिन्हा पार्टी के नाम पर, संगठन के दम पर चुनाव जीतते थे, ये बात 23 मई को उन्हें पता चल जाएगी."
एक अन्य कार्यकर्ता ने कहा, "बताइए ये कौन-सी बात हुई. यहां कांग्रेस मे चले गए और पत्नी समाजवादी पार्टी में. कल कहाँ चले जाएंगे. इसका कोई भरोसा नहीं है."
एक बुजुर्ग कार्यकर्ता मटमैली धोती कुर्ता में थे और चेहरे पर झुर्रियां. पूछने पर बोले विद्यापति नगर से आया हूं. ये इलाका उजियारपुर लोकसभा सीट के अधीन है, जो बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय का चुनावी क्षेत्र है.

योजनाओं का बखान
इस कार्यकर्ता के मुताबिक सौ लोग करीब विद्यापति नगर से ही आए हैं, मैंने पूछा कि कैसे? बस से? तो उनका जवाब था क्या बात करते हैं, हम सब लोग पांच-पांच लोग बोलेरो में आए हैं.
इसी तरह से भारतीय जनता पार्टी के झंडे वाली साड़ियों में कम से कम सौ महिला कार्यकर्ताओं का समूह भी नज़र आता है. इन महिला कार्यकर्ताओं से चुनावी बात छिड़ते ही सबके सब मोदी सरकार की योजनाओं के नाम गिनवाने शुरू कर दिए.
एक महिला ने कहा कि मोदी जी ने गरीबों के लिए क्या-क्या काम नहीं किया, सब काम उन्होंने कर दिया. बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ के साथ उज्जवला योजना का ज़िक्र इन लोगों ने कई बार किया.
पांच बजे तक बुद्ध मूर्ति मार्ग पर लोग एक-दूसरे से टकराने लगे. वैश्य समुदाय के कार्यकर्ता ने कहा कि मुझे तो समझ नहीं आ रहा है कि देश को मोदी जी से अच्छा क्या मिलेगा? उनके जैसा नेता मिलना मुश्किल है.

मोदी-मोदी के नारे
ये खबर पहुंच चुकी थी कि अमित शाह छह बजे तक पहुंचने वाले हैं. इसके बाद आयोजक मंडल तेज़ी से चीजों को संभालने में जुट जाता है.
कार्यकर्ताओं को कतार में खड़े हो जाने का निर्देश मिल जाता है. ठीक छह बजे अमित शाह रैली शुरू होने की जगह पहुंचते हैं. वो दो घंटे देरी से आए लेकिन उनके आने के साथ ही कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा हुआ नज़र आता है.
अमित शाह के साथ रविशंकर प्रसाद, भूपेंद्र यादव, सुशील मोदी, नित्यानंद राय, नंद किशोर यादव, सीपी ठाकुर और गिरिराज सिंह मौजूद थे.
अमित शाह के आने मात्र से माहौल में देशभक्ति गाने तैरने लगते हैं और वो वैन के पोडियम से वंदे मातरम के नारे लगाते हैं. भीड़ को देखकर वे मुस्कुरा भी रहे हैं लेकिन सबसे ज़्यादा उत्साह गिरिराज सिंह के चेहरे पर नज़र आता है. वो लगातार मोदी-मोदी-मोदी के नारे लगाते नज़र आते है.
बीजेपी पूरे देश में एक बार फिर मोदी सरकार के नाम पर चुनाव लड़ रही है लेकिन पटना में भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने अमित शाह के रोड शो को बार-बार मोदी सरकार में तब्दील कर दिया.

गले मे भगवा गमछा, मोदी की तस्वीर और मैं भी चौकीदार टी शर्ट पहने युवाओं की मानें तो पाकिस्तान को मोदी सरकार ने होश में ला दिया है. पर इलाकों में कितना काम हुआ है ये पूछने पर युवा कहता है ये आप सिन्हा जी से पूछिए ना.
बिहारी बाबू के बारे में रोड शो में शामिल संघ के कार्यकर्ता एक किस्सा बताते हैं, "1989 में गांधी मैदान में एक सभा थी. अटल बिहारी वाजपेयी जी की. शत्रुघ्न सिन्हा लेट पहुंचे वो भी तब, जब वाजपेयी जी का भाषण शुरू हो चुका था. वाजपेयी जी बोल रहे थे और ये स्टेज पर इधर-उधर घूमकर हाथ हिला रहे थे. वाजपेयी जी को बोलना पड़ा था कि शत्रुघ्न जी आप बिहारी हैं तो मैं भी अटल बिहारी हूं."
इस कार्यकर्ता के मुताबिक सिनेमा वाले स्टार सब पार्टी पर बोझ होते हैं लेकिन रवि किशन, निरहुआ, हेमामालनी और सन्नी देओल का नाम लेने पर वे कहते हैं कि अब आडवाणी और वाजपेयी जी वाला वक्त भी नहीं रहा है.

'बीजेपी को यहां सहयोगियों की क्या ज़रूरत'
करीब दो किलोमीटर को पूरा करने में अमित शाह के काफिले को 1.50 घंटा लगा. कार्यकर्ताओं की फेंकी मालाएँ कई बार उनके चेहरे और चश्मे से भी टकराईं. लेकिन वे खासे खुश नज़र आए.
हालांकि, इस रैली में हर ओर बीजेपी का झंडा बैनर ही नज़र आया, नीतीश कुमार वाले जनता दल यूनाइटेड और राम विलास पासवान की लोजपा का झंडा बैनर एकदम नज़र नहीं आया.
हाजीपुर के दीघा से आए एक कार्यकर्ता ने बताया कि ये इलाका बीजेपी का गढ़ है और यहां हमें सहयोगियों की क्या ज़रूरत है.
बहरहाल, पांच चरण के चुनाव बीतने और छठे चरण के मतदान के बाद अमित शाह के इस रोड शो का पहला मकसद तो अंतिम दो चरण के लिए कार्यकर्ताओं ही नहीं बल्कि समर्थकों के मनोबल को पुश देना रहा.

एक और मकसद, तमाम तरह के पूर्वानुमानों के बीच फ्लोटिंग वोटरों के बीच काॉन्फिडेंट दिखने की कोशिश हो सकता है. इस मकसद में भी अमित शाह का रोड शो कामयाब रहा है.
अमित शाह के रोड शो के साथ ही वाराणसी में प्रधानमंत्री मोदी के रोड शो के आयोजन ने भी उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे बक्सर, सासाराम से लेकर आरा- पटना तक के कार्यकर्ताओं को चार्ज अप कर दिया है, इसे फोटो फिनिश के तौर पर देखा जा सकता है.
जातिगत समीकरणों के लिहाज़ से रविशंकर प्रसाद को उम्मीद है कि उन्हें हर वर्ग का समर्थन मिलेगा.
एक कार्यकर्ता ने बताया सांसद तो उसी को बनना चाहिए जो हमारी ज़रूरत के वक्त मौजूद हो. हालांकि इस कार्यकर्ता ने पिछले दो चुनाव में उन्हीं शत्रुघ्न सिन्हा को वोट दिया था जो इनके मुताबिक 'कहां रहते हैं' इसका पता ही नहीं चलता है.
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