जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे पर बंदिश लगने से कश्मीर में नाराज़गी

श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाइवे

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    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए

जम्मू-कश्मीर में बारामूला-उधमपुर नेशनल हाइवे पर 31 मई तक हफ़्ते में दो दिन रविवार और बुधवार को लगने वाला ट्रैफिक बैन रविवार से लागू हो गया. सरकार ने श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाइवे पर सप्ताह में दो दिनों के लिए आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने का फ़ैसला किया है. राज्य के गृह सचिव की ओर से बुधवार को जारी इस आदेश का कश्मीर में विरोध हो रहा है.

कश्मीर के बारामूला, श्रीनगर, काजीकुंड, जवाहर टनल और बनिहाल से उधमपुर जाने वाले रास्ते सुरक्षा बलों के काफिले गुजरने के कारण बंद रहेंगे. उत्तर कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हाईवे से जब सुरक्षा बलों का काफिला गुजरेगा उस दौरान ट्रैफिक को बंद करने का हमें निर्देश मिला है.

आदेश के मुताबिक यह बंदिश सुबह चार बजे से शाम पांच बजे तक जारी रहेगी.

इस प्रतिबंध का मुख्य धारा के नेता, अलगाववादी और कारोबारी समुदाय के लोग विरोध कर रहे हैं और इसे जन-विरोधी आदेश बताते हुए इस पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं.

कश्मीर के आम लोग भी इसका यह कहते हुए विरोध कर रहे हैं कि इससे उनकी समस्याएं और बढ़ जाएंगी.

पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्लाह ने कहा है कि इस प्रतिबंध की समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से कहा है कि लोगों के लिए दिक्कतें पैदा करने वाले इस आदेश को वापस लिया जाए.

रफ़ियाबाद में पत्रकारों से बात कहते हुए अब्दुल्लाह ने कहा, "चरमपंथ के पिछले तीस सालों में सरकार ने इस तरह का आदेश कभी जारी नहीं किया. विधानसभा के पास कार बम धमाके के बाद भी नहीं. क्या यह आदेश यह दिखाता है कि कश्मीर अब तक के सबसे ख़राब दौर से गुज़र रहा है?"

उमर ने कहा कि बनीहाल से बारामूला तक सुरक्षाबल ट्रेन के माध्यम से भी आ-जा सकते हैं.

श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाइवे

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क्यों लिया गया फ़ैसला

14 फ़रवरी को पुलवामा में हुए हमले के बाद भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि जिस दौरान सुरक्षा बलों के काफ़िले गुज़रेंगे, उस समय आम नागरिकों के वाहनों को चलने की इजाज़त नहीं होगी.

पुलवामा में विस्फोटकों से भरी कार सीआरपीएफ़ के काफ़िले से जा टकराई थी जिसमें 40 जवानों की मौत हो गई थी. चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली थी. हमलावर की पहचान कश्मीरी युवक आदिल अहमद डार के रूप में हुई थी.

274 किलोमीटर लंबा श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाइवे ही कश्मीर को बाक़ी भारत से जोड़ने वाली इकलौती सड़क है. हर रोज़ सैकड़ों और हज़ारों आम लोगों के और सुरक्षा बलों के वाहन इससे गुज़रते हैं. हर रोज़ सुरक्षा बलों के काफ़िले जम्मू से श्रीनगर और श्रीनगर से जम्मू आते-जाते रहते हैं.

सुरक्षा बलों के काफ़िले बारामूला से जम्मू आते हैं. यह हाइवे दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग, अवंतिपुरा, पंपोर और उत्तरी कश्मीर में पाटन और बारामूला से होकर गुज़रता है.

हज़ारों यात्री रोज़ाना इसी हाइवे के माध्यम से उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर के बीच काम वगैरह के सिलसिले में आवागमन करते हैं.

भारतीय सेना का काफ़िला

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क्या कहते हैं आम लोग

उत्तरी कश्मीर के हिंदवाड़ा के ख़ुर्शीद अहमद कहते हैं, "आम नागरिकों की गाड़ियों पर रोक लगाने का सरकार का फ़ैसला दिखाता है कि भारत कश्मीर के लोगों को कितना प्यार करता है. वे सेना के लिए सड़क बना रहे हैं. ये बताइए कि मरीज़ अस्पताल कैसे पहुंचेंगे? लोगों को मिलना होता है, काम होते हैं. वे कैसे मंज़िल तक पहुंचेंगे? इससे लोगों के जीवन में नई समस्याओं का अंबार लग जाएगा."

अर्शिद अहमद दक्षिण कश्मीर के छात्र हैं जो कश्मीर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हैं. उन्होंने बीबीसी से कहा कि भारत सरकार ने यह आक्रामक नीति अपनाई है और हम इसके ख़िलाफ़ हैं.

उन्होंने कहा, "मुझे तो इसमें समझदारी नज़र नहीं आ रही. छात्रों की बात करें तो उन्हें मुश्किल होगी. छात्र पढ़ाई के लिए कई इलाक़ों से श्रीनगर आते हैं. यही एकमात्र रास्ता है. सरकार जब बुधवार और रविवार को इसे बंद कर देगी तो छात्र कोचिंग वगैरह के लिए बुधवार को कैसे जाएंगे? कश्मीर की बड़ी यूनिवर्सिटी श्रीनगर में है. ऐसे में यह आक्रामक नीति छात्रों को प्रभावित करेगी. हम पूरी तरह इसका विरोध करते हैं."

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व्यापारी भी परेशान

कश्मीर का कारोबारी समुदाय भी कहता है कि इस क़दम से उनका कारोबार प्रभावित होगा. वे और ज़्यादा अलग-थलग पड़ जाएंगे.

कश्मीर इकनॉमिक अलायंस (केईए) के चेयरमैन मोहम्मद यासीन ख़ान कहते हैं, "ट्रैफ़िक पर रोक लगाने से हमारा काम धंधा प्रभावित होगा. हमारा कारोबार एक तो पहले ही लगातार होने वाली हड़तालों और अन्य घटनाओं के कारण मंद चल रहा है. ऊपर से हम पूरी तरह इसी हाइवे पर आश्रित हैं. इसी के ज़रिये हम ज़रूरी साज़ोसामान लाते हैं.

मोहम्मद यासीन कहते हैं, ''हाइवे पर रोज़ वनवे ट्रैफ़िक होता है और आप हफ़्ते में इसे दो दिन बंद कर देंगे तो मतलब है कि हम तीन दिन ही चीज़ों को ला सकेंगे. 2014 में आई बाढ़ से हमारा बिज़नेस बुरी तरह प्रभावित हुआ है. अगर हमारे चौपट होते व्यापार के ऊपर इस तरह का क़दम उठाएंगे तो नतीजा क्या होगा, आप समझ सकते हैं. फिर किसी की आज़ादी पर इस तरह से बंदिश लगा देना मानवाधिकार का भी तो उल्लंघन है."

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सजाद गनी लोन कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि सरकार इस तरह का ग़लत फ़ैसला ले सकती है. क्या लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने का अधिकार नहीं है?"

पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने इस फ़ैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा तो करगिल युद्ध के दौरान भी नहीं किया गया था.

नेशनल कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला

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नाराज़ फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने कहा, "जम्मू-श्रीनगर हाइवे उस समय भी बंद नहीं किया गया था जब करगिल युद्ध चल रहा था और ख़ुफ़िया रिपोर्टें कह रही थीं कि आत्मघाती हमलावर कभी भी हमला कर सकते हैं. हो क्या रहा है? क्या आप कश्मीर को ब्रितानी कॉलोनी बनाना चाहते हैं?"

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सजाद गनी लोन ने इसे जनविरोधी बताया और कहा कि इस तरह के क़दमों से कश्मीर में मानवीय संकट पैदा हो जाएगा.

जे एंड के पीपुल्स मूवमेंट के अध्यक्ष शाह फ़ैसल ने मांग की है कि इस आदेश को वापस लिया जाए.

लोगों और राजनीतिक दलों के विरोध को देखते हुए कश्मीर के डिविज़नल कमिश्नर बशीर अहमद ख़ान ने शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, ''निजी वाहनों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई गई है.''

उन्होंने कहा, "डिप्टी कमिश्नर देखेंगे कि मेडिकल इमर्जेंसी होने पर, स्कूल जा रही गाड़ियों पर या फिर आपातकालीन स्थितियों में कैसे गाड़ियों को जाने देना है. यही नहीं, अगर कोई चुनाव अभियान में भी जुटा होगा तो उसे भी इजाज़त मिलेगी."

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